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परमधर्मपीठ ने धर्म विरोधी पूर्वाग्रह व ईसाई विरोधी भावना को बढ़ाने की निंदा की

ओसीएसई के लिए परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक ने मुसलमानों, ईसाइयों और अन्य धर्मों के सदस्यों सहित असहिष्णुता और भेदभाव का मुकाबला करने के लिए एक बड़ी प्रतिबद्धता का आह्वान किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 1 अक्टूबर 2022 (वाटिकन न्यूज) : लोकतांत्रिक संस्थानों और मानवाधिकारों के लिए ओसीएसई कार्यालय द्वारा हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए, मोन्सिन्योर जानूस उर्बांज़िक ने चेतावनी दी कि यहूदी-विरोध से प्रेरित असहिष्णुता और भेदभाव और मुसलमानों, ईसाइयों एवं अन्य धर्मों के सदस्यों के खिलाफ पूर्वाग्रह दुनिया में बढ़ रहा है।

वियेना में वारसॉ मानव आयाम सम्मेलन को संबोधित करते हुए, यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (ओसीएसई) के लिए परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक ने कहा कि "सबसे हालिया घृणा अपराध डेटा से पता चलता है कि कार्यालय में रिपोर्ट की गई सभी घटनाओं में से 51% धार्मिक घृणा विरोधी अपराध थे।"

ईसाइयों के खिलाफ बढ़ता शत्रुतापूर्ण माहौल

मोन्सिन्योर उर्बांजिक ने कहा,  कि विशेष रूप से, "ख्रीस्तियों के खिलाफ असहिष्णुता और भेदभाव की चुनौती ख्रीस्तियों के खिलाफ बढ़ती शत्रुतापूर्ण माहौल के कारण से एक बड़ी चुनौती है।"

इस गलत धारणा का खंडन करते हुए कि केवल 'अल्पसंख्यक' ही असहिष्णुता और भेदभाव का शिकार हो सकते हैं, उन्होंने कहा कि ख्रीस्तियों को उन देशों में भी लक्षित किया जा रहा है जहां वे बहुसंख्यक का प्रतिनिधित्व करते हैं।  "परमधर्मपीठ आराधनालय, मस्जिदों, गिरजाघरों, अन्य पूजा स्थलों, कब्रिस्तानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने वाले हमलों की बढ़ती संख्या से चिंतित है।"

उन्होंने कहा कि हिंसा के इन घृणित कृत्यों में से अधिकांश यहूदी-विरोधी और धर्म-विरोधी पूर्वाग्रह से प्रेरित हैं।

डिजिटल युग

मोन्सिन्योर उर्बांजिक ने कहा कि ख्रीस्तियों, मुसलमानों और अन्य धर्मों के सदस्यों के खिलाफ यहूदी-विरोधी या असहिष्णुता डिजिटल युग से बहुत पहले मौजूद थी, लेकिन इंटरनेट और विशेष रूप से सामाजिक नेटवर्क के व्यापक उपयोग ने इसकी नाटकीय वृद्धि और इसके तरीके में एक मौलिक बदलाव किया है और इसे अंजाम दिया जाता है।

उन्होंने इन घटनाओं के कारण होने वाली असुरक्षा की भावना पर विचार किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा, "ख्रीस्तियों और अन्य धर्मों के सदस्यों के दैनिक जीवन पर साथ ही उनके मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। "

उन्होंने इन चुनौतियों को पहचानने और इस तथ्य को स्वीकार करने का आह्वान किया कि ये परस्पर चिंता का विषय हैं। जबकि उनका सबसे गहरा प्रभाव लक्षित समुदाय के जीवन पर है, समस्या को हमारे समाज द्वारा समग्र रूप से पहचानने और संबोधित करने की आवश्यकता है।"

दरअसल, "जब भी किसी भी धार्मिक समुदाय को उसके धार्मिक विश्वासों के कारण सताया और हाशिए पर रखा जाता है, तो समग्र रूप से समाज की भलाई खतरे में पड़ जाती है और प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों का प्रयोग कम हो जाता है।"

अपील करना

अंत में, उन्होंने भाग लेने वाले राज्यों की ओर से 2014 में एक ऐतिहासिक ओसीएसई मंत्रिस्तरीय बैठक में जो करने के लिए सहमत हुए थे, उसे पूरा करने में "एक स्पष्ट चूक" पर प्रकाश डाला।

बासेल में उस बैठक के दौरान, ओसीएसई राजनीतिक निकायों ने नस्लवाद, विदेशियों के प्रति घृणा, सभी आधारों पर भेदभाव, घृणा अपराधों और असहिष्णुता के अन्य रूपों से निपटने के लिए एक व्यापक कार्य योजना विकसित करने का वचन दिया था।

उन्होंने निष्कर्ष निकाला,  कि यह कार्य, मौजूदा प्रतिबद्धता की फिर से व्याख्या करने के लिए कुछ प्रतिनिधिमंडलों के प्रयासों के बावजूद, मुसलमानों, ख्रीस्तियों और अन्य धर्मों के सदस्यों के खिलाफ असहिष्णुता और भेदभाव का मुकाबला करने का दायित्व  हम सभी का है।

 

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01 October 2022, 16:12