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जैरूसालेम के होली सेपुलकर गिरजाघर के प्रवेश द्वार पर प्रेरितिक प्रशासक महाधर्माध्यक्ष पित्साबाल्ला जैरूसालेम के होली सेपुलकर गिरजाघर के प्रवेश द्वार पर प्रेरितिक प्रशासक महाधर्माध्यक्ष पित्साबाल्ला 

परीक्षा की घड़ी में जैरूसालेम की प्रार्थना बनी एकता का प्रतीक

जेरूसालेम शहर में बुधवार, 22 अप्रैल को एक ऐतिहासिक अंतरधार्मिक प्रार्थना सभा में कई धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें यहूदी, ईसाई, मुस्लिम और ड्रूज़ समुदाय के प्रतिनिधि शामिल थे, जिन्होंने हिब्रू, अरबी तथा अँग्रेज़ी भाषाओं में प्रार्थनाएँ पढ़ी। ।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

जैरूसालेम, शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): जेरूसालेम शहर में बुधवार, 22 अप्रैल को एक ऐतिहासिक अंतरधार्मिक प्रार्थना सभा में कई धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें यहूदी, ईसाई, मुस्लिम और ड्रूज़ समुदाय के प्रतिनिधि शामिल थे, जिन्होंने हिब्रू, अरबी तथा अँग्रेज़ी भाषाओं में प्रार्थनाएँ पढ़ी। ।

प्रार्थना सभा का सीधा प्रसारण इंटरनेट पर डिजिटल माध्यमों से किया गया ताकि तालाबन्दी के कारण लगे प्रतिबंधों के बावजूद सभी धर्मों के अनुयायी इसमें भाग ले सकें। सभा इस प्रार्थना से शुरु की गईः "हजारों लोग मर गए हैं, लाखों बीमार हो गए हैं। हे प्रभु, हम तुझसे आर्त याचना करते हैं। हे प्रभु, तेरी समृद्धि हमें भेज! बीमारों को पूर्णरूप से स्वस्थ कर, इस महामारी को विश्व से दूर कर दे।"

कोरोनवायरस के बाद भी बंधन जारी रहे

प्रार्थना सभा में जैरूसालेम के प्रेरितिक प्रशासक महाधर्माध्यक्ष पियेरबतिस्ता पित्साबाल्ला ने कहा, "कोरोनोवायरस की कोई सीमा नहीं है। धर्मों, नस्लों या राजनीतिक दलों के बीच कोई सीमा नहीं है।" उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का एकसाथ मिलकर प्रार्थना करना एक दुर्लभ घटना तथा उम्मीद जताई कि कोरोनवायरस संकट से गुजरने के बाद भी यह बंधन जारी रहे।

यहूदी रब्बी डेविड रोज़न ने इस प्रार्थना सभा को ऐतिहासिक निरूपित किया, उन्होंने कहा, "महामारी द्वारा दी गई चुनौती के प्रत्युत्तर में इस भूमि एवं इस देश के धार्मिक नेता पहली बार एक साथ मिलकर ईश्वर की दिव्य दया और करुणा की याचना हेतु संयुक्त प्रार्थना के लिए एकत्र हुए हैं।"

विश्वव्यापी संयुक्त प्रार्थना

इस अवसर पर स्तोत्र ग्रन्थ से 121 वें भजन का पाठ किया गया। जैरूसालेम की ओर जाते तीर्थयात्री इसी गीत को गाया करते हैं। इस्राएल में यह भजन, आतंकवाद के शिकार हुए इस्राएली सैनिकों के स्मृति दिवस पर भी गाया जाता है, जो अगले मंगलवार, 28 अप्रैल को मनाया जाएगा।

धार्मिक नेताओं ने एकता के प्रतीकवश एकसाथ मिलकर 121 वें भजन का पाठ किया तथा सम्पूर्ण विश्व को प्रभु ईश्वर की करुणा के सिपुर्द कियाः "मैं अपनी आँखें पर्वतों की ओर उठाता हूँ, क्या वहाँ से मुझे सहायता मिलेगी? जिसने स्वर्ग और पृथ्वी को बनाया है, वही प्रभु मेरी सहायता करता है। वह तुम्हारा पैर फिसलने न दे, तुम्हारा रक्षक न सोये। नहीं, इस्राएल का रक्षक न तो सोता है और न झपकी लेता है। प्रभु ही तुम्हारा रक्षक है। वह छाया की तरह तुम्हारे दाहिने रहता है। न तो दिन में सूर्य से तुम्हारी कोई हानि होगी और न रात में चन्द्रमा से। प्रभु तुम्हें हर बुराई से बचायेगा, वह तुम्हारी आत्मा की रक्षा करेगा। तुम कहाँ भी जाओगे, प्रभु तुम्हारी रक्षा करेगा, अभी और अनन्त काल तक।"

24 April 2020, 10:38