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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस 

संत पापा का मिस्सा, सार्वजनिक सेवा देने वालों के लिए प्रार्थना

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को वाटिकन के संत मर्था प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए बीमार एवं पीड़ित लोगों की याद की। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रार्थना की जो सार्वजनिक सेवा प्रदान कर रहे हैं। ख्रीस्तयाग को लाईव प्रसारित किया गया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 18 मार्च 2020 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को वाटिकन के संत मर्था प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए बीमार एवं पीड़ित लोगों की याद की। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रार्थना की जो सार्वजनिक सेवा प्रदान कर रहे हैं। ख्रीस्तयाग को लाईव प्रसारित किया गया।

संत पापा ने 15 मार्च के ख्रीस्तयाग की शुरूआत उन सभी लोगों की याद करते हुए की जो बीमार और पीड़ित हैं। उन्होंने विश्वासियों से उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया जो सार्वजनिक सेवा प्रदान कर रहे हैं, खासकर, जो दवाखाना, सुपरमार्केट, यातायात और पुलिस ऑफिसों में सेवारत हैं जिससे कि सामाजिक एवं नागरिक जीवन आगे बढ़ सके।

प्रवचन में संत पापा ने चालीसाकाल के तीसरे रविवार के सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया जो समारी स्त्री को प्रस्तुत करता है।

सच्चाई को स्वीकार करने का साहस                      

संत पापा ने समारी स्त्री का येसु के साथ मुलाकात को एक ऐतिहासिक वार्ता के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “यह दृष्टांत नहीं बल्कि सच्ची घटना है। येसु एक पापिनी स्त्री से मुलाकात करते हैं और सुसमाचार में वे पहली बार अपनी पहचान को प्रकट करते हैं। वे एक पापी के सामने अपने आपको प्रकट करते हैं जो उनके सामने अपनी सच्चाई को बतलाने का साहस करती है और उसी सच्चाई के आधार पर वह येसु की घोषणा करने जाती है।  

मुक्ति सच्चाई पर आधारित

संत पापा ने कहा कि यह ईशशास्त्रीय विवाद नहीं था कि ईश्वर की आराधना इस पर्वत पर हो अथवा उस पर्वत पर, बल्कि महिला ने येसु की सच्ची पहचान को पाया। महिला ने अपनी सच्चाई के कारण मसीह के रूप में उन्हें पहचाना जो उसे शुद्ध किया एवं न्यायसंगत ठहराया।

यही कारण है कि प्रभु उन्हें सुसमाचार की घोषणा करने के लिए चुनते हैं। संत पापा ने कहा कि व्यक्ति अपनी सच्चाई को स्वीकार किये बिना येसु का शिष्य नहीं हो सकता। ये स्त्री ने येसु के साथ वार्तालाप करने का साहस किया। चूँकि उन दोनों ने बात किया, स्त्री ने येसु द्वारा किये गये संजीवन जल के प्रस्ताव पर रूचि दिखाई, जिससे मालूम हुआ कि वह प्यासी थी। इस प्रकार उसने अपनी कमजोरी एवं पाप को स्वीकार करने का साहस किया।

 सच्चाई विश्वास की ओर ले जाती है

संत पापा ने कहा कि स्त्री के साहस ने उसे अपनी ही कहानी द्वारा येसु को नबी घोषित करने के लिए आधार प्रदान किया। “प्रभु हमेशा चीजों को छिपाये बिना, दोहरे मनोभाव रखे बिना, पारदर्शिता पूर्ण वार्तालाप चाहते हैं, चीजें जैसी हैं वैसी ही। प्रभु से हमें इसी तरह बात करना है, अपनी सच्चाईयों के साथ उनके पास आना है। पवित्र आत्मा की शक्ति से मैं सच्चाईयों को स्वीकार कर सकता हूँ कि प्रभु ही मुक्तिदाता हैं जो मुझे और सभी लोगों को बचाने आये।”

विश्वास, घोषणा करने हेतु प्रेरित करता है

संत पापा ने कहा कि येसु और समारी महिला के बीच वार्तालाप में पारदर्शिता के कारण वह घोषित कर सकती है कि येसु ही मसीह हैं और लोगों का मन-परिवर्तन हो जाता है।

संत पापा की प्रार्थना                                        

संत पापा ने अपने उपदेश के अंत में प्रार्थना की कि प्रभु हमें हमेशा सच्चाई से प्रार्थना करने की कृपा दे और अपनी, न कि दूसरों की असलियत के साथ प्रभु के पास आने की कृपा प्रदान करे।

 

 

18 March 2020, 14:53
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