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 पाकिस्तान के लाहौर में रूढ़िवादी मुसलिम दलों का प्रदर्शन, 21.11.2020 पाकिस्तान के लाहौर में रूढ़िवादी मुसलिम दलों का प्रदर्शन, 21.11.2020  (AFP or licensors)

बलात धर्मान्तरण और विवाह की जाँच का ख्रीस्तीयों ने किया स्वागत

पाकिस्तान के ख्रीस्तीयों ने देश के अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के बलात धर्मान्तरण और विवाह की जाँचपड़ताल का स्वागत किया है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

इस्लामाबाद, शुक्रवार, 4 दिसम्बर 2020 (सी.एन.आ.): पाकिस्तान के ख्रीस्तीयों ने देश के अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के बलात धर्मान्तरण और विवाह की जाँचपड़ताल का स्वागत किया है।

पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने देश के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं और लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन की जांच का आदेश दिया है, जिसका ईसाई सहायता समूहों ने स्वागत किया है।

नाबालिगों का यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी  

पाकिस्तान में उत्पीड़ित ख्रीस्तीयों की सहायता में संलग्न "अन्तरराष्ट्रीय ख्रीस्तीय उत्कंठा" नामक मानवाधिकार संगठन ने 03 दिसम्बर को कहा कि बलात धर्मान्तरण एवं विवाह की शिकार बनी कई लड़कियाँ नाबालिग हैं। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न एवं धोखाधड़ी का उपयोग कर किशोरियों को फँसाया जाता है, और प्रायः अधिकारी भी इन अपराधों में शामिल रहा करते हैं।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के धार्मिक सद्भाव सम्बन्धी विशेष प्रतिनिधि ताहिर महमूद अशरफ़ी ने 30 नवंबर को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि प्रधान मंत्री खान ने अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से ईसाई और हिन्दूधर्मों से सम्बन्धित, नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण की घटनाओं के मामले पर जाँच का आदेश दिया था।

पाकिस्तान के "अन्तरराष्ट्रीय ख्रीस्तीय उत्कंठा" नामक संगठन ने 2014 में पाकिस्तान के एकात्मता एवं शांति अभियान द्वारा किये अध्ययन का हवाला देकर कहा कि प्रति वर्ष पाकिस्तान में अनुमानतः 1000 ख्रीस्तीय एवं हिन्दू लड़कियों का अपहरण किया जाता है तथा उन्हें जबरन मुसलमान बनाकर मुसलमान लड़कों से उनका बलात विवाह कर दिया जाता है। 

इस वर्ष 13 अक्टूबर को कराची के एक 44 वर्षीय आरज़ू रजा द्वारा एक 13 वर्षीय काथलिक बालिका के अपहरण सामने आया है जिसका बलात धर्मान्तरण कर शादी कर दी गई थी। लगभग दो सप्ताहों बाद ही बालिका को मुक्त कराया जा सका तथा रज़ा पर बलात्कार का आरोप लगाया गया।

पाकिस्तान में बाल विवाह अवैध है तथापि, कई लोग शरिया कानून का हवाला देकर मासिक धर्म शुरु होने पर ही किशोरियों को विवाह के लायक मान लेते हैं। इस्लाम, पाकिस्तान का राजकीय धर्म है, जिसकी 97 प्रतिशत जनता इस्लाम धर्मानुयायी है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग     

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के धार्मिक सद्भाव पर विशेष प्रतिनिधि ताहिर महमूद अशरफ़ी ने 30 नवंबर को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि काहन ने अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण की घटनाओं के मामले के आधार पर जांच का आदेश दिया था।

2019 में काथलिक एवं अन्य सम्प्रदायों के ख्रीस्तीय नेताओं ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर पाकिस्तान सरकार से मांग की थी कि वह देश के अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिये विशिष्ट कदम उठाये।

इसी बीच, पाकिस्तान के काथलिक मानवाधिकार संगठन "द सेन्टर फॉर सोशल जस्टिस" ने घोषणा की है कि 08 दिसम्बर को सरकार के समक्ष एक नवीन प्रस्ताव प्रस्तुत करने की योजना है। इसमें बलात धर्मान्तरणों एवं जबरन विवाहों को रोकने की मांग की गई है।  

04 December 2020, 11:57