Vatican News
सेरेब्रेनिका में नरसंहार जिन्हें एक ही जगह पर दफन किया गया सेरेब्रेनिका में नरसंहार जिन्हें एक ही जगह पर दफन किया गया   (ANSA)

स्रेब्रेनिका नरसंहार: "सभ्यता की विफलता" पोप जॉन पॉल द्वितीय

25 साल पहले सेरेब्रेनिका में नरसंहार द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के बाद क्रूरता के सबसे बुरे कृत्यों में से एक था। संत पापा जॉन पॉल द्वितीय के लिए, यह एक "मानवता के खिलाफ अपराध" था जिसने यूरोप को "अपमान की खाई" में डुबो दिया था। बोस्निया के युद्ध के दौरान उनकी अपील, "हमलावर को निरस्त्र करने" के लिए हर संभव कोशिश करने की थी।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 11 जुलाई 2020 (वाटिकन न्यूज) : 11 जुलाई 1995 को, "एथनिक क्लीन्सिग" (जातीय सफाई) के नाम पर, 8,000 से अधिक बोसानियाक किशोरों और पुरुषों को राट्को म्लाडिक की कमान में बोस्नियाई सर्ब सेना द्वारा नरसंहार किया था, जिन्हें पंद्रह साल बाद गिरफ्तार किया गया और पूर्व यूगोस्लाविया में मानवता के खिलाफ नरसंहार और अपराधों के लिए अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण द्वारा 2017 के अंत में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

16 जुलाई 1995:

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय सेरेब्रेनिका के बारे में बोलते हैं। नरसंहार के पांच दिन बाद, रविवार 16 जुलाई को, जॉन पॉल द्वितीय ने देवदूत प्रार्थना के उपरांत इस बारे में बात की: “बोस्निया से आने वाले समाचार और तस्वीर, विशेष रूप से सेरेब्रेनिका और जेपा से, इस तथ्य की गवाही देते हैं कि यूरोप और मानवता भी अपमान की खाई में गहराई तक गिर गया है। कोई भी कारण, कोई भी योजना ऐसे बर्बर कार्यों और तरीकों को सही नहीं ठहरा सकती है। ये मानवता के खिलाफ अपराध हैं! मैं अपने वचन, अपने स्नेह और अपनी प्रार्थना को उन भाइयों और बहनों तक कैसे पहुँचा सकता हूँ, जो सबसे अधिक दुख में पलायन करने के लिए सड़कों पर उतरे हैं! मैं भले हृदय वाले सभी पुरुषों और महिलाओं से प्रार्थना करता हूँ कि वे उन लोगों की मदद करने के लिए निरंतर प्रयास करें। पूरी दुनिया की नज़र में जो किया जा रहा है, वह सभ्यता की हार है। ये अपराध यूरोप के इतिहास के सबसे दुखद अध्यायों में से एक होगा।”

हिंसा को समाप्त करने का आह्वान

संत पापा ने नागरिकों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने का आह्वान किया। 6 अप्रैल, 1992 को बोस्निया और हर्ज़ेगोविना की स्वतंत्रता की घोषणा के बाद हुए तीन वर्षों का युद्ध, 14 दिसंबर 1995 के डेटन समझौतों के साथ समाप्त हो गया। संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने नागरिक आबादी द्वारा अत्याचार और दुर्व्यवहार और हिंसा के अनगिनत कृत्यों को नकारने के किसी भी प्रयास को नहीं छोड़ा। इस अंधेरी अवधि में, उन्होंने "हमलावर को निरस्त्र करने" और "मानवीय हस्तक्षेप" के अधिकार के लिए अपनी अपील को और तेज कर दी थी, जबकि दुनिया ने त्रासदी को लगभग निष्क्रिय रूप से देखा और युद्ध मैदान पर संयुक्त राष्ट्र के सैनिकों की प्रभावहीनता पर ध्यान दिया।

सेरेब्रेनिका के मुस्लिम एन्क्लेव में, जनरल म्लाडिक के लोगों द्वारा निष्कासित महिलाओं और बच्चों को अलग करने के संचालन में डच नीले हेलमेट को शामिल करने की डिग्री के बारे में लंबी चर्चा हुई, जबकि किशोरों सहित आठ हजार से अधिक पुरुषों को ठंड से और शातिर तरीकों मार डाला गया था।

मानवीय हस्तक्षेप हेतु अपील

युद्ध के पहले महीनों से ही संत पापा जॉन पॉल द्वितीय चुप नहीं रहे। उन्होंने कहा, "अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए, मैं चुप नहीं रह सकता।" उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और यूरोप को साहस के साथ "मानवतावादी हस्तक्षेप" कर पूर्व यूगोस्लाविया में "हमलावरों को निरस्त्र करने" के लिए कहा। 5 दिसंबर 1992 को उन्होंने डब्ल्यूएचओ और एफएओ द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, रोम में बात की थी: "मानवता का विवेक,  उन स्थितियों में मानव विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उपायों का समर्थन देता है  जो लोगों और पूरे जातीय समूहों के लिए अनिवार्य है। यह राष्ट्रों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का कर्तव्य है।”

आक्रामकता को त्यागें

23 जनवरी 1994 को, बाल्कन में शांति के लिए प्रार्थना के दिन, देवदूत प्रार्थना के उपरांत, उन्होंने इस संघर्ष के प्रति अपनी हताशा व्यक्त की, वे संघर्ष रोकने में सक्षम नहीं थे: “पूर्व यूगोस्लाविया का क्षेत्र युद्ध शांति के किसी भी प्रयास का विरोध करता है और यह अपनी क्रूरता और मानव अधिकारों के उल्लंघनों के कारण हम सभी को परेशान करता है। हम हार नहीं मान सकते! हमें हार नहीं माननी चाहिए! यह सक्षम समुदायों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे किसी भी प्रयास को न छोड़ें जो आक्रामक रूप को अक्षम करने और न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए परिस्थितियों को बनाने के लिए मानवीय रूप से संभव हो।”

कोई नई दीवार नहीं

ख्रीस्तीय एकता वर्धक प्रार्थना के सप्ताह के दौरान, उन्होंने अपने खेद पर जोर दिया: “अभी कुछ साल पहले हम एक दीवार के गिरने से ख़ुश हुए थे जो कि दशकों से दुनिया के दो विरोधी ब्लॉक्स के विभाजन का प्रतीक है। यह एक नई दुनिया की सुबह लग रहा था। कौन संदेह कर सकता था कि, यूरोप के दिल में, अन्य दीवारें इतनी तेजी से बढ़ेंगी ? भाइयों और बहनों के बीच नफरत और खून-खराबा करा देगी?”

आप अकेले नहीं हैं

सितंबर 1994 में, संघर्ष के दौरान,संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने क्रोएशिया में ज़ाग्रेब का दौरा किया। वे सारायेवो जाना चाहते थे पर वहाँ उन्हें जाने नहीं दिया गया। संत पापा ने सारायेवो के लोगों से कहा: “आप परित्यक्त नहीं हें। हम सब आपके साथ हैं और हम हमेशा आपके साथ रहेंगे!”

उसी वर्ष उन्होंने  अपने प्रारितिक पत्र ‘तेरजो मिलेनियो अडवेन्ते’ में यूरोप को जिम्मेदारी दी: “1989 के बाद हालांकि और नए खतरे पैदा हुए। पूर्वी देशों में, साम्यवाद के पतन के बाद, अति राष्ट्रवाद का गंभीर खतरा दिखाई दिया, जैसा कि बाल्कन और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में घटनाओं से स्पष्ट है। यह यूरोपीय राष्ट्रों के विवेक की गंभीर परीक्षा करने के लिए बाध्य करता है। वे आर्थिक और राजनीतिक अपने दोनों दोषों और त्रुटियों को स्वीकार करें,  जिसके परिणामस्वरूप पिछली और वर्तमान शताब्दियों में साम्राज्यवादी नीतियों को लागू किया गया था, जिनके अधिकारों को व्यवस्थित रूप से समाप्त कर दिया गया है।"

फिर कभी नफरत नहीं

बोस्निया में युद्ध की समाप्ति के दो साल बाद, संत जॉन पॉल द्वितीय ने रक्त-रंजित, मिसाइलों द्वारा छोड़े गए छिद्रों से भरे सारायेवो शहर की मिट्टी पर अपना करम रखा। 12 अप्रैल 1997 को, जैसे ही धरती पर कदम रखा उन्होंने इन शब्दों का उच्चारण किया: “फिर कभी युद्ध नहीं! फिर कभी नफरत और असहिष्णुता नहीं!" युद्ध के घाव अभी भी खुले थे और इमारतें अभी भी "स्नाइपर एवेन्यू" के साथ टिकी हुई थीं। यहाँ इतने सारे निर्दोष नागरिकों का खून बहाया गया था, जिन्हें एक ही जगह पर दफन किया गया और घास में एक साधारण क्रॉस लगाए गए। संत पापा ने क्षमा करने की अपील करते हुए कहा, “बदला लेने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को क्षमा की शक्ति से समाप्त करना चाहिए, राष्ट्रवाद के चरम रूपों और जातीय संघर्षों को समाप्त करना चाहिए। मोज़ाइक की तरह, इस क्षेत्र के प्रत्येक हिस्से को यह आश्वस्त करने की आवश्यकता है कि उसकी अपनी राजनीतिक, राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित रहेगी।”

 क्षमा मांगना और क्षमा देना

संत जॉन पॉल द्वितीय ने कहा कि युद्ध के घाव ठीक होने में समय लगेगा। उन्होंने  सारायेवो के चार प्रतीकात्मक इमारतों- काथलिक महागिरजाघर, ऑर्थोडोक्स महागिरजाघर, मुस्लिम मस्जिद और यहूदी आराधनालय को इंगित कर कहा कि ये न केवल प्रार्थना के स्थान हैं, "यह उस तरह के नागरिक समाज का भी एक स्पष्ट संकेत है जो इस क्षेत्र के लोग निर्माण करना चाहते हैं: शांति का समाज" और उन्होंने पुष्टि की कि स्थिर शांति के लिए, "इतने रक्त और घृणा की पृष्ठभूमि के खिलाफ, इसे क्षमा के मजबूत आधार पर निर्मित करना होगा। लोगों को पता होना चाहिए कि माफी कैसे मांगनी है और कैसे माफ करना है!"

संत पापा फ्राँसिस: संवाद और क्षमा

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय की यात्रा के अठारह साल बाद, एक और शांति के तीर्थयात्री ने 6 जून 2015 को सारायेवो की धरती पर अपना कदम रखा। सेरेब्रेनिका में हुए नरसंहार के लगभग बीस साल बाद, एक ऐसे देश में, जिसने अभी तक अपनी सभी समस्याओं को नहीं सुलझाया है, जहां युद्ध गहरे निशान छोड़ दिए हैं, संत पापा फ्राँसिस ने घोषणा की कि "मुसलमानों, यहूदियों, ईसाइयों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच सौहार्दपूर्ण और भ्रातृ संबंधों" का महत्व है जो बोस्निया-हर्ज़ेगोविना की सीमाओं से परे है। "वे पूरी दुनिया को साक्षी देते हैं कि आम भलाई को देखते हुए विभिन्न जातीय समूहों और धर्मों के बीच ऐसा सहयोग संभव है।"

1995 के समझौतों के अनुसार, तीन प्रतिनिधियों (सर्बियाई, क्रोएशियाई और बोस्नियाई समुदाय) के कॉलेजियम राष्ट्रपतियों को संबोधित करते हुए,संत पापा फ्राँसिस ने सहयोग, निर्माण, संवाद के लिए "मानव समुदायों के मूलभूत मूल्यों" की मान्यता का आह्वान किया। "क्षमा करें और आगे बढ़ें। बर्बरता और कट्टरता केवल घृणा को लाता है। इसका विरोध करें।"

11 July 2020, 15:18