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मिस्र के शहीद कोप्टिक ख्रीस्तीयों के प्रियजन शोक सभा में मिस्र के शहीद कोप्टिक ख्रीस्तीयों के प्रियजन शोक सभा में  (AFP or licensors)

मिस्र के शहीद ख्रीस्तीय विश्वास एवं चमत्कार के स्रोत

2015 में जिहादियों द्वारा जिन 21 कोप्टिक ख्रीस्तीयों की हत्या कर दी गयी थी वे मिस्र के एल आवोर के थे। यह क्षेत्र अब तीर्थस्थल एवं चंगाई पाने का स्थान बन गया है। फादर राफिक के अनुसार इससे स्पष्ट है कि जो स्वर्ग के इन चिन्हों पर विश्वास करते हैं, उन्हें इस पर अधिक गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

काहिरा, शनिवार, 16 फरवरी 2019 (एशियान्यूज)˸ वर्ष 2015 में मिस्र के 21 कोप्टिक ख्रीस्तियों की हत्या इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने लीबिया में सीर्त नामक तट पर कर दी थी। यह स्थान आज मिस्र के ख्रीस्तीय समुदाय के लिए एक चमत्कारिक स्थान बन गया है और उनके बलिदान द्वारा विश्वास को बल मिल रहा है।    

चार सालों पहले जिहादियों द्वारा अपहरण कर लिए गये ख्रीस्तीय कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गयी थी और उसका तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया था। इसकी याद मिस्र के लोगों में आज भी ताजी है। यह अब तीर्थ एवं चंगाई पाने का स्थान बन गया है।

खलीफा मिलिशिया के सिपाहियों द्वारा नरसंहार की यह घटना शायद जिहादी बर्बरता की पराकाष्ठा थी, जिसने इराक और सीरिया के अधिकांश क्षेत्र को नियंत्रण में ले लिया था तथा अफगानिस्तान, मिस्र एवं लीबिया में हिंसा को बढ़ा दिया था। एल आयोर शहर के 13 शहीदों को कॉप्टिक कलीसिया में संत के रूप में सम्मान दिया जाता है।

जर्मन लेखक मार्टिन मोसेबक ने एल आयोर की यात्रा करने के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "ऊपरी मिस्र को पार करते हुए ऐसा नहीं लगता है कि यह मुस्लिम बहुल देश हैं।" उन्होंने आईएस आईएस द्वारा मारे गये शहीदों के रिश्तेदारों एवं परिवार वालों से बातें कीं जिन्होंने उन्हें शहीदों के बलिदान एवं विश्वास से होने वाले चमत्कारों की जानकारी दी।

विगत कुछ वर्षों से मिस्र की कोप्टिक कलीसिया इस्लामिक स्टेट के हिंसक आक्रमण एवं अत्याचार की शिकार हुई है। ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा के शिकार देशों में मिस्र विश्व का 16वां देश है।

16 February 2019, 15:40