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परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेर्नार्दितो औजा परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेर्नार्दितो औजा  

बुजुर्गों के संरक्षण को मजबूत करने पर महाधर्माध्यक्ष का संदेश

हमें वृद्ध व्यक्तियों के मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने और उनके द्वारा दिये गये योगदानों को स्वीकार करते हुए समाज और परिवार में बहिष्कार को समाप्त करने में महत्वपूर्ण कदम उठाना चाहिए।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

न्यूयॉर्क, मंगलवार 16 अप्रैल 2019 (रेई) :  न्यूयॉर्क के संयुक्त राष्ट्र मानवअधिकार संगठन मुख्यालय में “बुजुर्गों के मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण को मजबूत करने के उपाय”  विषय पर 15-18 अप्रैल तक चलने वाले सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के लिए परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेर्नार्दितो औजा ने दसवें सत्र में सभा को संबोधित किया।

महाधर्माध्यक्ष ने अपने संदेश में संत पापा फ्राँसिस की बुजुर्ग लोगों के लिए की गई अपील को दोहराया। संत पापा फ्राँसिस ने हमें बार-बार इस बात पर चेतावनी दी है कि कैसे हमने "अपने बुजुर्गों के बहिष्कार को सामान्य बना दिया है।" हमें वृद्ध व्यक्तियों के मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने और उनके द्वारा दिये गये योगदानों को स्वीकार करते हुए इस तरह के बहिष्कार को समाप्त करने में महत्वपूर्ण कदम उठाना चाहिए।

वृद्ध व्यक्ति गरीबी, बीमारी, विकलांगता, सामाजिक अलगाव, हिंसा, परित्याग, दुरुपयोग, और ऐसे बुनियादी संसाधनों तक पर्याप्त भोजन और आश्रय के अभाव  के बोझ से प्रभावित होते हैं।  इस स्थिति में उनके परिवार के सदस्य जो स्वयं गरीबी का सामना कर रहे हैं उनके लिए बुजुर्ग बोझ बन जाते हैं। इस संबंध में उन्होंने सभा का ध्यान दो विशिष्ट मुद्दों पर कराया।

 1 मुद्दा

"शिक्षा, प्रशिक्षण, जीवन भर सीखने और क्षमता निर्माण के लिए समर्पित", जो कि उम्र के ज्ञान और एक पूर्ण भागीदारी के मूल्य के प्रति सम्मान बढ़ाता है, जो किसी भी वरिष्ठ को पीछे नहीं छोड़ता है। बुजुर्ग "हमारे लोगों की जीवित स्मृति" हैं, और इस कारण से वे अपनी धरोहर की खोज करने और अपनी स्वयं की गरिमा के बारे में अधिक जागरूक बनने में सभी की मदद कर सकते हैं।

 2 मुद्दा

बुजुर्गों की "सामाजिक सुरक्षा" भी अत्यधिक महत्व रखता है, क्योंकि सामाजिक सुरक्षा के उपाय यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि समाज में वृद्ध व्यक्ति की सुरक्षा और देखभाल हो। बहुधा बुजुर्गों को समाज के "अनुत्पादक" और "अनुपयोगी" सदस्यों के रूप में माना जाता है और सरकार एवं समाज पर बोझ के रूप में देखा जाता है।

महाधर्माध्यक्ष औजा ने कहा कि सभी के लिए मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों को पुनर्परिभाषित करने से एक अंतर-सांस्कृतिक एकजुटता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी जो एक दूसरे से पीढ़ियों को अलग नहीं करती है, लेकिन उन्हें एक साथ बांधती है। जैसा कि संत पापा फ्रांसिस कहते हैं, "हम कभी भी दूसरों को पीछे नहीं छोड़ सकते, कभी भी पीढ़ी को नकार नहीं सकते, लेकिन एक-दूसरे का साथ सामान्य रुप से जीवन व्यतीत करते हैं... अगर युवाओं को नए दरवाजे खोलने के लिए बुलाया जाता है, तो बुजुर्गों के पास चाबी होती है।”

 उन्होंने कहा कि आगे की कार्यशाला में, बुजुर्गों की मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नीतियों, कार्यक्रमों और लक्ष्यों को और अधिक ठोस बनाया जाए।

16 April 2019, 15:58