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महाधर्माध्यक्ष बेर्नादितो औजा महाधर्माध्यक्ष बेर्नादितो औजा 

बेहतर भविष्य के लिए युद्धों से बच्चों की रक्षा आवश्यक, औजा

अमरीका के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक एवं प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष बार्नादितो औजा ने 9 जुलाई को, "आज बच्चों की रक्षा कल संघर्षों को रोकेगी" पर सुरक्षा परिषद के खुले विवाद में सभा को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

महाधर्माध्यक्ष औजा ने कहा, "बच्चे ही हैं जो हर युद्ध एवं संघर्ष में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। सशस्त्र संघर्ष में पहले से फंस गए बच्चों को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए कार्य करने में कभी देर नहीं होती। संघर्ष से प्रभावित लोगों के साथ हम किस तरह पेश आते हैं वह न केवल उनके भविष्य के लिए किन्तु विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन लोगों को सशस्त्र संघर्ष में फंसने के खतरे से बचाने के लिए हमें कार्य करना होगा। हम इस पीढ़ी के बच्चों को वर्तमान की गंभीर जोखिमों में खोने नहीं दे सकते।"

संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव का रिपोर्ट, दुनियाभर में सशस्त्र संघर्षों में बच्चों के खिलाफ उल्लंघन और दुर्व्यवहार के चौंकाने वाले पैमाने और गंभीरता का विवरण देता है। यह दिल दहलाने वाली बात है कि बच्चों को मार डाला जाता और उन्हें मानव बम के रूप में उपयोग किया जाता है।

बच्चों की सुरक्षा हेतु कार्य आवश्यक

उन्होंने कहा, हालांकि हम सुरक्षा परिषद के एजेंडे पर सभी संघर्षों का हल करने में सक्षम नहीं हो सकते, तथापि हम उन बच्चों की सुरक्षा में बेहतरी अवश्य कर सकते हैं जो विनाशकारी परिणामों का सामना कर रहे हैं। इसके लिए बच्चों और सशस्त्र संघर्ष का एजेंडा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह हमें बच्चों के खिलाफ सभी उल्लंघनों और दुर्व्यवहारों को रोकने के लिए उपकरण प्रदान करता है और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि अपराधियों को उत्तरदायी माना जा सके। इस परिषद और वास्तव में, पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के भीतर, इस मुद्दे पर और इसे पूरी तरह कार्यान्वित करने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए।

बच्चों को खतरे से बचाने के तीन उपाय

महाधर्माध्यक्ष ने बच्चों को सशस्त्र संघर्ष में फंसने के खतरे से बचाने के लिए तीन प्रमुख उपाय बतलाये।

उन्होंने कहा कि हमारी पहली जिम्मेदारी है बच्चों पर हो रहे हमलों को रोकने हेतु कार्य करना, उदाहरण के लिए बाल सैनिकों की संख्या को कम करना, यौन शोषण हेतु गुलामी पर रोक लगाना, बच्चों के विरूद्ध सामूहिक अपहरण एवं हिंसा के कृत्यों पर अंकुश लगाना।  

दूसरी जिम्मेदारी है जो बच्चे सशस्त्र बलों या सशस्त्र समूहों से जुड़े थे उनके प्रभावी पुनर्मिलन को प्राथमिकता देना। सशस्त्र संघर्ष में पकड़े गए बच्चों जो सशस्त्र बल के साथ ही क्यों न हों उन्हें पीड़ितों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन बच्चों के सफल पुनर्वास और पुनर्मिलन में न केवल उनका हित है बल्कि पूरे समाज का हित है।  

तीसरी जिम्मेदारी है कि सशस्त्र बलों के शिकार बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। अच्छी शिक्षा, यह सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आज संघर्षों से पीड़ित कल के संघर्षों को रोकने और शांति बनाने के लिए काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर काथलिक कलीसिया कई संघर्षपूर्ण इलाकों में शिक्षा एवं पुनार्वास के माध्यम से हिंसा से शिकार बच्चे बच्चियों की देखभाल करने का प्रयास कर रही है।

10 July 2018, 17:42