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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस 

येसु ने दिखाये प्रलोभन से बचने के उपाय

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, चालीसा काल के प्रथम रविवार 10 मार्च को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

चालीसा काल के इस प्रथम रविवार का सुसमाचार पाठ (लूक. 4,1-13) निर्जन प्रदेश में येसु की परीक्षा के अनुभव का वर्णन करता है। चालीस दिनों तक उपवास करने के बाद, शैतान द्वारा तीन बार तक येसु की परीक्षा ली गयी। पहली परीक्षा में उन्हें पत्थर को रोटी बनाने हेतु प्रेरित किया गया। (पद.3) दूसरी परीक्षा में शैतान उन्हें ऊपर उठा ले गया और क्षण भर में संसार के सभी राज्य दिखा कर बोला, ''मैं आपको इन सभी राज्यों का अधिकार और इनका वैभव दे दूँगा।" (पद. 5-6) अंत में शैतान ने उन्हें येरुसालेम ले जा कर मन्दिर के शिखर पर खड़ा कर दिया और कहा, ''यदि आप ईश्वर के पुत्र हैं, तो यहाँ से नीचे कूद जाइए; क्योंकि लिखा है- तुम्हारे विषय में वह अपने दूतों को आदेश देगा कि वे तुम्हारी रक्षा करें और वे तुम्हें अपने हाथों पर सँभाल लेंगे कि कहीं तुम्हारे पैरों को पत्थर से चोट न लगे''। (पद. 9-11)

अधिकार का लालच

संत पापा ने कहा कि ये तीन प्रलोभन दुनिया के तीन रास्तों की ओर संकेत करते हैं जो धोखा देने के लिए बड़ी सफलता की प्रतिज्ञा करते हैं। जिसमें व्यक्ति अधिक से अधिक पाने तथा मानवीय गौरव एवं ईश्वर का प्रयोग करने की कोशिश करता है।  

पहला प्रलोभन है अधिकार के लालच का प्रलोभन। संत पापा ने कहा कि यह हमेशा शैतान का एक कपटी तर्क है। वह भोजन, जीने, पूर्णता प्राप्त करने, खुश रहने जैसे स्वभाविक एवं तर्कसंगत चीजों के द्वारा शुरू करता तथा यह विश्वास करने के लिए मजबूर करता है कि ईश्वर के बिना और उसके विरूद्ध जाने पर भी सब कुछ संभव है। किन्तु येसु इसका विरोद्ध करते हुए कहते हैं, ''लिखा है-मनुष्य रोटी से ही नहीं जीता है''। (पद.4) मरूभूमि में ईस्राएलियों की लम्बी यात्रा की याद कर, येसु इस बात को स्पष्ट करते हैं कि वे अपने आपको पिता की दया पर छोड़ना चाहते हैं जो हमेशा अपने बच्चों की चिंता करते हैं।

मानवीय गौरव का रास्ता

दूसरा प्रलोभन, मानवीय गौरव के रास्ते का प्रलोभन है। शैतान कहता है, "यदि आप मेरी आराधना करें, तो यह सब आपको मिल जायेगा।'' (पद.7) यदि कोई व्यक्ति अपने आपको धन, सफलता एवं सत्ता के देवता के द्वारा भ्रष्ट हो जाने देता है तब वह अपनी मानव प्रतिष्ठा को पूरी तरह खो देता है और खोखले आनन्द में सुख की खोज करता है जो तुरन्त मुरझा जाता। यह हमें मयूर के समान बनने और अभिमान करने हेतु प्रेरित करता है किन्तु वह भी धूमिल पड़ जाता है। यही कारण है कि येसु कहते हैं, ''लिखा है-अपने प्रभु-ईश्वर की आराधना करो और केवल उसी की सेवा करो''। (पद. 8)

ईश्वर का प्रयोग करने का प्रलोभन

तीसरा प्रलोभन है – अपने फायदे के लिए ईश्वर का प्रयोग करना। शैतान धर्मग्रंथ का हवाला देता तथा ईश्वर से चमत्कार की मांग करने हेतु प्रेरित करता है। येसु इसका भी विरोध करते तथा पिता के सामने विनम्र बने रहने एवं दृढ़ भरोसा रखने का निश्चय करते हैं। ''यह भी कहा है-अपने प्रभु-ईश्वर की परीक्षा मत लो''। (पद.12) इस तरह वे जटिल प्रलोभन का विरोध करते हैं जिसमें ईश्वर से उस कृपा के लिए याचना करने का प्रलोभन है जो हमारे घमंड को संतुष्ट करने में मदद करे।

परीक्षाओं पर विजय पाने के उपाय

संत पापा ने कहा कि सफलता एवं आनन्द प्राप्त करने के भ्रम के साथ ये रास्ते हमारे लिए भी हैं, किन्तु ये वास्तव में ईश्वर के रास्ते से बिल्कु्ल भिन्न हैं। ये हमें ईश्वर से अलग करते हैं क्योंकि इसमें शैतान के कार्य हैं। येसु पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने इन परीक्षाओं में पड़कर भी पिता की योजना में दृढ़ रहे तथा उन प्रलोभनों पर तीन बार विजय पायी और हमें उपाय बतलाया कि हम आंतरिक जीवन, ईश्वर में विश्वास, उसके प्रेम की निश्चितता और ईश्वर हमसे प्रेम करते हैं, वे हमारे पिता हैं, इन बातों पर दृढ़विश्वास कर प्रलोभन पर विजय प्राप्त करेंगे।

संत पापा ने कहा "किन्तु एक रूचिकर चीज है जिसपर मैं आप सभी का ध्यान खींचना चाहूँगा। येसु परीक्षा में जवाब देते हैं किन्तु संवाद में नहीं घुसते। वे तीनों परीक्षाओं का जवाब ईश्वर के कथन अनुसार देते हैं। यह सिखलाता है कि शैतान के साथ संवाद नहीं करनी चाहिए, उसके लिए ईश्वर के वचनों के अनुसार जवाब देना चाहिए।"

ईश्वर की सांत्वनापूर्ण उपस्थिति को महसूस करें

संत पापा ने चालीसा काल का स्मरण दिलाते हुए कहा कि हम चालीसा काल का लाभ उठाते हुए हम अपने आपको शुद्ध करें तथा हमारे जीवन में ईश्वर की सांत्वनापूर्ण उपस्थिति को महसूस करें।

माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए संत पापा ने कहा कि धन्य कुँवारी मरियम जो ईश्वर के प्रति निष्ठा की आदर्श हैं, वे इस यात्रा में हमारी सहायता करें तथा बुराई का बहिष्कार करने एवं अच्छाई को स्वीकारने में हमेशा हमारी सहायता करें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

11 March 2019, 15:30