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संत पापा देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा देवदूत प्रार्थना के दौरान  (Vatican Media)

सच्चे परिवर्तन का लक्ष्य नया भविष्य

संत पापा फ्रांसिस ने 07 अप्रैल के देवदूत प्रार्थना के पूर्व संदेश में व्यभिचारिणी नारी पर चिंतन करते हुए अपना संदेश दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 08 अप्रैल 2019 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 07 अप्रैल को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना हेतु जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को  संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाई और बहनो, सुप्रभात।

चालीस के इस पांचवें रविवार में धर्मविधि के पाठ हमारे लिए व्यभिचारिणी नारी का वृतांत प्रस्तुत करता है। (यो.8.1-11) यहां हम दो विरोधाभास मनोभावों को पाते हैं एक ओर सदूकियों और फसीरियों के विचार तो दूसरी ओर येसु के मनोभाव। प्रथम दल वाले संहिता के नियमानुसार नारी को दण्ड देने की सोचते वहीं येसु उस नारी को बचाना चाहते हैं क्योंकि वे ईश्वर की दया, करूणा, मेल-मिलाप और मुक्ति के अवतार हैं।

संत पापा ने कहा कि आइए हम इस परिदृश्य पर गौर करें। येसु मंदिर में शिक्षा दे रहे थे कि सदूकियों और फरिसियों ने व्यभिचार में पकड़ी गई एक नारी को उनके सामने लेकर आया। उन्होंने उसे बीच में खड़ा कर दिया और येसु से पूछा कि मूसा के नियमानुसार उसे पत्थरों से मार डालना जाना चाहिए। सुसमाचार लेखक हमारे लिए इस बात को स्पष्ट कराते हैं कि “वे येसु की परीक्षा लेने के उद्देश्य से यह पूछते हैं जिससे उन पर दोषारोपण लगाया जा सकें।” यहाँ हम उन लोगों की दुष्टता को देख सकते हैं नारी को पत्थर “न” मारना येसु द्वारा संहिता के नियम का उल्लंघन करना था वहीं “हां” कहना रोमी अधिकार को अस्वीकार करना, जो भीड़ द्वारा किसी को सजा देने की बात को अस्वीकार करती थी। ऐसी परिस्थिति में येसु को उनके सवाल का उत्तर देना था। येसु के विरोधी अपने को नियमों में घेरे में बांधे रखते और स्वयं मानव पुत्र को न्याय और दोषारोपण के परिदृश्य में फांसना चाहते हैं। लेकिन येसु दुनिया का न्याय करने औऱ उसे दोषी ठहराने हेतु नहीं वरन वे लोगों को बचाने औऱ उन्हें नया जीवन देने हेतु आये। येसु इस परिस्थिति का सामना कैसे करते हैंॽ शुरू में वे अपने में चुपचाप रहते हैं, वे झुककर जमीन पर अपनी अंगुली से कुछ लिखते हैं, मानों वे अपने में इस बात को याद कर रहे हों कि केवल ईश्वर ही नियमों के निर्माता और न्यायपालिका का कार्य करते जिन्होंने नियमों को पत्थरों की पाट्टी में अंकित किया है। इसके बाद वे कहते हैं “तुममें से जो निष्पाप हो वही उसे सबसे पहले उसे पत्थर मारे।” (7) अपने इस कथन के द्वारा येसु उन लोगों को आत्मपरीक्षण करने हेतु निमंत्रण देते हैं। येसु उन्हें स्वयं के पापमय स्थिति में होने का एहसास दिलाते हैं क्योंकि वे अपने में “न्याय के विजेता” होने का अनुभव कर रहे होते हैं। सुसमाचार हमें बतलाता है कि येसु के वचनों को सुनकर एक के बाद एक- बड़े से लेकर छोटे तक - वहाँ से चले गये, किसी ने भी उस नारी को सजा नहीं दिया। संत पापा ने कहा कि यह परिदृश्य हमें भी अपने आप को पापियों के रुप में देखने हेतु निमंत्रण देता है जहाँ हम अपने हाथों में पकड़े गये दोष और निंदा के पत्थरों को छोड़ने के लिए बुलाये जाते हैं जिसे हम दूसरों की ओर फेंकने हेतु तैयार रहते हैं। जब हम अपनी टीका-टिप्पणी के द्वारा दूसरों की तरफ पत्थर फेंकते, दूसरों को मारते हैं तो हम भी दोष ढूंढने वालों के समान होते हैं।

ईश्वर हमें सजा नहीं देते

अंत में केवल येसु और वह नारी केवल रह जाते हैं। संत अगुस्टीन करते हैं, “करूणावान और दोषीदार” केवल रह जाते हैं। येसु ही केवल वह व्यक्ति है जो पापरहित हैं, जो उस नारी की ओर पत्थर फेंक सकते हैं लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं, क्योंकि ईश्वर पापी की मृत्यु नहीं चाहते वरन वे चाहते हैं कि वह पश्चताप कर नये जीवन की शुरूआत करे।(एजा.33.11) येसु उस नारी को अपने इस विस्मयपूर्ण वचनों के द्वारा विदा करते हैं, “जाओ और फिर पाप न करना।” येसु उसके सामने एक नया द्वार खोलते हैं जो कारूणा के द्वारा निर्मित होता है, एक मार्ग जो उस नारी के द्वारा निष्ठा की मांग करता जो उसे पुनः कभी पाप नहीं करने हेतु निमंत्रण देता है। संत पापा ने कहा कि यह हम सभों को भी अपने में सम्माहित करता है, जब येसु हमें क्षमा करते हैं तो वे हमारे लिए सदा एक नये राह को खोलते हैं जिससे हम उसमें आगे बढ़ सकें। चालीसा की इस अवधि में हम अपने को पापी स्वीकारने और अपने पापों के लिए ईश्वर से क्षमा मांगने हेतु बुलाये जाते हैं। ईश्वर की क्षमाशीलता में हमारा मेल-मिलाप होता और हम उनकी शांति का अनुभव करते हुए अपने नये इतिहास की शुरूआत करते हैं। हर सच्चा परिवर्तन का लक्ष्य नया भविष्य है जहाँ हम अपने में सुन्दर, पापरहित उदारता पूर्ण जीवन को पाते हैं। हम अपने में येसु से क्षमा मांगने हेतु भय का अनुभव नहीं करते हैं क्योंकि वे हमारे लिए जीवन का एक नया द्वार खोलते हैं। माता मरियम हमारी सहायता करें जिससे हम ईश्वर के करूणामय प्रेम का साक्ष्य दे सकें जो येसु ख्रीस्त में हमें क्षमा करते और सदैव नई संभावनाओं से साथ हमारे जवीन को नवीन बनाते हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने सभी विश्वासियों औऱ तीर्थयात्रियों के संग मिलकर देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

 

 

08 April 2019, 15:28