Vatican News
मुम्बई की धारावी झुग्गी झोपड़ी में बच्चों का जीवन  मुम्बई की धारावी झुग्गी झोपड़ी में बच्चों का जीवन   (AFP or licensors)

महामारी से दक्षिण एशिया के 60 करोड़ बच्चों का भविष्य ख़तरे में

संयुक्त राष्ट्र संघीय बाल निधि, यूनीसेफ, द्वारा मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट में सचेत किया गया कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो दक्षिण एशिया में लगभग 60 करोड़ से अधिक बच्चे, आनेवालों माहों में, जीवन की संभावनाओं को कम होते देखेंगे।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

यूनीसेफ, शुक्रवार, 26 जून 2020 (वाटिकन न्यूज़): संयुक्त राष्ट्र संघीय बाल निधि, यूनीसेफ, द्वारा मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट में सचेत किया गया कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो दक्षिण एशिया में लगभग 60 करोड़ से अधिक बच्चे, आनेवालों माहों में, जीवन की संभावनाओं को कम होते देखेंगे। यूनीसेफ ने कहा कि कोरोनवायरस वायरस महामारी दक्षिण एशिया के बच्चों के लिए किये गये "स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य प्रयासों को निरस्त कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, कोविद-19 महामारी ने "टीकाकरण, पोषण और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से बाधित किया गया है।

परिवारों पर प्रभाव

वाटिकन रेडियो से बातचीत में रिपोर्ट के लेखक सायमन इंग्राम ने कहा कि कोविद-19 महामारी का सर्वाधिक प्रभाव परिवारों पर पड़ा है जो अपनी आर्थिक क्षमता खो बैठे हैं। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि महामारी के प्रसार के कुछ ही दिन बाद परिवार अपने आप के भरण-पोषण में असमर्थ हो गये थे तथा अनेकानेक मामलों में अपनी सन्तानों की चिकित्सीय देखभाल नहीं कर पाये थे।  

उन्होंने कहा कि स्थिति की वास्तविकता अब इस गम्भीर जोखिम से स्पष्ट हो रही है कि "आने वाले महीनों में लगभग 12 करोड़ से अधिक बच्चे निर्धनता की रेखा के नीचे आ जायेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य असुरक्षा बढ़ रही है तथा, खासतौर पर, बांग्लादेश जैसे देशों में, कुछ ऐसे परिवार हैं जिन्हें दिन में एक बार भी भोजन उपलब्ध नहीं है। अफ़गानिस्तान में जारी युद्ध के कारण कुपोषण की समस्या पहले से ही बनी हुई है। पर्यटन पर टिके मालदीव जैसे देश भी परिवार संकट के दौर से गुज़र रहे हैं।   

शिक्षा

बच्चों की शिक्षा पर चिन्ता ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि विगत माहों में इन्टरनेट के जरिये शिक्षा मुहैया कराई गई किन्तु दक्षिण एशिया में कई गाँव ऐसे हैं जहाँ इन्टरनेट तो दूर बिजली की आपूर्ति भी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि हालांकि, महामारी की शुरुआत के समय स्कूलों को बन्द करना आवश्यक हो गया था तथापि, अब भी स्कूलों को बन्द रखने का कोई औचित्य नहीं है।  

दुर्व्यवहार

बच्चों के विरुद्ध दुर्व्यवहार और हिंसा पर भी यूनासेफ की रिपोर्ट में चिन्ता व्यक्त की गई। श्री इन्ग्रम ने बताया कि लॉक डाऊन के दौरान घरों में बन्द बच्चों के विरुद्ध हिंसा एवं दुर्व्यवहार की कई ख़बरें मिली हैं तथा स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं एवं समाजसेवियों की अनुपस्थिति में इस मामलों का जायज़ा लेना अत्यन्त मुश्किल हो रहा है।

गरीब परिवारों पर महामारी प्रभाव को कम करने के लिए, रिपोर्ट में कहा गया है, "सरकारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की दिशा में और अधिक संसाधनों को निर्देशित करना चाहिए, जिसमें आपातकालीन सार्वभौमिक बाल लाभ और स्कूलों में भोजन व्यवस्था कार्यक्रम शामिल हैं।"  

26 June 2020, 11:07