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बेलारूस का एक पुरोहित पापस्वीकार सुनते हुए बेलारूस का एक पुरोहित पापस्वीकार सुनते हुए  (AFP or licensors)

पापस्वीकार को समाप्त किये जाने की मांग, ख्रीस्तीय हैरान

एक भारतीय संघीय एजेंसी ने पापस्वीकार या मेल-मिलाप संस्कार संस्कार को समाप्त किये जाने की मांग की है। उसका आरोप है कि पुरोहित इसका प्रयोग महिलाओं को ब्लैकमेल करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए करते हैं किन्तु कलीसिया के अधिकारियों का मानना है कि यह उनके धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शनिवार, 28 जुलाई 2018 (रेई)˸ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग जो महिलाओं के हितों की रक्षा करता है, उसने केरल में ख्रीस्तीय पुरोहितों द्वारा बलात्कार और यौन हमले के दो मामलों में संघीय जांच का प्रस्ताव भी रखा है।

महिलाओं के राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट

महिलाओं के राष्ट्रीय आयोग अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, "पुरोहित महिलाओं को अपना राज बतलाने हेतु दबाव डालते हैं और इस तरह का एक मामला हमारे सामने है। इस तरह के कई मामले हो सकते हैं किन्तु अभी हमारे पास जो है वह सिर्फ बर्फ के ऊपरी तह की तरह है।"  

आयोग ने एक ऐसे व्यक्ति के दावे की जाँच की है जिसकी पत्नी को मलांकरा ऑर्थोडॉक्स सीरियाई कलीसिया के चार पुरोहितों ने उसके रहस्य जानने के लिए पापस्वीकार संस्कार का प्रयोग किया है तथा उसका यौन शोषण भी किया है।

एक अन्य मामला में 29 जून को 48 वर्षीय एक काथलिक धर्मबहन के शिकायत की जाँच की गयी है जिसमें पंजाब के जलांधर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष प्रांको मुलाक्कल ने धर्मबहन के साथ चार वर्षों तक बलात्कार किया था। उसने धर्माध्यक्ष पर आरोप लगाया है कि जब वे केरल गये थे तब उन्होंने 13 अन्य अवसरों पर भी उसका यौन शोषण किया था।

दोनों ही मामलों की जाँच पुलिस द्वारा हो रही है। आयोग ने जांच के लिए एक स्वतंत्र पैनल गठित किया और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी तथा केरल और पंजाब में पुलिस विभागों के प्रमुखों को अपने निष्कर्ष भेज दिये हैं।

प्रस्ताव अनुचित

धर्माध्यक्षों ने कहा कि पापस्वीकार संस्कार को समाप्त करने हेतु आयोग का प्रस्ताव, ख्रीस्तीयों के धार्मिक मामले में अनुचित हस्ताक्षेप है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थोओदोर मसकरेनहास ने कहा, "ख्रीस्तियों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना, उनके कोई भी पेशा का हिस्सा नहीं है।"

उन्होंने कहा कि पापस्वीकार संस्कार के दुरूपयोग की घटनाएँ कलीसिया के इतिहास में बहुत कम बार हुई हैं और कुछ लोगों की गलती के कारण, पूरे समुदाय को सामान्यीकृत और बदनाम करना बिलकुल अनुचित और अनावश्यक है।

केरल के धर्माध्यक्षों ने कहा है कि प्रस्ताव ने न केवल ख्रीस्तियों को हैरान किया है बल्कि उन सबों को भी जो धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि कमीशन ने गैर-जिम्मेदार तरीके से और गलत उद्देश्यों के साथ काम किया है, जब उसने इस विषय पर एकतरफा प्रस्ताव पेश किया, जिसपर इसका कोई जनादेश नहीं है।

छिपा राजनीतिक एजेंडा

पुलिस जांच के तहत आपराधिक मामलों में, आयोग की जांच से रिपोर्ट करने वाले व्यक्तियों के "छिपे राजनीतिक एजेंडा और सांप्रदायिक प्रकृति" का पता चला है।

धर्माध्यक्षों ने कहा कि प्रस्ताव के द्वारा क्षेत्र में संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का उलंघन और सांप्रदायिक तनाव एवं हिंसा पैदा करने के प्रयास का हिस्सा दिखाई पड़ता है।

ख्रीस्तीय धर्मगुरूओं ने कहा है कि जब से मोदी सरकार सत्ता पर आई हैं, ख्रीस्तियों पर हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उनपर आरोप है कि वे भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं और जिसके लिए वे ख्रीस्तीय विरोधी गतिविधियों को अपना रहे हैं।

सुधारपूर्ण उपायों को अपनाना

भोपाल के महाधर्माध्यक्ष लेओ कोरनेलियो ने कहा कि आयोग के लिए कोई कारण नहीं बनता कि वह "एक गलती के लिए, ख्रीस्तियों द्वारा पवित्र माने जाने वाली धर्मविधि को समाप्त करने की मांग करे।"  

उन्होंने कहा कि एक घटना का सामान्यीकरण कर, पापस्वीकार को समाप्त करने की मांग करने की अपेक्षा, हमारे लिए आवश्यक है सुधारपूर्ण उपायों को अपनाना।

28 July 2018, 15:04