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संत मार्था प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस संत मार्था प्रार्थनालय में प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

ईश्वर का वचन विचारधारा नहीं पर यह जीवन है, संत पापा

एक ख्रीस्तीय के पास "विकृत दिल" होने का क्या मतलब है जो उसे बुजदिली, विचारधारा और समझौता करने के लिए प्रेरित कर सकता है। संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रवचन में कहा।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

रोम, गुरुवार 17 जनवरी 2019 (रेई) : "आप सावधान रहें। आप लोगों में से  किसी के मन में इतनी बुराई और अविश्वास न हो कि वह जीवन्त ईश्वर से विमुख हो जाये।" यह कड़ा "संदेश" है साथ ही एक चेतावनी भी है।" उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को वाटिकन में अपने निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र मिस्सा के दौरान प्रवचन में कही।

संत पापा ने इब्रानियों से लिए गये पहले पाठ (3.7-14) पर मनन चिंतन किया और प्रथम पाठ से तीन शब्दों को इंगित किया "कठोरता", "हठ" और "प्रलोभन"। ये तीनों शब्द हमें चेतावनी को समझने में मदद कर सकते हैं।

जीने की हिम्मत के बिना, बुजदिल ख्रीस्तीय

संत पापा ने कहा कि एक कठोर दिल, एक "बंद" दिल है, "जो विकसित नहीं होना चाहता है, यह अपनी रक्षा करने के प्रक्रिया में खुद में बंद हो जाता है।" जीवन में यह कई कारणों से हो सकता है जो हस्तक्षेप करते हैं, उदाहरण के लिए "तीव्र पीड़ा" त्वचा को कठोर बना देती हैं," संत पापा ने कहा कि एमाऊस के रास्ते में दो शिष्यों को और थोमस को भी यही हुआ था और जो इस "बुरे मनोभाव" में बना रहता है वह "बुजदिल" है और एक बुजदिल हृदय "विकृत" है।

संत पापा ने विश्वासियों को खुद की जाँच करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा, आइये हम खुद से पूछें,“ मेरे पास  क्या कठोर दिल है? क्या मेरा दिल बंद है? क्मैंया ने अपना दिल बढ़ने दिया? क्या मुझे डर है कि यह बढ़ेगा?  संत पापा ने याद दिलाया कि बच्चे गिरते हुए चलना सीखते हैं। घुटनों के बल चलने से लेकर पैरों से चलने तक कितनी बार गिरते हैं। उसी प्रकार हम भी कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना करते हुए बड़े होते हैं। जिनके पास कठिनाईयों का सामना करने की हिम्मत होती है वह कभी जीवन से हार नहीं मानता। एक बुजदिल ख्रीस्तीय के पास कठिनाईयों का सामना करने का साहस नहीं है। और इसलिए वह अपने में बंद हो जाता है। यह मवाद है।

जिद्दी विचारधारा वाला ख्रीस्तीय

दूसरा शब्द "हठ" है। संत पापा ने कहा कि इब्रानियों के पत्र में हम पढ़ते हैं “जबतक वह ‘आज’ बना रहता है, आप लोग प्रतिदिन एक दूसरे को प्रोत्साहन देते जायें जिससे कोई भी पाप के फंदे में पड़कर कठोर न बने।“ संत स्तेफन ने भी उन लोगों को यही कहा था पर उन्होंने अपनी जिद में स्तेफन को मार डाला। हठ "आध्यात्मिक जिद" है। एक जिद्दी दिल "विद्रोही" होता है। "जिद्दी" दिल अपने स्वयं के विचार में बंद है वह पवित्र आत्मा के लिए खुला नहीं है।" यह घमंडी और अभिमानी "विचारधाराओं" की रुपरेखा है।  

समझौता करने वाले ख्रीस्तीय

अंत में, संत पापा ने ‘विकृत हृदय’ को समक्षने के लिए "प्रलोभन" शब्द पर चिंतन किया। शैतान द्वारा इस्तेमाल किया गया प्रलोभन हृदय को विकृत करता है। यह प्रलोभन उसे अशिष्टता की ओर ले जाता है। वह खुद में बंद हो जाता है। और इस तरह वब प्रलोभन और शैतान का गुलाम बन जाता है। बहुधा हम जीवन से समझौता करते हैं। हम ईश्वर के नियमों को जानते हैं और पवित्र आत्मा हमें सही रास्ता लेने के लिए प्रेरित करती है पर हम जीवन के दोराहे में खड़े होकर आसान रास्ते का चुनाव करते हैं जो हमें गुलामी की ओर ले जाता है।

संत पापा ने अंत में पवित्र आत्मा का आह्वान किया ताकि वे हमें प्रबुद्ध करे। किसी के पास एक विकृत हृदय न हो, एक कठोर हृदय, जो हमें अविश्वास की ओर ले जाएगा, एक जिद्दी दिल जो हमें विद्रोह की ओर ले जाएगा।

प्रभु हमें एक शुद्ध और पवित्र हृदय प्रदान करें। 

17 January 2019, 15:45
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