Vatican News
हागिया सोफिया में नमाज पढ़ते हुए मुस्लिम हागिया सोफिया में नमाज पढ़ते हुए मुस्लिम  (REUTERS)

86 वर्षों में हागिया सोफिया में आयोजित पहली इस्लामी प्रार्थना

इस्तांबुल की हागिया सोफिया बसिलिका में 86 वर्षों बाद पहली बार शुक्रवार को इस्लामिक प्रार्थना की गई। संत पापा फ्राँसिस ने 12 जुलाई को कहा कि वे "बहुत दुखी" थे।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

इस्तांबुल,शनिवार 25 जुलाई 2020 (वाटिकन न्यूज) :  तुर्की के इस्तांबुल में ऐतिहासिक हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने के बाद वहाँ पहली बार शुक्रवार को नमाज़ अदा की गई। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने कई सौ विशेष मेहमानों के साथ शुक्रवार की प्रार्थना में भाग लिया। 20,000 से अधिक पुलिसकर्मियों ने इस क्षेत्र में गश्त की।

राष्ट्रपति एर्दोगान ने 11 जुलाई को एक फरमान जारी किया जिसमें 24 जुलाई को ऐतिहासिक हगिया सोफिया को मुस्लिम प्रार्थनाओं के लिए खोलने का आदेश दिया गया। उनके आदेश ने तुर्की की शीर्ष प्रशासनिक अदालत के एक फैसले का पालन किया जिसने हागिया सोफिया की स्थिति को संग्रहालय के रूप में बदल दिया।

धार्मिक और राजनीतिक नेताओं द्वारा आलोचना

इस परिवर्तन को लेकर धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम उपासना के लिए रूपांतरण धार्मिक विभाजन का कारण बनता है।

12 जुलाई को देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा फ्राँसिस ने तुर्की के इस क़दम पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि वे सांता सोफ़िया के बारे में सोचते हैं और उन्हें इससे काफ़ी पीड़ा हुई है।

तुर्की का हागिया सोफ़िया दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक रहा है। इसे छठी सदी में बाइज़ेंटाइन सम्राट जस्टिनियन के हुक्म से बनाया गया था। बाइज़ेन्टीन दौर के इस महागिरजाघर के दीवारों पर येसु और कुवांरी मरियम की तस्वीरों के लिए भी जाना जाता है। इस्तांबुल में बने ग्रीक शैली के इस महागिरजाघर को स्थापत्य कला का अनूठा नमूना माना जाता है जिसने दुनिया भर में बड़ी इमारतों के डिज़ाइन पर अपनी छाप छोड़ी है।

इसे 1453 में मस्जिद में बदल दिया गया था। जब उस्मानिया सल्तनत ने क़ुस्तुनतुनिया (जिसे बाद में इस्तांबुल का नाम दिया गया) शहर पर क़ब्ज़ा किया तो इस महागिरजाघर को मस्जिद बना दिया गया था।

यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल

पहले विश्व युद्ध में तुर्की की हार और फिर वहां उस्मानिया सल्तनत के ख़ात्मे के बाद मुस्तफ़ा कमाल पाशा का शासन आया। उन्हीं के शासन में 1934 में इस मस्जिद (मूल रूप से हागिया सोफ़िया महागिरजाघर) को म्यूज़ियम बनाने का फ़ैसला किया गया। तब से यह संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक मामलों की संस्था यूनेस्को के विश्व धरोहरों की सूची में आता है।

आधुनिक काल में तुर्की के इस्लामवादी राजनीतिक दल इसे मस्जिद बनाने की माँग लंबे समय से करते रहे हैं जबकि धर्मनिरपेक्ष पार्टियाँ पुराने चर्च को मस्जिद बनाने का विरोध करती रही हैं। इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ भी आई हैं जो धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष आधार पर बँटी हुई हैं। लेकिन राष्ट्रपति अर्दोआन ने इस क़दम का बचाव किया है। उनका कहना है कि तुर्की ने अपनी संप्रभु शक्तियों का इस्तेमाल किया है।

25 July 2020, 13:58