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सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में सन्त पापा फ्राँसिस सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में सन्त पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

सन्त जोसफ धर्मसमाजी पुरोहितों को सन्त पापा ने किया सम्बोधित

सन्त पापा ने कहा कि ओबलेट ऑफ सेन्ट जोसफ धर्मसमाज का विशिष्ट करिश्माई मिशन का लक्ष्य अपने जीवन में सेवाभाव का वरण उसी तरह करना है जिस प्रकार नाज़रेथ के सन्त जोसफ ने अपने जीवन द्वारा दर्शाया है। उन्होंने कहा कि नाज़रेथ के सन्त जोसफ की सरल, समझदारी से परिपूर्ण तथा विनम्र जीवन शैली ही धर्मसमाज का प्रेरक बिन्दु है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 31 अगस्त 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): रोम में इन दिनों अपनी आम सभा के लिये एकत्र ओबलेट ऑफ सेन्ट जोसफ धर्मसमाजी पुरोहितों को सन्त पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को सम्बोधित कर उनके प्रेरितिक मिशन की सफलता हेतु शुभकामनाएँ अर्पित कीं.

ओबलेट ऑफ सेन्ट जोसफ धर्मसमाज का करिश्माई मिशन

सन्त पापा ने कहा कि ओबलेट ऑफ सेन्ट जोसफ धर्मसमाज के संस्थापक द्वारा प्रसारित विशिष्ट करिश्माई मिशन का लक्ष्य अपने जीवन में सेवाभाव का वरण उसी तरह करना है जिस प्रकार नाज़रेथ के सन्त जोसफ ने अपने जीवन द्वारा दर्शाया है. उन्होंने कहा कि नाज़रेथ के सन्त जोसफ की सरल, समझदारी से परिपूर्ण तथा विनम्र जीवन शैली ही धर्मसमाज का प्रेरक बिन्दु है.

सन्त पापा ने कहा कि सन्त जोसफ ने निष्ठा, सादगी एवं विनम्रता के साथ मरियम तथा पुत्र येसु के संरक्षक का दायित्व निभाया. हर्ष के क्षणों में तथा कठिनाई के दिनों में भी  वे  अपनी धर्मपत्नी के समीप रहे तथा उनके एवं येसु के साथ उन्होंने एक आदर्श परिवार की रचना की और निरन्तर उनकी देख-रेख करते रहे.

नाज़रेथ के सन्त जोसफ आदर्श

ओबलेट ऑफ सेन्ट जोसफ धर्मसमाजी पुरोहितों का सन्त पापा फ्राँसिस ने आह्वान किया कि वे भी नाज़रेथ के सन्त जोसफ के सदृश सादगी और विनम्रता के गुणों का वरण कर कलीसिया एवं विश्व की सेवा करें. इसके लिये, सन्त पापा ने कहा, प्रभु ईश्वर के साथ आत्मीयता की आवश्यकता है जो सतत् प्रार्थना से हासिल की जा सकती है.

सन्त पापा ने कहा कि प्रार्थना, मौन तथा सामुदायिक मनन-चिन्तन ही धर्मसमाजी पुरोहितों के कार्य को ख्रीस्तीय सेवा रूप में परिणत कर ईश इच्छा को पहचानने में मददगार बनते हैं.   

ओबलेट ऑफ सेन्ट जोसफ धर्मसमाज के संस्थापक सन्त जोसफ मारेल्लो को उद्धृत कर सन्त पापा ने कहा कि प्रेम एवं कलीसियाई परमाध्यक्ष तथा उनकी शिक्षाओं के प्रति आज्ञाकारिता को प्रथम स्थान देने हेतु वे अनवरत धर्मसमाजियों से आग्रह करते रहे थे. अस्तु, आज आप भी अपने संस्थापक द्वारा स्थापित नियमों का पालन कर सर्वत्र ख्रीस्त एवं उनकी कलीसिया के साक्षी बनें.       

पुरोहितों से उन्होंने कहा, "नाज़रेथ के सन्त जोसफ के आदर्शों पर चल आप भी येसु की सेवा को समर्पित होवें क्योंकि अपने जीवन की बुलाहट का हर्षपूर्वक प्रत्युत्तर देने का यही अत्यन्त सरल, सुरक्षित तथा आनन्दपूर्ण रास्ता है."

सतही संस्कृति के प्रति चेतावनी

पुरोहितों से उन्होंने कहा कि भौतिक वस्तुओं को हासिल करने तथा ख़तरनाक शॉर्टकट के माध्यम से खुशी का वादा करनेवाली सतही संस्कृति के समक्ष, आप युवाओं को परिपक्व व्यक्तित्व बनाने हेतु प्रेरित करें जो बलशाली होने के साथ-साथ कोमलता से अन्यों के साथ व्यवहार करे. उन्होंने कहा कि युवाओं से येसु के विषय में बात करना, उनके साथ सुसमाचार का पाठ करना तथा उनके साथ मिलकर जीवन की चुनौतियों पर विचार करना आनन्द का यथार्थ स्रोत है और यही एक ठोस भविष्य के निर्माण का सर्वोत्तम मार्ग है.  

31 August 2018, 11:24