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29 जून 2021 के मिस्सा बलिदान में  संत पापा 29 जून 2021 के मिस्सा बलिदान में संत पापा   (AFP or licensors)

संत पापाः धर्मविधि के केंद्र में वापसी की आवश्यकता

संत पापा फ्रांसिस ने 71वें राष्ट्रीय धर्मविधि सप्ताह की शुरूआत पर जो 26 से क्रेमोना में होगा, कैल के अध्यक्ष मोन्सिग्नर क्लाउडियो मेनियागो को संदेश भेजते हुए महामारी के कारण निलंबित धर्मविधि पर अपने “दुखद अनुभव” साझा किये।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रोमवार, 23 अगस्त 21 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने इतालवी धर्मविधि के सम्मेलन में भाग लेने वालों को बधाई देते हुए अपने संदेश में कहा कि पिछले साल के कोविड-लॉकडाउन कलीसिया को रविवारीय धर्मविधि की महत्वपूर्ण को फिर से खोजने में मदद कर सकती है।

71वें राष्ट्रीय धर्मविधि का सप्ताह, इतालवी पुरोहितों और लोकधर्मियों की सहभागिता में इटली के उत्तरी शहर क्रेमोना में 26 अगस्त से हो रहा है। संत पापा फ्रांसिस ने 4 दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हेतु वाटिकन राज्य के सचिव कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन द्वारा हस्ताक्षरित संदेश में ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के भाव जाहिर करते हुए कहा कि महामारी के कारण “पिछले साल के निराशाजनक स्थिति उपरांत” इस आयोजन इस वर्ष व्यक्तिगत रूप में हो रहा है।

संत पापा ने कहा कि इस, “कार्यक्रम को स्थगित करना अपने में दर्दनाक निर्णय था," हालांकि एक नए विषयवस्तु का चुनाव, जो “समारोह” के विभिन्न पहलुओं पर हमें और भी गरहाई से चिंतन करने को प्रेरित करेगा।

धर्मविधि और ख्रीस्तीय पहचान

सम्मेलन की विषयवस्तु जिस पर प्रकाश डालते हुए संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि इसकी विषयवस्तु, “जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं”, समुदाय, धर्मविधि और सीमाएं है।

उन्होंने कहा कि ख्रीस्तियों के रुप में येसु के पास नाम पर हमारा साप्ताहिक रूप में एक साथ धर्मविधि में सहभागी होना कलीसिया के रुप में हमारी पहचान का अंतरंग भाग है। हालांकि, उन्होंने इस बात का अफसोस जताया, साप्ताहिक मिलन “हामारी के तीव्र चरण में कठोर रूप से सीमित कर दिये गये थे।”

फिर भी, प्रभु के लिए प्रेम और पुरोहितों की सृजनात्मकता ने लोकधर्मियों के लिए यूखारिस्तीय धर्मविधि को हर संभव नए तरीको से उपलब्ध किया जिससे वे अपने को ईश्वीरय प्रेम और आपसी एकता से पोषित करते हुए यूखारिस्तीय धर्मविधि के प्रति वफादार बन रहें।

लॉकडाउन में मौजूदा हालात बिगड़े

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि पिछले साल का “धर्मविधि उपवास” अपने में दर्दनाक था, लेकिन येसु के क्रूस रहस्य से आलोकित बहुतों के फलहित कार्य “दान पुण्य, भ्रातृतत्वमय प्रेम और अति संवेदनशील लोगों की सेवा” जैसे कार्यों को फलदायी बनाया।

उन्होंने कहा कि यूखारिस्तीय धर्मविधि में सहभागिता की कमी ने हमें इस बात के महत्व का एहसास दिलाया कि हमें “भौतिक रूप में भी पार्थना कराना चाहिए।” गिरजाघरों का बंद होना इतालवी प्रायद्वीप में पहले से चल रही एक तथ्य को भी सामने लाया है  जिसमें कुछ उम्र के लोगों में यह सामूहिक रुप से गिरावट के हाल को व्यक्त करता है।

संत पापा ने कहा, “हम देखते हैं कि समय और रविवार के बारे में लोगों की धारणा बदल गई है, जिसका परिणाम समुदाय, लोगों और परिवारिक जीवन में देखने को मिलता है। “रविवारीय धर्मविधि इस भांति पीढ़ीगत और सांस्कृतिक प्रतिभागिता के संदर्भ में असंतुलित है।”

विश्वास धर्मविधि के केन्द्र विन्दु

संत पापा ने इस बात की आशा व्यक्त की है धर्मविधि का यह सम्मेलन पूरे इटली के पल्लियों में नए विचारों और प्रेरितिक दिशा-निर्देशों को प्रज्वलित करेगा। रविवार धर्मविधि, यूखारिस्तीय मिलन, प्रेरिताई के कार्य और हाशिए में रहने वालों द्वारा संस्कारों के निष्पादन के तरीके विश्वासियों के विश्वास और आध्यात्मिकता को पुनः केन्द्र विन्दु में स्थापित करेगा।

संत पापा फ्राँसिस ने अपने संदेश का समापन इटली की कलीसिया के लिए प्रार्थना का आश्वासन देते हुए किया क्योंकि यह येसु ख्रीस्त को अपने धार्मिक जीवन के केंद्र में रखना चाहती है।

 

23 August 2021, 16:01