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संत मर्था प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस संत मर्था प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस 

पारिवारिक शांति और कलीसियाई एकता हेतु प्रार्थना करें, संत पापा

संत मर्था प्रार्थनालय में पवित्र मिस्सा के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने महामारी में अपने घरों में बंद परिवारों की याद कर उनके लिए प्रार्थना की, परिवारों में हिंसा न हो, परंतु शांति, धैर्य और रचनात्मकता के साथ जीवन बितायें। अपने प्रवचन में संत पापा ने याद दिलाया कि येसु कलीसिया में एकता चाहते हैं: हमें विभाजन के प्रलोभन को दूर करना चाहिए।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार 4 मई 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने पास्का के चौथे सप्ताह के सोमवार को संत मर्था प्रार्थनालय में पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान किया। पवित्र मिस्सा शुरु करने से पहले संत पापा ने परिवारों को याद करते हुए कहा, ʺआइए, आज हम परिवारों के लिए प्रार्थना करें: इस समय संगरोध में, परिवार घर पर बंद है और एक साथ समय को बिताने के लिए कई नई चीजें करने की कोशिश करता है, बच्चे अपनी कला और रचनात्मकता को सामने ला रहे हैं और दूसरी बात यह भी है, कि कभी-कभी घरेलू हिंसा भी होती है। आइए, हम इस संगरोध में रचनात्मकता और धैर्य के साथ परिवारों में शांति बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।

विभाजन के स्रोत

अपने प्रवचन में संत पापा ने प्रेरित चरित से लिये गये पहले पाठ(11: 1-18) पर टिप्पणी की, जहाँ संत पेत्रुस को गैर-यहूदियों के साथ खाने के लिए येरुसालेम में ख्रीस्तीय समुदाय द्वारा फटकार लगाई गई थी। संत पापा ने कहा कि यह कलीसिया के शुरुआती वर्षों में पाए जाने वाले कई विभाजनों में से एक उदाहरण है।

विभाजन की यह भावना हमें धर्मी और पापियों के बीच, "हम" और "उन लोगों" के बीच विभाजन की ओर ले जाती है। हम अक्सर मानते हैं कि ईश्वर के सामने हम सही हैं और कभी-कभी इसी भावना में हम दूसरों की निंदा करना शुरु कर देते हैं। वास्तव में, उस समय के धार्मिक माहौल में, न केवल पेत्रुस, बल्कि येसु की भी पापियों के साथ खाने के कारण आलोचना की गई थी।

संत पापा ने कहा कि इस गलत धार्मिक विचार धाराओं से जन्मी कलीसिया, अपने में एक बीमारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की वैचारिक स्थिति में हमारी प्रतिबद्धता पवित्र आत्मा को सुनना अधिक महत्वपूर्ण है जो हमारा मार्गदर्शन करता है। गलत धार्मिक विचार धाराओं से हमारा विभाजन भी हो सकता है।

येसु सभी के लिए मरे

संत पापा फ्राँसिस ने एक सेवानिवृत कार्डिनल का हवाला दिया जो वाटिकन में रहते हैं। उस कार्डिनल ने कहा था कि कलीसिया एक नदी की तरह है। कुछ सदस्य नदी के एक तट की तरह और दूसरे दूसरी तट की भांति हैं, लेकिन हर कोई एक ही नदी में है। संत पापा ने कहा, "कोई भी नदी के बाहर नहीं, बल्कि सब अंदर है। ईश्वर भी यही चाहते हैं।"

संत पापा ने संत योहन के सुसमाचार 10:16 पर ध्यान केंद्रित किया और येसु के शब्दों पर जोर देते हुए कहा, “मेरी अन्य भेड़ें हैं जो इस भेड़शाला की नहीं हैं। मुझे उन्हें भी ले आना है। वे मेरी आवाज सुनेंगी। तब एक ही झुंड होगा और एक ही गड़ेरिया।ʺ संत पापा ने कहा, ʺवास्तविकता यह है कि "येसु के लिए हर कोई महत्वपूर्ण है।" येसु "सभी के लिए मर गये।" येसु केवल अच्छे और न्यायी के लिए ही नहीं मरे, बल्कि उन लोगों के लिए भी, जो हमारे जीवन को कठिन बनाते हैं, बुरे लोगों के लिए भी, यहां तक कि उन लोगों के लिए भी जो उन पर विश्वास नहीं करते। "येसु सभी के लिए मर गये।"

एक ही चरवाहा

संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रवचन के अंत में सभी को एकता हेतु प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया। "हमारा एक ही चरवाहा हो । ईश्वर हमें विभाजन के मनोविज्ञान से मुक्त करे। ईश्वर इस महान वास्तविकता को देखने में मदद करें कि हम सभी येसु मसीह में भाई-बहन हैं और वे हम सभी के चरवाहे हैं।"

04 May 2020, 10:12
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