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संत कमील्लुस दी लेलिस संत कमील्लुस दी लेलिस  

संत कमिल्लुस रोगियों के संरक्षक

काथलिक कलीसिया 14 जुलाई को संत कमील्लुस दी लेलिस का पर्व मनाती है जो मिनिस्टर्स ऑफ दा सिक (रोगियों के सेवक) धर्मसमाज के संस्थापक हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रोम के संत कमिल्लो अस्पताल की प्रेरिताई हेतु नियुक्त पुरोहित उम्बेरतो द अंजेलो ने वाटिकन न्यूज को बतलाया कि रोगियों एवं स्वस्थ्य सेवा में समर्पित लोगों के संरक्षक, संत कमिल्लुस दी लेलिस, अस्पताल संगठन में शामिल सभी लोगों के अग्रदूत थे।    

उनका जन्म 25 मई 1550 को बुक्यियानिको में हुआ था वे एक सैनिक थे। उनका जीवन युद्ध और जुआ के बीच था किन्तु मन-परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना सब कुछ रोगियों की सेवा में लगा दिया। उन्होंने उनमें ईश्वर के हृदय को देखा तथा उनकी सेवा को अपना पेशा बनाया।

रोगियों के सेवक

सन् 1556 में संत कमिल्लुस ने मिनिस्टर्स ऑफ द सिक धर्मसमाज की स्थापना की जो आज दुनिया के कई हिस्सों में फैल चुका है। वे स्नेह एवं उदारतापूर्ण सामीप्य द्वारा बीमार और पीड़ित लोगों की मदद करते हैं।

पीड़ितों की सेवा, ख्रीस्त की सेवा

संत कमील्लुस कहते थे, बीमार लोग हमारे मालिक और स्वामी हैं। उन्होंने धर्मसमाज के लिए यह नियम दिया है जिसमें कहा गया है कि उन्हें रोगियों की देखभाल, उस माता की ममता के साथ करना है जो अपने एक बीमार बच्चे की सेवा करती है।

संत कमील्लुस का निधन 64 वर्ष की उम्र में 14 जुलाई 1614 में हुआ। उन्हें सन् 1746 में संत घोषित किया गया।

संत कमिल्लुस डी लेलिस, सैन्य स्वास्थ्य के संरक्षक

संत पापा पौल षष्ठम ने 1974 में संत कमिल्लुस दी लेलिस को सैन्य स्वास्थ्य का संरक्षक घोषित किया।  

आज कमिलियान मिशन पर प्रकाश डालते हुए फादर उम्बेरतो ने कहा कि यह प्रेम का साक्ष्य है एक ऐसे समाज में जहाँ नष्ट करने की संस्कृति प्रबल है। यह रोगियों के संरक्षक के रास्ते का अनुसरण कर रहा है। उन्होंने बतलाया कि संत कमिल्लो अस्पताल में खासकर, वे आध्यात्मिक एवं धार्मिक सहायता प्रदान करते हैं। वे हर दिन रोगियों से मुलाकात करते तथा उनके लिए संस्कार प्रदान करते हैं।    

कोई भी उपेक्षित नहीं

फादर ने कहा कि कोई भी व्यक्ति उपेक्षित नहीं हैं। हम संत कमील्लुस के मनोभाव एवं कारिज्म को ध्यान में रखते हुए, मरणासन्न मे पड़े लोगों को देखने जाते हैं। उन रोगियों के लिए जो जीवन की अंतिम घड़ी में रहते हैं उनके लिए आध्यात्मिक सहायता प्रदान करना एक आलिंगन के समान है जो ख्रीस्तीय आशा का चिन्ह है।

संत पापा फ्राँसिस का प्रोत्साहन

1 अक्टूबर 2016 को संत पापा फ्राँसिस ने संत कमिल्लो अस्पताल का दौरा कर वहाँ रोगियों एवं रोगी सेवक-सेविकों से मुलाकात की थी। उस अवसर पर उन्होंने कहा था, "मैं प्रोत्साहन देता हूँ कि आप इस आवश्यक एवं फलप्रद रास्ते पर आगे बढ़ते रहें। गरीब एवं कमजोर लोग ख्रीस्त के शरीर हैं जो ख्रीस्तियों को चुनौती देते तथा प्रोत्साहन देते हैं कि वे अपनी व्यक्तिगत रूचि के अनुसार नहीं बल्कि पवित्र आत्मा की प्रेरणा द्वारा संचालित हों। 

14 July 2018, 15:24