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यूरोप के काथलिक धर्माध्यक्षों की ऑनलाईन सभा, तस्वीरः नवम्बर 2020 यूरोप के काथलिक धर्माध्यक्षों की ऑनलाईन सभा, तस्वीरः नवम्बर 2020 

यूरोपीय काथलिक धर्माध्यक्ष, पोलिश गर्भपात कानून की निन्दा

यूरोप के काथलिक धर्माध्यक्षों ने पोलैण्ड के गर्भपात कानून पर यूरोपीय संसद के प्रस्ताव का खण्डन किया है। 25 फरवरी को जारी एक पत्र में, काथलिक धर्माध्यक्षों ने कहा कि 26 नवंबर, 2020 को पारित प्रस्ताव का "बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा"।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 26 फरवरी 2021 (सी.एन.आ.): यूरोप के काथलिक धर्माध्यक्षों ने पोलैण्ड के गर्भपात कानून पर यूरोपीय संसद के प्रस्ताव का खण्डन किया है। 25 फरवरी को जारी एक पत्र में, काथलिक धर्माध्यक्षों ने कहा कि 26 नवंबर, 2020 को पारित प्रस्ताव का "बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा"।

पोलिश गर्भपात कानून

पोलैंड की शीर्ष अदालत के उस फैसले के बाद कि भ्रूण की असामान्यताओं के लिए गर्भपात की अनुमति देने वाला 1993 का कानून असंवैधानिक था, यूरोपीय संसद निकाय ने प्रस्ताव को 145 के मुकाबले 455 वोटों से पारित कर दिया।

22 अक्टूबर 2020 के संवैधानिक न्यायाधिकरण के फैसले से पहले, पोलिश कानून केवल बलात्कार या माँ के जीवन के लिए जोखिम, या फिर भ्रूण असामान्यता के मामलों में गर्भपात की अनुमति प्रदान करता था।

धर्माध्यक्षों का पत्र

यूरोपीय संसद अध्यक्ष दाविद सासोली को प्रेषित तथा यूरोपीय काथलिक धर्माध्यक्षों के सम्मेलन की कार्यकारी समिति के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित 22 फरवरी के पत्र में धर्माध्यक्षों ने कहा, "कानूनी दृष्टिकोण से हम यह रेखांकित करना चाहते हैं कि न तो यूरोपीय संघीय कानून और न ही मानवाधिकार सम्बन्धी यूरोपीय सम्मेलन गर्भपात का अधिकार प्रदान कर सकते हैं। “एक कानूनी दृष्टिकोण से हम यह रेखांकित करना चाहते हैं कि न तो यूरोपीय संघ कानून और न ही मानवाधिकार पर यूरोपीय सम्मेलन गर्भपात के अधिकार के लिए प्रदान करते हैं। यह मामला सदस्य राज्यों की कानूनी प्रणालियों पर निर्भर होता है।"

पोलैण्ड के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष स्तानिसलाव गादेस्की द्वारा उक्त प्रस्ताव की आलोचना के बाद यूरोप के काथलिक धर्माध्यक्षों ने यूरोपीय संसद अध्यक्ष को पत्र भेजा था। महाधर्माध्यक्ष गादेस्की ने अपने वकतव्य में कहा था कि जीवन के अधिकार पर किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिये।

जीवन का अधिकार

उनका कहना था कि "जीवन का अधिकार एक मौलिक मानव अधिकार है और यह सदैव चुनने के अधिकार से पहले आता है, इसलिये कि कोई भी व्यक्ति, आधिकारिक रूप से, दूसरे को मारने की संभावना को अनुमति नहीं दे सकता है।"

यूरोपीय धर्माध्यक्षों ने अपने पत्र में इस तथ्य को रेखांकित किया कि काथलिक कलीसिया प्रजनन एवं गर्भ सम्बन्धी कठिनाइयों का सामना करनेवाली महिलाओं को समर्थन देती है तथा अजन्में शिशुओं की रक्षा को कृतसंकल्प है।  

26 February 2021, 11:36