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वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल परोलिन वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल परोलिन  (ANSA)

आशा का मिशन है संत पापा की आयरलैंड यात्रा, कार्डिनल परोलिन

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने आयरलैंड में परिवारों के विश्व सम्मेलन के अवसर पर संत पापा की आगामी प्रेरितिक यात्रा के पूर्व, वाटिकन न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में आयरलैंड के कई मुद्दों पर बातें कीं जिनमें खास मुद्दे थे, आयरलैंड में याजकों के द्वारा यौन शोषण, आज के समाज में परिवार का महत्व तथा कलीसिया के जीवन में ख्रीस्तीय परिवारों का योगदान।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

कार्डिनल परोलिन ने कहा, "मैं सोचता हूँ कि संत पापा सबसे पहले परिवारों के सुसमाचार पर जोर देंगे जो धर्माध्यक्षों के सिनॉड की विषयवस्तु थी। परिवारों के सुसमाचार का अर्थ है आज के समाज एवं कलीसिया में परिवार के महत्वपूर्ण स्थान को रेखांकित करना एवं उस पर ध्यान देना, साथ ही, आज के विश्व में परिवार की प्रेरिताई को सहायता देना जो प्रेम की प्रेरिताई है, निष्ठावान बनाने, सिखलाने एवं जीवन का निर्माण करने की प्रेरिताई है।" उन्होंने आशा व्यक्त की कि संत पापा की उपस्थिति परिवारों को विश्व में प्रेम फैलाने के प्रयास को प्रोत्साहन देगा तथा व्यक्तियों एवं समाज को मदद करेगा कि वे खुशी प्राप्त कर सकें जिसकी तलाश हर व्यक्ति को है।

ख्रीस्तीय परिवारों का योगदान

आज की कलीसिया एवं जिन्हें व्यक्तिगत विश्वास का अनुभव नहीं है उन्हें ख्रीस्तीय परिवार क्या योगदान दे सकता है?

कार्डिनल ने कहा, सुसमाचार के आनन्द का साक्ष्य देना महत्वपूर्ण है तथा इसे प्रेम की शक्ति द्वारा दूसरों तक पहुँच कर दिया जा सकता है। प्रेम ही दुनिया में खुशी ला सकती है। आज की बड़ी समस्याएँ हैं अकेलापन और अलगाव, अतः परिवारों का मिशन है एकता की भावना लाना, लोगों में प्रेम जगाना, व्यक्ति एवं समुदाय के जीवन के प्रति सम्मान की भावना बढ़ाना। यही योगदान आज सभी परिवार एवं विशेषकर, ख्रीस्तीय परिवार विश्व को दे सकते हैं।

विस्थापन, पारिवारिक संकट तथा समलैंगिक यौन संबंध के मामले 

विस्थापन, पारिवारिक संकट तथा समलैंगिक यौन संबंध आदि जटिल मुद्दों पर भी डबलिन की सभा में विचार किया जाएगा। कलीसिया को इस संबंध में क्या कहना है जो उसके मूल्यों एवं दर्शनों को स्वीकार नहीं करते?

कार्डिनल ने कहा कि निश्चय ही कलीसिया परिवार पर सुसमाचार की सच्चाई एवं सुन्दरता का प्रस्ताव, सम्मान एवं सावधानी के साथ रखना जारी रखेगी किन्तु इसके लिए उसे आदर्श बनना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों का साथ देना महत्वपूर्ण है जिसके बारे संत पापा ने पहले ही कहा है कि कलीसिया एक अस्पताल के समान है जहाँ वह लोगों की देखभाल कर सके, उनका साथ दे सके, जिसकी शुरूआत सुनने एवं वार्ता स्थापित करने से होती है। 

याजकों द्वारा यौन दुराचार 

संत पापा जॉन पौल द्वितीय की 1979 में प्रेरितिक यात्रा के बाद से अब तक आयरलैंड में काफी बदलाव आये हैं। यह अवधि याजकों के यौन दुराचार से चिन्हित है। देश, हाल में प्रकाशित पेन्सेलवानिया रिपोर्ट द्वारा भी हैरान है। आयरिश लोगों को आप क्या कहना चाहते हैं?  

यह कहना आसान नहीं है क्योंकि याजकों के यौन दुराचार के कलंक ने सचमुच प्रभावित किया है और यह हमें भी प्रभावित कर रहा है। लोगों के जीवन एवं कलीसिया द्वारा विश्व को दिये जाने वाले साक्ष्य पर इसका बहुत बुरा असर होने वाला है। संत पापा हमें स्मरण दिलाते हैं कि हमारा पहला कर्तव्य है उन लोगों की मदद करना जो इससे प्रभावित हैं। मैं आशा करता हूँ कि आयरलैंड की कलीसिया इस असफलता को स्वीकार करती है तथा भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने के लिए उपाय सोचती  है। इस पृष्ठभूमि पर शोषण के शिकार लोगों को ध्यान देना तथा अतीत में हुई गलती को स्वीकार करते हुए उसके लिए पश्चाताप करने की आवश्यकता है। इसी प्रयास से खुशी पुनः लौट आयेगी। कार्डिनल ने उम्मीद जतायी कि संत पापा की यात्रा एक आशा की यात्रा होगी जो आयरलैंड की कलीसिया एवं परिवारों को मदद देगी। एक अधिक आशापूर्ण यात्रा जो सचमुच परिवर्तन लायेगी जहाँ हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर पायेंगे, जिसमें बच्चे एवं कमजोर, सुरक्षित होंगे और कलीसिया सचमुच सुसमाचार के अनुसार अपनी भूमिका निभा पायेगी।

22 August 2018, 17:30