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पीने के लिए नदी का पानी लेती हुए  अगरतल्ला की महिलायें पीने के लिए नदी का पानी लेती हुए अगरतल्ला की महिलायें  (AFP or licensors)

सभी के लिए जल व स्वच्छता त्वरित कार्रवाई का नया फ़्रेमवर्क

संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को ध्यान में रखते हुए 2030 तक हर जगह साफ पानी और स्वच्छता के लिए लोगों को सक्षम बनाने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए एक नई पहल शुरू की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

जिनेवा, शनिवार 11 जुलाई 2020 (वाटिकन न्यूज) : वर्ष 2030 तक सभी के लिये जल और साफ़-सफ़ाई की सुलभता सुनिश्चित कराने के इरादे से गुरुवार 9 जुलाई को एक नई व्यवस्था शुरू की गई है. 'एसडीजी -6 के लिए ग्लोबल एक्सीलरेशन फ्रेमवर्क' नामक इस प्रणाली का उद्देश्य टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेण्डा को हासिल करने के प्रयासों में तेज़ी लाना है और इसे 30 से ज़्यादा यूएन संस्थाओं और 40 अन्तरराष्ट्रीय संगठनों ने विकसित किया है।

पानी - एसडीजी प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण

टिकाऊ विकास एजेण्डा के छठे लक्ष्य में सभी के लिये जल और साफ़-सफ़ाई की उपलब्धता व टिकाऊ प्रबन्धन का महत्वाकाँक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह एक ऐसा लक्ष्य है जिससे अनेक यूएन एजेंसियों का कामकाज जुड़ा हुआ है। 

यूएन प्रमुख अंतोनियो गुटेरेस ने वर्चुअल कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा, “वर्ष 2030 तक टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के प्रयासों के तहत कार्रवाई के दशक के लिए संगठित होने की मेरी पुकार के जवाब में ग्लोबल एक्सीलरेशन फ़्रेमवर्क को शुरू होते देखकर मैं गौरवान्वित हूँ।”

यूएन प्रमुख ने कहा कि लगभग अन्य सभी 16 टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पाने में जल की अहम भूमिका है। यह जलवायु परिवर्तन के प्रति सुदृढ़ता क़ायम करने में ज़रूरी है और शान्ति, सुरक्षा, मानवाधिकार व विकास के लिए यूएन प्रयासों की बुनियाद को मज़बूती देता है।

लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर जल की आपूर्ति मौजूदा समय में दोहरे ख़तरों का सामना कर रही है – बढ़ती माँग व दोहन, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और अन्य कारणों से जल स्रोतों का क्षरण। ऐसे में टिकाऊ विकास के छठे लक्ष्य की दिशा में प्रगति रुक गई है।

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि दुनिया में दो अरब से ज़्यादा लोगों के लिये पीने का सुरक्षित जल उपलब्ध नहीं है और चार अरब से ज़्यादा लोग साफ़-सफ़ाई के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं। महासचिव ने सचेत किया, “जैसे-जैसे जलवायु का बदलना जारी रहेगा, एसडीजी-6 पर प्रगति के रास्ते में चुनौतियाँ गहराती जाएँगी।”

“जल और साफ़-सफ़ाई कोविड-19 से लड़ाई में भी अहम हैं। साबुन से हाथ धोना कोविड-19 और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलाव को सीमित करने के असरदार तरीक़ों में से एक है।”

संसाधनों का बेहतर प्रबन्धन

वैश्विक महामारी के कारण दुनिया को एक ख़तरनाक मन्दी से जूझना पड़ रहा है। यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि इन हालात में संसाधनों के दक्षतापूर्ण इस्तेमाल के लिए वैश्विक स्तर पर बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बाँडे ने भी बैठक को सम्बोधित किया और शान्ति बनाए रखने में जल सुरक्षा की अहमियत को रेखांकित किया – ना सिर्फ़ स्थानीय स्तर पर बल्कि देशों के बीच भी। “ताज़े पानी का कुल 60 फ़ीसदी 250 जल बेसिनों से होता हुआ बहता है जो 148 देशों में बँटे हुए हैं।”

“अंशों मे वितरण होने के कारण बहुपक्षीय सहयोग के ज़रिये ही हम वैश्विक जल संसाधन का दक्षतापूर्ण प्रबन्धन कर सकते हैं। सभी के लिए वर्ष 2030 तक सुरक्षित और किफ़ायती पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य तब तक दूर रहेगा जब तक जल सम्बन्धी हमारी नीतियों व कार्रवाई में समरसता और एकरूपता नहीं होगी।”

‘ग्लोबल एक्सीलरेशन फ़्रेमवर्क’ के तहत यूएन संस्थाएँ आपसी सहयोग को मज़बूत बनाने का संकल्प लेंगी और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा देशों को दिये जाने वाले समर्थन को एकीकृत करेंगी। इसके तहत देशों को विशेषज्ञता और तकनीकी मदद मुहैया कराई जाएगी। 

साथ ही यूएन संस्थाओं ने एसडीजी-6 को हासिल करने के लिए बेहतर ढँग से प्रयास करने का संकल्प लिया है।

11 July 2020, 15:05