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केन्या :लौदातो सी केन्या :लौदातो सी  कहानी

केन्या में पृथ्वी एवं गरीबों की पुकार सुनें

कपुचिन धर्मबंधु, बेनेडिक्ट अयोती अफ्रीका में वैश्विक काथलिक जलवायु आंदोलन के प्रमुख हैं। उन्होंने वनीकरण को बढ़ावा देने एवं अपने देश तथा पूरे महादेश में समग्र पारिस्थितिकी के प्रति जागृति लाने हेतु अपने प्रयास के बारे वाटिकन न्यूज को बतलाया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

महामारी से पहले विश्व में करीब 700 मिलियन से अधिक लोग अत्याधिक गरीबी में जी रहे थे। यूएन द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार यह संख्या 2021 के अंत तक 900 मिलियन पहुँच जायेगी। अर्थशास्त्री एवं यूएन के अत्याधिक गरीबी और मानव अधिकार दूत के अनुसार, केवल अफ्रीका में इसकी संख्या 25 मिलियन होगी।

खासकर, इसलिए क्योंकि अफ्रीका में अत्याधिक गरीबी की बड़ी समस्या है। हम गरीबों की पुकार पर बात किये बिना पृथ्वी की पुकार के बारे बात नहीं कर सकते। संत पापा फ्राँसिस का प्रेरितिक पत्र लौदातो सी हमें गरीबों की देखभाल करने का आग्रह करता है और यहाँ अफ्रीका में इसका अर्थ है उन लोगों पर ध्यान देना जो झोपड़ियों में रहते हैं क्योंकि पर्यावरण की देखभाल करते हुए हम लोगों को भूल नहीं सकते।  

केन्या के नाईरोबी से फादर बेनेडिक्ट आयोदी एक कपुचिन फ्रायर एवं अफ्रीका में वैश्विक काथलिक जलवायु आंदोलन (जीसीसीएम) के प्रमुख ने संत पापा फ्राँसिस के 2015 में प्रकाशित प्रेरितिक विश्व पत्र पर चिंतन किया एवं महादेश में पर्यावर्णीय परिवर्तन के लिए लिये गये कदमों पर प्रकाश डाला।  

केन्या में वर्षा वन

वैश्विक काथलिक जलवायु आंदोलन में वनीकरण परियोजना सबसे प्रमुख है केन्या के ककामेगा वन के समान, जो कांगो बेसिन के जंगल का हिस्सा था, लेकिन अब पूर्वी अफ्रीका का एकमात्र वर्षावन बन गया है। यह विक्टोरिया झील के निकट करीब 200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है जो एक घनी आबादी वाला गाँव है। "इस उजाड़ एवं जंगलहीन क्षेत्र में जो हरा फेफड़ा बन गया है। हमने यहाँ करीब 3 हजार स्थानीय पेड़ लगाये हैं। यह लौदातो सी संचालक कार्यक्रम एवं स्थानीय समुदाय, पल्लीवासियों, कारितास, एंगलिकन कलीसिया के सहयोग साथ ही साथ अन्य संस्थाओं के संयुक्त पहल का परिणाम है जिसमें हमने 50 हजार पेड़ लगाये हैं।" फादर बेनेडिक्ट ने कहा कि यह एक परियोजना है जो अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 2021 एवं 22 अप्रैल को मनाये जाने वाले पृथ्वी दिवस से भी जुड़ी है।  

फादर आयोदी जो ककामेगा से हैं एवं वर्षावन के बारे अच्छी तरह जानते हैं। उनका कहना है कि "यह अमाजोन के समान है, यह इस क्षेत्र के लिए और सामान्य तौर पर अफ्रीका में जैव विविधता को विनियमित करने और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को दूर करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”

यूगांडा एवं तंजानिया की कलीसिया में एक सेवा

फादर आयोदी ने कहा कि अफ्रीका उन महादेशों में से एक है जो जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।

ककामेगा के वन में पेड़ लगाती धर्मबहन
ककामेगा के वन में पेड़ लगाती धर्मबहन

जीसीसीएम उन परिस्थितियों की निगरानी कर रहा है जो अफ्रीकी लोगों के अस्तित्व को खतरे में डालते हैं, जैसे कि विक्टोरिया झील के स्तर में वृद्धि, अकाल और टिड्डी आक्रमण जो हाल में पूर्वी अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों में फैल गया है। यही कारण है कि पिछले सालों से यह जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए एक नये जागृति आंदोलन को बढ़ावा दे रहा है। हमारा ध्यान "पूर्वी अफ्रीकी कच्चे तेल और गैस पाइपलाइन" पर भी केंद्रित है, एक तेल पाइपलाइन जो युगांडा को तंजानिया से जोड़ेगी। उन्होंने कहा, "यह एक बड़ी योजना है जिसको यूगांडा एवं तंजानिया के तेल एवं गैस योजना के अधिकारियों का समर्थन प्राप्त है। इसका काम शुरू हो चुका है।" विश्व काथलिक जलवायु आंदोलन के रूप में हमने इस परियोजना द्वारा जलवायु के परिणामों को समझाने, जो कार्बन उत्सर्जन को बढ़ाता है यूगांडा एवं तंजानिया में लोगों के बीच जागृति लाने हेतु मदद करने के लिए एक परामर्श सेवा स्थापित की है। इसके अतिरिक्त, पाइप लाइन से तेल फैलने की संभावना अधिक होती है क्योंकि पाइपलाइन का एक बड़ा हिस्सा विक्टोरिया झील के जलक्षेत्र से होकर गुजरता है, जो एक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है। खतरनाक अपशिष्ट जमा होने का भी खतरा है, जिसका निपटारा किया जाना चाहिए: पाइपलाइन को नियमित रूप से साफ करने की आवश्यकता होगी, और डीजलयुक्त खतरनाक अपशिष्ट उस सफाई से उत्पन्न होगा।" इस परियोजना के लिए कपुचिन फ्रायर ने बतलाया कि यूगांडा एवं तंजानिया में लोगों से जमीन ली गई है। अतः यह सबसे पहले अन्याय का सवाल है। उन्होंने बतलाया कि जमीन की उचित कीमत नहीं दी गई है, भारी संख्या में लोगों के विस्थापित होने की संभावना है और जलवायु परिवर्तन के दृष्टिकोण से, झील क्षेत्र में कई प्राकृतिक संसाधनों के नष्ट होने का खतरा है।   

लौदातो सी

फादर आयोदी को यकीन है कि पर्यावर्णीय परिवर्तन स्थानीय गतिविधियों से होकर पार होता है। "हमने केन्या, तंजानिया, यूगांडा और अन्य अफ्रीकी देशों में छोटे दलों को पल्ली स्तर पर जीवन दिया है ˸ हर दल में लौदातो सी का एक संचालक है। संत पापा फ्राँसिस के लौदातो सी विश्व पत्र पर बातचीत करने के लिए हर माह दो सभाएँ की जाती हैं।" उन्होंने पार्क तथा शहर के अन्य क्षेत्रों को साफ रखने का भी अभियान जारी किया है और पल्ली में जिम्मेदारीपूर्ण उपभोग को बढ़ावा दिया है। हमने लौदातो सी को प्रोत्साहन देने के लिए पुरोहितों एवं धर्मसमाजियों की मदद करना शुरू किया है उदाहरण के लिए, रविवार को उपदेश के समय।  

गरीबों की पुकार

कपुचिन फादर ने आगे कहा कि कारितास या जेस्विट्स अथवा कपुचिनों के सहयोग से हम किबेरा या नाईरोबी की झोपड़ियों की सड़कों पर घूमते बच्चों के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने संत पापा के विश्व पत्र में जिक्र विदेशी ऋण के मामले की याद की तथा गौर किया कि किस तरह उनके साझेदार हर दिन भूखे लोगों को खाना खिलाते हैं वे कुटीर उद्योंगों द्वारा महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं।   

गरीबों की मदद करते कपुचिन फ्रायर
गरीबों की मदद करते कपुचिन फ्रायर

फादर अयोदी ने अंत में बतलाया कि उनका पूरा समुदाय नाईरोबी में संलग्न है जहां उन्होंने कार्बन उत्सर्जन पर अंकुश लगाने के लिए कार का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया है और एक लौदातो सी सब्जी बगान लगाया है ताकि आयात किये गये सब्जी को खरीदने से बचा जा सके। उनके अन्य प्रयास हैं, सूप किचन, भोजन कार्ड का वितरण और कोविड-19 शैक्षणिक एवं सूचनात्मक परियोजना के लिए कैपुचिन टेलीविजन द्वारा प्रसारण जो काथलिकों के लिए केन्या में पहला टेलीविजन है"।

नायरोबी में लोगों की मदद
नायरोबी में लोगों की मदद
20 April 2021, 16:07