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खलदेई काथलिक कलीसिया के प्रधान कार्डिनल लुईस साको खलदेई काथलिक कलीसिया के प्रधान कार्डिनल लुईस साको  (AFP or licensors)

कार्डिनल साको: बदलती दुनिया में कलीसिया का नवीनीकरण

इराक धर्मसभा पथ। प्राधिधर्माध्यक्ष कार्डिनल साको के अनुसार बदलती दुनिया में कलीसिया का नवीनीकरण करने के लिए पूर्वी कलीसियाओं के उदाहरण का अनुसरण करना है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

इराक, शनिवार,3 जुलाई 2021 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने 2023 के धर्माध्यक्षों की सामान्य धर्मसभा में धर्मसभा पद्धति को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। एक दुनिया और समाज के निरंतर विकास में कलसिया के लगातार नवीनीकरण की आवश्यकता होती है। बाबुल के प्राधिधर्माध्यक्ष कार्डिनल लुई राफेल साको ने खलदेई धर्मप्रांत की वेबसाइट पर प्रकाशित एक नोट में पुष्टि की हैं। जिसमें उन्होंने धर्मसभा प्रक्रिया पर एक चिंतन का प्रस्ताव दिया है, जो पूर्वी कलीसियाओं के अनुभव के आलोक में अगले शरद ऋतु में शुरू होगा। जैसा कि सर्वविदित है, वास्तव में, यह धर्माध्यक्षों का पहला "विकेंद्रीकृत" धर्मसभा है जिसमें 2021 और 2023 के बीच विश्वव्यापी कलीसिया सबसे पहले धर्मप्रांतीय स्तर पर, फिर महाद्वीपीय स्तर पर और रोम में 2023 के शरद ऋतु में धर्माध्यक्षीय धर्मसभा होगी।

स्थायी वैधानिक संरचना

कार्डिनल साको लिखते हैं, "कलीसिया अपनी प्रकृति से धर्मसभा है, यह संबंधों, भागीदारी और कठिनाइयों के बावजूद सहभागिता का विकास, जिम्मेदारी और दृढ़ता के साथ विभिन्न मानवीय और स्थानीय वास्तविकताओं में अवतार लेते हुए, आध्यात्मिक मूल्यों में शिक्षित करता है। यह स्थिर और क्रिस्टलीकृत नहीं रह सकता है, इसे स्वतंत्र रहना चाहिए और आत्मा की तरह चलना चाहिए जो 'जिधर चाहता, उधर बहता है, खुद को नवीनीकृत करता है और चलता है।" (योहन 3,8)  

कार्डिनल साको के अनुसार, पूर्वी कलीसियाओं का अनुभव, जिसका धर्मसभा "शुरुआती सदियों से प्रमाणित स्थायी वैधानिक संरचना है," इस अर्थ में बहुत कुछ सिखा सकता है। "धर्मसभा धर्माध्यक्षों की उनके प्राधिधर्माध्यक्ष के साथ साझा जिम्मेदारी का संकेत है"। यह "कलीसिया की केंद्रीयता को गहरा और मजबूत करता है, एक दूसरे के साथ अलग-अलग युगों के बंधनों को मजबूत करता है और प्राधिधर्माध्यक्ष एवं परमाध्यक्ष के साथ एकता में विविधता का सम्मान करता है।"

एकता का अर्थ "एकरूपता" नहीं

प्राधिधर्माध्यक्ष साको ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि धर्मसभा "विश्वव्यापी कलीसिया की यात्रा का एक विशिष्ट लक्षण है। पेत्रुस के उत्तराधिकारी के साथ, काथलिक कलीसिया द्वारा बनाई गई महान विविधता के बावजूद, कलीसिया मिलकर कार्य करती है।” इसका उद्देश्य "ख्रीस्तीय समुदाय को ज्ञान और एकता में प्रशिक्षित करना, भविष्य की पीढ़ियों पर विशेष ध्यान देना और प्रत्येक ख्रीस्तीय को अपने विश्वास को जीने की अनुमति देना"। वे चेतावनी देते हुए कहते हैं कि एकता का अर्थ "एकरूपता" नहीं है, क्योंकि कलीसिया को "दुनिया और समाज के निरंतर विकास" में "ख्रीस्तियों को पुनर्जीवित मसीह के गवाही देने के लिए खुद की नवीनीकृत करने की आवश्यकता है।

कार्डिनल साको के अनुसार, 2023 की धर्मसभा "कलीसया के जीवन और काम करने वाली ठोस परिस्थितियों से शुरू होने वाले प्रेरितिक दिशानिर्देशों, धार्मिक कार्यक्रमों और प्रशासनिक परियोजनाओं पर ठोस रूप से प्रतिबिंबित करने" का अवसर हो सकता है। यह "धर्मसभा की एक मजबूत अभिव्यक्ति है," जिससे पूर्वी कलीसिया लाभान्वित हो सकती हैं जबकि पश्चिमी कलीसिया पूर्व के लोगों के "प्राचीन और समेकित अनुभव का लाभ उठा सकती है।"

 

 

03 July 2021, 13:00