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ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा  (Vatican Media)

ईश्वर हमें उसी नाप से नापेंगे जिस नाप से हम दूसरों को नापते हैं

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास में 30 जनवरी को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 जनवरी 20 (रेई)˸ हमारी जीवनशैली, लोगों के प्रति हमारा नजरिया, तभी ख्रीस्तीय हो सकता है, जब यह उदारता एवं प्रेम से प्रेरित हो और जो अपमानित होने से नहीं डरता क्योंकि हम जिस नाप से नापते हैं उसी नाप से हमारे लिए भी नापा जाएगा। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास में 30 जनवरी को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया।     

ख्रीस्तीय तरीके से मापना

संत पापा ने कहा, "तुम जिस नाप से नापते हो उसी नाप से तुम्हारे लिए भी नापा जाएगा।" हम अभी जैसा करते हैं वैसा ही हमारे साथ अंतिम दिन में होगा जिसको येसु अंतिम न्याय कहते हैं।  

उन्होंने चिंतन करने हेतु प्रेरित करते हुए कहा, "मैं दूसरों को किस तरह नापता हूँ और  अपने आपको किस तरह नापता हूँ? क्या मेरा नाप उदारतापूर्ण है? क्या ईश्वर के प्रति प्रेम से प्रेरित है? मैं जो करता हूँ उसी के अनुसार मेरे लिए भी नापा जाएगा। हमें इसपर विचार करना है। इसके लिए हमारे अच्छे कार्यों एवं बुरे कार्यों के अनुसार नहीं बल्कि हमारे जीवनशैली के अनुसार हमें मापा जाएगा।

ईश्वर का उदाहरण

संत पापा ने कहा कि हम सभी अपने आपको एवं दूसरों को जिस तरह नापते हैं उसी  तरह प्रभु हमें नापेंगे। जो दूसरों को स्वार्थी के रूप में देखता और सबसे आगे बढ़ने के लिए दूसरों पर दया नहीं दिखाता है, उसका न्याय भी बिना दया के उसी तरह किया जाएगा।

संत पापा ने ख्रीस्तीय जीवनशैली की विशेषता बतलाते हुए कहा कि यह अपमानित होने की क्षमता है, अपमान की पीड़ा को सहना है। यदि कोई ख्रीस्तीय अपमान को सहन नहीं कर सकता है तब उसके जीवन में किसी चीज की कमी है। ऐसा क्यों है? क्योंकि स्वयं ख्रीस्त ने अपने आपको अपमानित होने दिया। संत पौलुस कहते हैं, "उन्होंने अपने आपको इतना मुर्ख बनाया कि क्रूस मृत्यु को स्वीकार कर लिया। यद्यपि वे ईश्वर थे पर अपने ईश्वरत्व में आसक्त नहीं रहे और अपने आपको अत्यन्त छोटा बनाया। यही हमारा आदर्श है। 

पापी, व्यवसायी अथवा ख्रीस्तीय?

संत पापा ने दुनियावी होने और येसु के आदर्शों पर नहीं चल सकने का उदाहरण देते हुए कहा कि धर्माध्यक्ष शिकायत करते हैं जब वे पुरोहितों का स्थानांतरण पल्लियों में करने में असमर्थ होते हैं। स्थानांतरण होने पर पुरोहित नये स्थान में जाना नहीं चाहते हैं जब उन्हें लगता है कि वह पद निम्न है और वे उसे सजा मानने लगते हैं। संत पापा ने कहा कि यहीं पता चलता है कि हम चीजों को किस नजरिये से देखते हैं। व्यवहारिक तौर पर हम उसे अपमान के रूप में लेते हैं। हम अपमान को किस नजरिये से देखते हैं, दुनियावी, पापी, व्यवसायी अथवा ख्रीस्तीय?

संत पापा ने विश्वासियों को ख्रीस्तीय के समान जीने एवं क्रूस तथा अपमान से नहीं डरने की कृपा हेतु प्रार्थना करने की सलाह दी क्योंकि यही वह रास्ता है जिसको उन्होंने हमें बचाने के लिए चुना है।  

 

30 January 2020, 17:20
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