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जापान में परमाणु बम गिराये जाने की 75वीं सालगिराह जापान में परमाणु बम गिराये जाने की 75वीं सालगिराह  (AFP or licensors)

परमाणु हथियारों के अंत हेतु जापान राष्ट्रों के बीच सेतु बनेगा

हिरोशिमा के परमाणु बमबारी से बचे लोगों ने हमले के 75 साल बाद, एक स्मरणोत्सव के साथ पीड़ितों को याद किया, जबकि काथलिक धर्माध्यक्षों ने वैश्विक शांति के लिए बढ़ते खतरों के खिलाफ चेतावनी दी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

जापान, शुक्रवार, 7 अगस्त 2020 (वीएन) -परमाणु बम से मौत के शिकार लोगों की याद में, बम बरसाये गये स्थान के निकट स्थित पार्क पर, उनके हजारों रिश्तेदार एवं पीड़ित लोग एकत्रित हुए। बम गिराये जाने के समय की याद दिलाते हुए जब घंटी बजायी गई तब लोग प्रार्थना के लिए खड़े हो गये।

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने शोकित लोगों से कहा कि जापान परमाणु हथियार के अंत हेतु राष्ट्रों के बीच सेतु बनकर काम करेगा।

हिरोशिमा के महापौर काजूमी मातसुई ने कहा, "शहर में युद्ध के बाद जो सुधार हुए उसके द्वारा शहर शांति का प्रतीक बन गया है। महापौर ने नागरिक समाज से अपील की है कि वह राष्ट्रवाद का बहिष्कार करे एवं हर प्रकार के भय खिलाफ एकजुट हो।"  

6 अगस्त को परमाणु बम गिराये जाने से करीब 1,40,000 लोगों की मौत हो गयी थी। हिरोशिमा को नष्ट करने के तीन दिन बाद नागासाकी में दूसरा बम गिराया गया था।

परमाणु हथियार निरस्त्रीकरण का आह्वान

सप्ताह के शुरू में नागासाकी के महापौर ने कहा था कि यद्यपि राष्ट्र परमाणु निरस्त्रीकरण पर गर्म और ठंडा होता रहता है, हिरोशिमा और नागासाकी के लोग हमेशा आवाज उठाते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि ये छोटी आवाजें परमाणु हथियारों की अमानवीय जगत की याद दिलाती हैं।

इस बीच हिरोशिमा के महापौर ने पिछले साल हिरोशिमा में शोकित लोगों के प्रति संत पापा फ्राँसिस के प्रोत्साहन की याद की।

प्रेरितिक यात्रा के दौरान संत पापा ने कहा था कि परमाणु हथियार रखना अनैतिक है। भावी पीढ़ी हमारा न्याय करेगी यदि हम शांति की बात तो करते लेकिन निरस्त्रीकरण की दिशा में कोई कार्य नहीं करते हैं। उन्होंने कहा था कि परमाणु हथियार रखना, झूठी सुरक्षा की भावना लाता है जिसमें डर और अविश्वास होता है।  

शांति के लिए खतरा पर धर्माध्यक्षों की चेतावनी

जापान की काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने पिछला सप्ताह द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के 75 वें साल की याद में एक संदेश जारी किया।

धर्माध्यक्षों ने वैश्विक शांति पर नये खतरे की चेतावनी दी है जिसमें पूर्वी एशिया में अस्थिरता और वैश्विक पर्यावरण संकट के रूप में नया शीत युद्ध शामिल है।

धर्माध्यक्षों ने परमाणु हथियार मुक्ति के लिए आग्रह की है। पिछले साल उन्होंने जापान की सरकार से परमाणु हथियारों के निषेध पर संयुक्त राष्ट्र संधि पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया था।

80 से अधिक देशों ने संधि पर हस्ताक्षर किया था किन्तु जापान इसमें शामिल नहीं था। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के परमाणु संरक्षण पर निर्भर करता है।

07 August 2020, 16:58