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महान कवि दांते अलीगेरी की प्रतिमा महान कवि दांते अलीगेरी की प्रतिमा  (AFP or licensors)

संत पापा ने आशा के नबी एवं करुणा के कवि दांते की याद की

संत पापा फ्राँसिस ने 25 मार्च को महान कवि दांते अलीगेरी के निधन की 7 सौवीं वर्षगाँठ के अवसर पर, "कंदोर लुचिस इतेरने" (अनन्त प्रकाश की चमक) शीर्षक के एक प्रेरितिक पत्र प्रकाशित किया तथा दांते की कृति "द डिवाइन कॉमेडी" में विश्वास की प्रासंगिकता, कालातीतता और गहराई को उजागर किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 25 मार्च 21 (रेई)- पोप फ्रांसिस ने अपने प्रेरितिक पत्र कंदोर लुचिस एतेरने में लिखा है, कि 1321 में फ्लोरेंस में निर्वासन के समय उनकी मृत्यु के 700 वर्षों बाद भी वे हमसे बात करते हैं। वे आज की महिलाओं और पुरूषों से बात करते हैं, वे पढ़ने और अध्ययन करने के लिए प्रेरित करते हैं बल्कि सुन्दरता जो ईश्वर का असीम एवं अनन्त प्रेम है उसे सुनने एवं उसके रास्ते पर आगे बढ़ने की सलाह देते हैं। प्रेरितिक पत्र को 25 मार्च को प्रकाशित किया गया जब प्रभु के जन्म के संदेश का पर्व मनाया जाता है। इस तिथि को यों ही नहीं चुना गया है बल्कि शरीरधारण का रहस्य, जो ईश्वर की योजना में मरियम की पूर्ण स्वीकृति में साकार हुआ है, जिसने उस अद्भुत आदान-प्रदान को प्रभावित किया, जिसमें ईश्वर ने मानव बनकर हमारे इतिहास में प्रवेश किया, और मानवता को "ईश्वर के पास लाया, जिसमें उसे सच्चा सुख मिलता है" यही महान कवि दांते की पूरी कविता का केंद्र एवं प्रेरणा है।

पोप और दांते

नौ अनुच्छेदों में विभक्त संत पापा के प्रेरितिक पत्र की शुरूआत दांते के बारे में विभिन्न संत पापाओं के विचारों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया है। उसके बाद पोप फ्राँसिस ने अलीगेरी के जीवन पर दृष्टि डाला है, उन्हें मानव परिस्थिति का मिसाल कहा है और उनके काम की "चिरस्थायी समयबद्धता और महत्व" पर जोर दिया है। संत पापा ने लिखा है कि वास्तव में यह हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है जो हमें यूरोप एवं पश्चिम के ख्रीस्तीय मूल में ले चलता है। यह उन आदर्शों और मूल्यों को स्वीकार करता है, जिन्हें कलीसिया और नागरिक समाज "आज भी" प्रस्तावित करना जारी रखते हैं, जो एक मानवीय सामाजिक व्यवस्था का आधार है जिसमें सभी लोग एक-दूसरे को भाइयों और बहनों के रूप में देख सकते हैं।"  

खुशी की जन्मजात चाह

संत पापा ने बतलाया, "डिवाइन कॉमेडी में दो मुख्य स्तम्भ हैं – मानव हृदय में एक जन्मजात चाह और उस खुशी में पूर्णता प्राप्त करना, जिसकी प्राप्ति प्रेम के दर्शन अर्थात् ईश्वर में होती है। यही कारण है कि दांते आशा के नबी हैं क्योंकि उन्होंने अपने कार्य में मानवता से अपील की कि वह अपने को पाप के "अंधेरे जंगल" से मुक्त करे ताकि वह सही रास्ता पा सके और वह जीवन की पूर्णता, ईश्वर की अनन्त धन्यता तक पहुँच सके। दांते द्वारा दिखाया गया रास्ता एक सच्ची तीर्थयात्रा का रास्ता है जहाँ सभी पहुँच सकते हैं क्योंकि ईश्वर की दया हमेशा सभी को बदलाव एवं मन-परिवर्तन का अवसर प्रदान करता है।  

दांते की महिलाएँ

प्रेरितिक पत्र में डिवाइन कॉमेडी की तीन महिलाओं का भी जिक्र किया गया है ˸ मरियम, ईश्वर की माता जो उदारता का प्रतिनिधित्व करती है, व्यत्रीस आशा का प्रतिनिधित्व करती है एवं संत लुसी विश्वास का प्रतिनिधित्व करती है। ये तीन महिलाएँ तीन ईशशास्त्रीय सदगुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं जो दांते को उनकी तीर्थयात्रा के विभिन्न चरणों में साथ देती हैं। यह दिखलाता है कि हम अकेले नहीं बच सकते बल्कि हमें उन लोगों के मदद की जरूरत है जो हमारा समर्थन करते, प्रज्ञा एवं विवेक से हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

दांते और संत फ्राँसिस असीसी

संत पापा ने अपने प्रेरितिक पत्र में संत फ्राँसिस को भी स्थान दिया है जिनका चित्रण दांते के कार्य में एक "धन्य व्यक्ति के एक श्वेत गुलाब" के रूप में किया गया है। संत पापा, संत फ्राँसिस एवं कवि के बीच कई समानता पाते हैं। दोनों लोगों को सम्बोधित करते हैं, सबसे पहले लोगों के पास जाते, उसके बाद लैटिन का चुनाव नहीं करते बल्कि स्थानीय भाषा, सभी की भाषा को चुनते हैं। दोनों सृष्टि के सौंदर्य एवं महत्व के लिए खुले हैं।  

सभी के लिए संदेश

संत पापा ने उन शिक्षकों को बधाई दी है जिन्होंने उत्साह के साथ दांते के संदेश का प्रचार किया है तथा दूसरों को उनके कार्यों में निहित सांस्कतिक, धार्मिक और नैतिक समृद्धि को प्रकट किया है। उन्होंने आग्रह किया है कि यह धरोहर स्कूलघरों एवं विश्वविद्यालयों के अंदर बंद न रहे, बल्कि जाना और प्रचार किया जाए। संत पापा ने ख्रीस्तीय समुदायों एवं सास्कृतिक संगठनों को उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया है। उन्होंने कलाकारों से आग्रह किया है कि वे सुन्दरता की राह पर चलते हुए दांते की कविता को आवाज, चेहरा, हृदय और आकार प्रदान करें। इसके लिए वे शांति, स्वतंत्रता एवं भाईचारा के संदेश का प्रचार करें।

25 March 2021, 18:02