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पवित्र क्रूस की आराधना पवित्र क्रूस की आराधना  (ANSA)

पवित्र शुक्रवार आज भी जारी है, भारतीय धर्माध्यक्ष

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआइ) के महासचिव धर्माध्यक्ष थियोदोर मस्करेन्हास ने ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित पवित्र शुक्रवार संदेश जारी किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शनिवार 20 अप्रैल 2019 (वाटिकन न्यूज) :  भारत की काथलिक कलीसिया का दावा है कि जब तक इंसानों के साथ अन्याय, अत्याचार और शोषण होता है, पवित्र शुक्रवार को लोगों की स्मृति से हटाया या अनदेखा नहीं किया जा सकता। जो लोग सोचते थे कि उन्होंने निर्दोषों, हाशिये पर जीनेवालों और वंचितों के रोने की आवाज़ को चुप करा दिया है, उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि एक पास्का होगा।" ये बातें भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थियोदोर मस्करेन्हास ने ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित पवित्र शुक्रवार संदेश में कही।

भारत में पवित्र शुक्रवार सार्वजनिक अवकाश का दिन है, यह ख्रीस्तियों के लिए एक पवित्र दिन है जब वे क्रूस पर येसु की पीड़ा, दुःखभोग और मृत्यु का स्मरण करते हैं। यह उनके सबसे पवित्र पर्व, मसीह के मृत्यु पर विजयी होने का उत्सव ‘पास्का पर्व’ के साथ समाप्त होगा।

पवित्र शुक्रवार जारी है

अपने संदेश में, धर्माध्यक्ष मस्करेन्हास ने भारत के 1913 के नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्य रवींद्रनाथ टैगोर की जीसस क्राइस्ट, "द सन ऑफ मैन" कविता से उद्धृत किया: “उन्हें लगता है कि उनकी मृत्यु का लंबा क्षण-युग अभी समाप्त नहीं हुआ है, अनगिनत शिल्पकार अपनी चालाकी का कौशल सीखने के लिए हर तरफ से नये कीलों द्वारा उन्हें हर जोड़ में छेदते हैं। उन्होंने अपने मंदिर की छाया में खड़े होकर एक बार चोट पहुँचायी थी, वे भीड़ में नए सिरे से पैदा हुए हैं।”

धर्माध्यक्ष ने कहा कि पवित्र शुक्रवार हमारे मन में जारी रहता है।"येसु की हत्या, आधिकारिक रूप से शासकों द्वारा अनुमोदित, एक नफरत अभियान का चरमोत्कर्ष है जो सौभाग्य से मानवता के लिए है, जिसमें प्यार द्वारा नफरत की, क्षमा द्वारा अन्याय की, प्रकाश द्वारा अंधेरे की हार हुई।"

उन्होंने कहा कि पवित्र शुक्रवार का एक नफरत अभियान हमारे दिनों में लगातार चलता आ रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 14 फरवरी को पुलवामा, कश्मीर में सैनिकों पर आतंकवादी हमला, या किसी धर्म, जाति का होने के कारण भीड़ द्वारा हमला करने और मारने की अनुमति दिया जाना या एक निश्चित प्रकार का मांस ले जाने वाले को मार डाला जाना नफरत का उदाहरण है।

हाल ही में झारखंड में विशेष प्रकार के मांस ले जाने के संदेह में भीड़ ने आदिवासी प्रकाश लकड़ा को मार डाला और अन्य तीन बुरी तरह से घायल हो गये। तामिलनाडू के लिटल फ्लावर स्कूल में कर्मचारियों और धर्मबहनों को भीड़ का कोपभाजक बनना पड़ा था। मिश्नरीस ऑफ चारिटी की सिस्टर कॉनसीलिया बाल व्यापार के झूठे आरोप में रांची के जेल में बंद हैं।

पवित्र शुक्रवार का प्यार और क्षमा

धर्माध्यक्ष मस्करेन्हास ने कहा कि पवित्र शुक्रवार आज जीवित है क्योंकि यह "निस्वार्थता और क्षमा" का प्रतीक है। क्रूस पर येसु के शब्द, "पिता उन्हें क्षमा करें क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। "येसु का वचन यह दिखाता है कि प्रेम और क्षमा की शक्ति बुराई की शक्तियों को उखाड़ सकती है।"

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने उस व्यक्ति को माफ कर दिया जिसने उसे गोली मार दी और घायल कर दिया और ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्लाडिस स्टेन्स, जिसने 1999 में अपने पति और दो युवा बेटों के हत्यारों को माफ कर दिया, धर्माध्यक्ष मस्करेन्हास ने कहा कि ये सभी, इस प्यार और क्षमा के उदाहरण हैं।

धर्माध्यक्ष मस्करेन्हासने कहा, "पवित्र शुक्रवार का अंत नहीं है, यह एक नए जीवन की शुरुआत है, पास्का मौत पर जीत की खुशी है।"

20 April 2019, 16:36