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संत पापा  वाटिकन में रब्बियों का अभिवादन  करते हुए संत पापा वाटिकन में रब्बियों का अभिवादन करते हुए 

काथलिक और यहूदियों के बीच 30वां संवाद दिवस

इटली की धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने इटली के काथलिकों और यहूदियों के साथ बातचीत को गहरा और विकसित करने के लिए अपने निमंत्रण को नवीनीकृत किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

रोम, गुरुवार 17 जनवरी 2019 (रेई) :  गुरुवार 17 जनवरी को इटली की धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने इटली के काथलिकों और यहूदियों के साथ बातचीत को गहरा और विकसित करने के लिए अपने निमंत्रण को नवीनीकृत किया। यह नियुक्ति 17 जनवरी 1990 से नवीनीकृत की जाती है, इस तिथि को यूँही नहीं चुना गया है पर ख्रीस्तीय एकता के लिए प्रार्थना सप्ताह (18-25 जनवरी) के शुरुआत की पूर्व संध्या पर पड़ता है।

संवाद दिवस का उद्देश्य

 तीस साल पहले 30 अक्टूबर 1989 को इटली की धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा गठित ख्रीस्तीय एकता और संवाद आयोग ने ख्रीस्तीयों और यहूदियों के साथ आपसी वार्ता को शुरु किया था, जिसका मूल उद्देश्य था, "अधिक से अधिक पारस्परिक ज्ञान के माध्यम से संवाद को गहरा करना, पूर्वाग्रहों पर काबू पाना, सामान्य बाइबिल मूल्यों को फिर से परिभाषित करना और न्याय, शांति और सृजन की सुरक्षा के लिए संयुक्त पहल करना और जहां संभव हो, दौरे का आदान-प्रदान करना।"

ख्रीस्तीय एकता और संवाद आयोग ने ख्रीस्तीय एकता के लिए प्रार्थना सप्ताह के शुरुआत की पूर्व संध्या पर काथलिक और यहूदियों के बीच संवाद दिवस को निर्धारित किया। इस दिन दोनों समुदायों के सामान्य मूल्यों पर ध्यान दिया जाता है, विशेष रूप से जो बाइबल में पाया जाता है और जिसे ख्रीस्तीय और यहूदी साझा करते हैं।

द्वितीय वाटिकन महासभा

द्वितीय वाटिकन महासभा ने दूसरे धर्मों और संप्रदाय के लिए अपने द्वार खोल दिया। आज का दिन काथलिक और यहूदियों के आपसी ज्ञान और सम्मान का एक असाधारण अवसर है। संत पापा पॉल छठे के बाद से ही सभी परमाध्यक्षों ने यहूदी भाईयों के साथ विशेष संबंध जोड़ने का प्रयास किया है। संत पापा पॉन पॉल द्वितीय ने 1986 में रोम के रोमन मंदिर में प्रवेश कर यहूदियों को "हमारे प्यारे भाइयो" कहकर संबोधित किया।

2005 में संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने कोलोन के सीनागोग का दौरा करते समय कहा था,"यहूदी धर्म हमारे लिए पराया नहीं है, लेकिन एक निश्चित तरीके से यह हमारे धर्म के अंदर है,वह जो मसीह से मिलता है, यहूदी धर्म से मिलता है।"

इजरायल, ख्रीस्तीय धर्म का मूल

जैसा कि इटली की धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के वयस्कों के धर्मशिक्षा में कहा गया है, "इजरायल पवित्र जड़ है, जहां से ख्रीसतीय धर्म विकसित होता है।” यह यहूदी-ख्रीस्तीय संवाद के प्रामाणिक विकास के लिए एक आवश्यक आधार है। संत पापा पियूस ग्यारहवें ने कहा था,“हम आध्यात्मिक रूप से यहूदियों से जुड़े हुए हैं। येसु भी एक यहूदी थे, एक यहूदी महिला से पैदा हुए और एक यहूदी के रूप में मर गए। येसु के प्रेरित यहूदी थे। संत पौलुस  हीब्रू बाइबिल के एक महान विशेषज्ञ थे। और इसलिए हम वहां से पैदा हुए हैं। यह हमारे विश्वास में निहित है। हमारे बाइबिल की तीन चौथाई भाग हिब्रू बाइबिल के साथ साझा की जाती है, इसलिए हमारे विश्वास के भीतर इसका मूल है इसे हम भूल नहीं सकते। आज हम जो हैं उसकी समृद्धि का एक हिस्सा है।”

17 January 2019, 15:28