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भारत की एक ख्रीस्तीय महिला प्रार्थना करते हुए भारत की एक ख्रीस्तीय महिला प्रार्थना करते हुए  (AFP or licensors)

रायपुर में परिवार वर्ष पर सम्मेलन

छत्तीसगढ़ में इस वर्ष को परिवार वर्ष घोषित किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रायपुर, मंगलवार, 27 नवम्बर 2018 (मैटर्स इंडिया)˸ छत्तीसगढ़ के रायपुर महाधर्मप्रांत ने परिवार वर्ष के उपलक्ष्य में एक सम्मेलन का आयोजन किया।

23 – 24 नवम्बर को धर्मप्रांत के 76 पल्लियों से करीब 1400 विश्वासियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

रायपुर के महाधर्माध्यक्ष विक्टर हेनरी ठाकुर ने सम्मेलन का उद्घाटन ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए किया, जहाँ उन्होंने कहा, "महाधर्मप्रांत के सभी पल्लियों का एक साथ जमा होना ही अपने आप में एक परिवार की अनुभूति है। ख्रीस्तीय जीवन संबंधों का जीवन है।"

ख्रीस्त का राज्य हमारे परिवारों में

ख्रीस्त राजा पर्व के एक दिन पूर्व उन्होंने कहा कि "जब ख्रीस्त का राज्य हमारे परिवारों में आयेगा तभी केवल इसे कलीसिया एवं समाज में वृहद स्तर पर महसूस किया जा सकेगा।"

सम्मेलन की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए नागपुर के दोमिनिकन पुरोहित जोर्ज कुमब्लामूतिल ने कहा कि ख्रीस्त केंद्रित परिवार एक मजबूत कलीसिया है। परिवार तभी ख्रीस्त केंद्रित हो सकता है जब वह प्रार्थना, ईशवचन को जीने एवं एक-दूसरे से प्रेम करने के द्वारा ख्रीस्त से संयुक्त हो। हम आशा करते हैं कि कलीसिया दोष रहित एवं गौरवान्वित बने क्योंकि जैसा परिवार होता है वैसी ही कलीसिया होती है।"  

परिवार में प्रार्थना का महत्व

राजनानंदगाँव के काथलिक जिला न्यायाधीश निर्मल मिंज ने कार्यक्रम में साक्ष्य देते हुए कहा कि यद्यपि वे एक काथलिक परिवार में जन्मे और पले- बढ़े तथापि युवास्था में वे एक अविश्वासी बन गये थे। बाद में कुछ समस्याओं के कारण वे प्रार्थना द्वारा येसु के पास लौटे। उन्होंने दैनिक पारिवारिक प्रार्थना पर जोर देते हुए कहा, "मेरे 88 वर्ष के बुजूर्ग पिता प्रत्येक दिन छः घंटे प्रार्थना करते हैं तथा 30 मिनट के लिए हर रोज बाईबिल पढ़ते हैं।" उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता की प्रार्थनाओं को देते हुए कहा कि इसी के बदौलत एक आदिवासी गाँव के युवक होते हुए भी वे जिला न्यायाधीश बन पाये।

जीवन ईश्वर का सर्वोत्तम दान

आधुनिक काथलिकों की प्रचलित गर्भ निरोधक मानसिकता की निंदा करते हुए महाधर्मप्रांत के प्रेरितिक केंद्र के निदेशक फादर जॉन पोन्नोरे ने कहा, "जीवन ईश्वर का सर्वोत्तम दान है। परिवार में पाँचवें बच्चे के रूप में मुझ पर क्या हुआ होता यदि मेरे गरीब माता-पिता ने मेरा गर्भपात कर दिया होता।" उन्होंने कहा कि गर्भपात एवं कृत्रिम परिवार नियोजन के द्वारा हम मानव बलि चढ़ाते हैं जिसको उसी समय रोक दिया गया है जब ईश्वर ने अब्राहम से कहा था कि वह अपने पुत्र इसाहक पर हाथ न उठाये।

संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक प्रबोधन आमोरिस लेतित्सिया की व्याख्या करते हुए धर्मप्रांत के परिवार आयोग के निदेशक फादर सालीन पुष्पराज ने कहा कि यह परिवारों के लिए धर्मशिक्षा की किताब है। उन्होंने परिवारों को प्रोत्साहन दिया कि वे उस किताब से हर दिन एक परिच्छेद पढ़ें और उस पर चिंतन करें।

ज्ञात हो कि प्रांतीय स्तर पर परिवार वर्ष का सम्मेलन 19-21 अक्टूबर को अम्बिकापूर में भी आयोजित किया गया था जिसमें छत्तीसगढ़ के पाँच धर्मप्रांतों से विश्वासियों ने भाग लिया था।

27 November 2018, 15:42