फातिमा तीर्थस्थल पर प्रार्थना करता एक तीर्थयात्री फातिमा तीर्थस्थल पर प्रार्थना करता एक तीर्थयात्री  (ANSA) संपादकीय

एक चरवाहे का हृदय जो द्वार कभी बंद नहीं करता

हमारे संपादकीय निदेशक ने "फिदूचा सुप्लिकान्स" पर चिंतन किया है, जो अनियमित परिस्थितियों में दम्पतियों के लिए सरल आशीर्वाद की संभावना और येसु के दृष्टिकोण एवं पोप फ्राँसिस की धर्मशिक्षा पर विचार करता है।

अंद्रेया तोरनियेली

“नेमो वेनित निसी त्राक्तुस” : कोई भी येसु के पास तब तक नहीं आ सकता जब तक कि वह खींचा न जाए, संत अगस्टीन ने नाज़रीन के शब्दों को स्पष्ट करते हुए लिखा है: "कोई भी मेरे पास नहीं आता जब तक कि पिता जिसने मुझे भेजा है उसे खींच न ले।"

येसु की ओर हमारे आकर्षण के मूल में - उस आकर्षण के बारे में बेनेडिक्ट 16वें बोलते हैं, याद दिलाता है कि विश्वास कैसे फैलता है – इसमें हमेशा कृपा सक्रिय होती है। ईश्वर हमेशा हमसे आगे चलते हैं, हमें बुलाते हैं, हमें अपनी ओर खींच लेते हैं, उनकी ओर एक कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं, या कम से कम हमारे अंदर वह कदम उठाने की इच्छा जगाते हैं, भले ही हमें अभी भी लगता है कि हमारे पास ताकत की कमी है और हम खुद को पंगु पाते हैं।

एक चरवाहे का हृदय उन लोगों के प्रति उदासीन नहीं रह सकता जो उसके पास आते हैं, विनम्रतापूर्वक आशीर्वाद माँगते हैं, चाहे उनकी स्थिति, उनका इतिहास, या उनके जीवन का मार्ग कुछ भी हो। चरवाहे का हृदय उस व्यक्ति की टिमटिमाती रोशनी को नहीं बुझाता जो अपनी अपूर्णता को महसूस करते हैं, यह जानते हुए कि उन्हें ऊपर से दया और सहायता की आवश्यकता है।

चरवाहे का दिल आशीर्वाद के उस अनुरोध में दीवार में एक दरार, एक छोटा सा छेद देखता है जिसके माध्यम से अनुग्रह पहले से ही काम कर सकता है। इसलिए, उनकी पहली चिंता छोटी दरार को बंद करना नहीं है, बल्कि आशीर्वाद और दया का स्वागत करना एवं प्रार्थना करना है ताकि उनके सामने वाले लोग अपने जीवन के लिए ईश्वर की योजना को समझना शुरू कर सकें।

यह अंतर्निहित जागरूकता आशीर्वाद के अर्थ पर विश्वास के सिद्धांत के लिए विभाग की घोषणा "फिदूचा सुप्लिकान्स" में परिलक्षित होती है, जो समलैंगिक जोड़ों सहित अनियमित स्थितियों में जोड़ों को आशीर्वाद देने की संभावना को खोलता है। यह स्पष्ट करता है कि इस मामले में आशीर्वाद का मतलब उनके जीवन विकल्पों को मंजूरी देना नहीं है और किसी भी अनुष्ठान या अन्य तत्वों से बचने की आवश्यकता पर जोर देता है जो दूर से विवाह की नकल कर सकते हैं।

यह दस्तावेज आशीर्वाद पर सिद्धांत को गहरा करता है, अनुष्ठान और धार्मिक आशीष एवं सहज लोगों के बीच अंतर करता है जो लोकप्रिय धर्मपरायणता से जुड़े भक्ति के कार्य हैं। यह एक ऐसा दस्तावेज है जो दस साल बाद पोप फ्रांसिस द्वारा "एवेंजेली गौदियुम" (ईजी 47) में लिखे गए शब्दों को ठोस बनाता है: "गिरजाघर एक टोलहाउस नहीं है; यह पिता का घर है, जहां हर किसी के लिए, उनकी सभी समस्याओं के लिए जगह है।”

घोषणा का मूल सुसमाचार प्रचार संबंधी है। सुसमाचार के लगभग हर पृष्ठ पर येसु परंपराओं और धार्मिक नियमों, निर्देशों और सामाजिक परंपराओं को तोड़ते हैं। वे ऐसे कार्य करते हैं जो खुद को धर्मी बतलानेवाले लोगों, तथाकथित "शुद्ध" लोगों को बदनाम करते हैं, जो खुद को दूर करने, अस्वीकार करने और दरवाजे बंद करने के लिए मानदंडों और नियमों को अपना ढाल बनाते हैं। सुसमाचार के लगभग हर पृष्ठ पर, हम देखते हैं कि संहिता के पंडितों प्रभु को तीखे सवालों से घेरने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी दया से भरी स्वतंत्रता पर गुस्से से बड़बड़ा रहे हैं: "यह आदमी पापियों का स्वागत करता है और उनके साथ खाता है!"

येसु अपने प्रिय सेवक को चंगा करने के लिए कफरनहूम में शतपति के घर जाने के लिए तैयार थे, किसी गैर यहूदी के घर में प्रवेश करके खुद को दूषित करने की चिंता के बिना। उन्होंने मेहमानों की आलोचनात्मक और तिरस्कारपूर्ण निगाहों के बीच पापी महिला को अपने पैर धोने की अनुमति दी, वे यह समझने में असमर्थ थे कि उन्होंने उसे दूर क्यों नहीं भेजा। उन्होंने चुंगी जमा करनेवाले जकेयुस को गूलर के पेड़ की शाखाओं में देखा और उसके जीवन में मन-परिवर्तन एवं बदलाव की मांग किए बिना दया की नजर डाली। उन्होंने उस व्यभिचारिणी की निंदा नहीं की, जो सहिंता के अनुसार, पत्थर मारने के अधीन थी, बल्कि उसे पत्थर मारनेवालों के हाथों को निहत्था कर दिया, और उन्हें याद दिलाया कि वे भी - हर किसी की तरह - पापी हैं। उन्होंने कहा कि वे बीमारों के लिए आए हैं, स्वस्थ लोगों के लिए नहीं, उन्होंने अपनी तुलना एक चरवाहे की विलक्षण छवि से की, जो खोई हुई भेड़ की तलाश में निन्यानबे भेड़ों को बिना सुरक्षा के छोड़ने को तैयार था। उन्होंने कोढ़ी का स्पर्श किया और उसे बीमारी और "अछूत" बहिष्कृत होने के कलंक दोनों से मुक्ति दिलाई। इन "बहिष्कृत" लोगों ने उनकी नजर को देखा और प्यार महसूस किया, बिना किसी पूर्व शर्त के उन्हें दी गई दया का आलिंगन प्राप्त किया। प्यार किये गये और माफ किये गये महसूस कर उन्हें एहसास हुआ कि वे क्या थे: हर किसी की तरह गरीब पापी, जिन्हें मन-परिवर्तन की आवश्यकता है, हर चीज के लिए भिखारी।

पोप फ्राँसिस ने फरवरी 2015 को नए कार्डिनलों से कहा: "येसु के लिए, सबसे बढ़कर जो मायने रखता है वह दूर-दराज के लोगों को बचाने के लिए पहुंचना, बीमारों के घावों को ठीक करना, सभी को ईश्वर के परिवार में लाना है! और यह कुछ लोगों के लिए ठोकर है! येसु इस तरह के ठोकर से नहीं डरते! वे उन बंद दिमागों के बारे में नहीं सोचते जो उपचार के कार्य से भी बदनाम होते हैं, किसी भी प्रकार के खुलेपन से बदनाम होते हैं, अपने मानसिक और आध्यात्मिक दायरे के बाहर किसी भी कार्य से, किसी भी दुलार या कोमलता के संकेत से जो सामान्य सोच और उनकी अनुष्ठानिक शुद्धता से मेल नहीं खाता।”

घोषणा पत्र में जोर देकर कहा गया है कि "विवाह का चिरस्थायी काथलिक सिद्धांत" नहीं बदलता है: केवल एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह में "यौन संबंध अपना प्राकृतिक, उचित और पूरी तरह से मानवीय अर्थ पाता है।"

इसलिए, विवाह के रूप में उसको मान्यता देने से बचना आवश्यक है "जो इसके विपरीत है।" लेकिन प्रेरितिक और मिशनरी दृष्टिकोण से, "अनियमित परिस्थितियों में जोड़ों" के लिए दरवाजा बंद नहीं है, जो एक साधारण आशीर्वाद की तलाश करते हैं, किसी तीर्थयात्रा के दौरान।

यहूदी विद्वान क्लॉड मोंटेफियोर ने ख्रीस्तीय धर्म की विशिष्टता की पहचान इस प्रकार की: “जबकि अन्य धर्म मानवता को ईश्वर की तलाश करने का माध्यम बतलाते हैं, ख्रीस्तीय धर्म ईश्वर को मानव की तलाश करनेवाले के रूप में घोषणा करता है... येसु ने सिखाया कि ईश्वर पापी के पश्चाताप की प्रतीक्षा नहीं करते; वे उसे खोजने और अपने पास बुलाने जाते हैं।''

प्रार्थना का खुला द्वार और एक छोटा सा आशीर्वाद एक शुरुआत, एक अवसर, एक मदद हो सकता है।

 

 

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19 December 2023, 17:15