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तिराने में पवित्र मिस्सा चढ़ाते हुए नव नियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष अर्जन डोडाज तिराने में पवित्र मिस्सा चढ़ाते हुए नव नियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष अर्जन डोडाज 

एक युवा प्रवासी, नास्तिक के रूप में शिक्षित, अब धर्माध्यक्ष

एक युवक 1993 में नाव से इटली पहुंचा, एक वेल्डर बना। उस विश्वास की खोज की जिसे उनकी नानी ने गाना के माध्यम से दिया था और वह एक पुरोहित बना। तीन साल पहले वो अल्बानिया लौटा और संत पापा ने उसे तिराने का सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 8 मई 2020 (वाटिकन न्यूज) : वाटिकन न्यूज के मुख्य संपादक अंद्रेया तोर्नेल्ली लिखते हैं, ʺमैं अभी भी तिराने से फोन द्वारा बातें करते हुए नव नियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष की आवाज से पता लगा सकता हूँ कि उसपर क्या बीती, जब उन्हें नियुक्ति की घोषणा मिली। उनकी कई छोटी, लेकिन महान कहानियों में से एक है, जिनसे कलीसिया का दैनिक जीवन आपस में जुड़ा हुआ है।

43 वर्षीय अर्जन डोडाज का जन्म अल्बानिया के तट पर लाक-कुर्बिन में एक गरीब परिवार में हुआ था। 16 साल की उम्र में, वे अपने भविष्य की तलाश और अपने परिवार की मदद करने हेतु सितंबर 1993 में एक गर्म और तारों से भरी रात में अपने देश से भाग गये। वे नाव द्वारा एड्रियाटिक सागर को पार करने के बाद एक प्रवासी के रूप में इटली पहुंचे। वहाँ एक वेल्डर और माली के रूप में एक दिन में दस से अधिक घंटे काम करते थे। इसी दौरान उसकी पहचान एक समुदाय से हुई जहाँ उसे अपनेपन का अनुभव हुआ। वहां उसने ख्रीस्तीय धर्म की खोज की, जो बचपन से ही उसके अंदर था जिसे अपनी दादी ने गाना के माध्यम से विश्वास का बीच डाल दिया था। वे सन्स ऑफ द क्रॉस ऑफ प्रीस्टली फ्रेटरनिटी के सदस्य बन गये। दस साल बाद संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने रोम में उनका पुरोहिताभिषेक किया। 2017 में, वे फिदेई डोनम पुजोहित के रूप में अपने देश लौट आए। 9 अप्रैल को संत  पापा फ्राँसिस ने उन्हें तिराने-दुर्र्स महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त किया।

बचपन

अर्जन का जन्म और पालन-पोषण एक साम्यवादी, अल्बानियाई परिवार में हुआ था। साक्षात्कार में उसने कहा, "मैं एक ऐसे समय में पैदा हुआ था, जहाँ दुर्भाग्य से, विश्वास को याद करने वाले हर संकेत पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अपने जीवन के पहले वर्षों में, मैंने कभी ईश्वर के अस्तित्व के बारे में नहीं सुना। दुर्भाग्य से मेरे माता-पिता पर साम्यवाद का बहुत ही दुखद और भयानक प्रभाव था। लेकिन मेरे दादा-दादी प्रभु से प्रार्थना करते थे।”

अर्जन की नानी ने विश्वास का बीज डाला। धमकियों के बावजूद, उसकी नानी प्रार्थना करने से डरती नहीं थी। उन दिनों वे पढ़ने-लिखने नहीं जानते थे परंतु उनकी नानी प्रार्थनाओं को गाना गाते हुए करती थी। वे धर्म के सिद्धांतों को कविता के रुप में कंठस्थ करते थे और समय-समय पर कविता पाठ किया करते थे। वे भी बिना समझे अपनी नानी के साथ गाना गाते और कविता पाठ करते थे। केवल जब वे इटली पहुंचे तो उसे पता चला कि वे संस्कारों के बारे में जानते हैं जिसे वे घर पर या काम करते समय गाया करते थे। वे प्रणाम मरिया प्रार्थना का दूसरा भाग जानते थे क्योंकि उसकी नानी पहला भाग गाती थी और वे दूसरा भाग गाते थे। इस प्रकार ईश्वर उन्हें अपने लिए तैयार करते रहे।

तिराने-दूर्रेस माहाधर्मप्रांत के नव नियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष अर्जन डोडाज
तिराने-दूर्रेस माहाधर्मप्रांत के नव नियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष अर्जन डोडाज

प्रवासी

नव निर्वाचित धर्माध्यक्ष ने कहा "मैं साम्यवाद के पतन के ठीक बाद इटली पहुंचा। उस समय नियमित वीजा प्राप्त करना संभव नहीं था। एकमात्र तरीका मोटरबोट द्वारा था। कुछ नावें जो तट को छोड़ दी थी, परंतु दुर्भाग्य से दूसरा किनारा नहीं पहुँच पाई।"

साम्यवाद के पतन के तुरंत बाद, अर्जन ने देश छोड़ने की कोशिश की। "कई अन्य लड़कों की तरह, मैंने भी कई प्रयास किये थे। पहली बार, नाव क्षतिग्रस्त हो गई थी ... आज, मैं ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ कि यह तट से आगे बढ़ नहीं पाई। मुझे नहीं पता कि हमारे साथ क्या हुआ होता क्योंकि हम सभी को एक साथ भीड़ में डाल दिया गया था। हम सबको उतार दिया गया। आखिरकार, मैं उन नावों में से एक पर जाने में सक्षम हो गया। हमने 15 सितंबर 1993 की रात को अपना देश छोड़ दिया। ईश्वर का शुक्र है, समुद्र बहुत शांत था। उस रात आसमान तारों से भरा था। तट से दूर होने के साथ-साथ अपनों को छोड़ने का दुःख और देश से दूर होने का एहसास, आँखों से आँसू बहने लगे थे। पूरी यात्रा प्रभु ने हमें सुरक्षित रखा।

उस अनुभव पर चिंतन करते हुए तिराने के नए सहायक धर्माध्यक्ष बताते हैं, "आज, बहुत से लोग नावों पर देखे जाते हैं। मुझे लगता है कि किसी को उनके आँसू, उनके बलिदानों के बारे में सोचना चाहिए, जो दर्दनाक जीवन जी रहे हैं।" अगर उनका जीवन दर्दनाक नहीं होता तो वे अपना देश छोड़ कर कभी दूसरे देशों की शरण नहीं ढूँढ़ते।"

अर्जन के कुछ दोस्त उससे कुछ समय पहले इटली चले गए थे। उनकी मदद से अर्जन को उत्तरी इटली स्थित कुनेयो प्रांत के ड्रोनेरो में शरण मिली। वहाँ वह एक वेल्डर के पास प्रशिक्षु बन गया, "हम साइकिल फ्रेम को वेल्डिंग करते थे। फिर मैंने भवन निर्माण और बगान में भी काम किया। इस तरह, मैं अपने परिवार के लिए रुपये भेज कर सकता था क्योंकि हम वास्तव में बहुत गरीब थे। मैं कभी-कभी दिन में दस से भी अधिक घंटे काम किया करता था, इसलिए शाम को मैं थका हुआ घर पहुंचता था। मेरे बहुत कम दोस्त थे। उन्होंने मुझे पल्ली में एक युवा बैठक में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया। उनके साथ मैं बैठक में भाग लिया। वहाँ मेरी मुलाकात फादर मक्सिमो से हई। वे हाउस ऑफ मेरी कम्युनिटी के सदस्य थे। उनके साथ मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे अपनी युवावस्था के उस बेहद नाजुक दौर में जिस तरह के सहयोग की जरूरत थी, वह मुझे मिली।"

विश्वासी और पुरोहित

1997 में अर्जन ने बपतिस्मा ग्रहण किया। बाद में उसने ‘सन्स ऑफ द क्रॉस ऑफ प्रीस्टली फ्रटरनिटी’ धर्मसंघ में प्रवेश करने की इच्छा प्रकट की। उसे रोम में ‘हाउस ऑफ मेरी कम्युनिटी’ में रखा गया। वहाँ रहकर उसने ईशशास्त्र की पढ़ाई की। उसके निर्णय को स्वीकार करना उसके माता-पिता को बहुत कठिन लगा। इटली आने के दस साल बाद संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने संत पेत्रुस महागिरजाघऱ में उनका पुरोहिताभिषेक किया।

"1993 में, जिस साल मैं इटली आया, उसी साल  संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने अल्बानिया का दौरा किया था। देश हाल ही में तानाशाही से बाहर आया था। देश में बहुत दुख और गरीबी थी, लेकिन लोगों में नवीनता की प्यास थी। मैं उन सभी लोगों को याद करता हूँ, जो तिराने से श्कोदर तक सड़कों के दोनों किनारे संत पापा की कार के आने का इन्तजार किए थे। मेरी जीवन यात्रा में हमेशा उनका साथ रहा है और हमारी संत मदर तेरेसा का भी साथ रहा है। जैसा कि हम तानाशाह छोड़ रहे थे, उसने दया, कोमलता, भलाई और प्रेम का मरहम लगाते हुए हमें आशावान बनाया। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में गरीब लोगों को क्या और कैसे देना है, वे भली भांति जानती थी।

फादर डोडाज ने विभिन्न पल्लियों में काम किया और रोम में उसे अल्बानियाई समुदाय की देखभाल करने का भार मिला। 2017 में, तिराने के महाधर्माध्यक्ष जॉर्ज एंथोनी फ्रेंडो ने फादर अर्जन को महाधर्मप्रांत में अपनी सेवा देने के लिए अल्बानिया बुलाया। हाउस ऑफ़ मैरी कम्युनिटी के सुपीरियर  फादर जाकोमो मार्टिनेली और रोम के विकर कार्डिनल अंजेलो डी दोनातिस ने छुट्टी दे दी। फादर डोडाज फ़िदेई डोनम पुरोहित के रूप में अपने देश लौटे, अर्थात् एक पुरोहित के रुप में वे अस्थायी तौर पर दूसरे धर्मप्रांत में अपनी सेवा प्रदान कर सकते हैं।

धर्माध्यक्ष

सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति के बारे में, फादर डोडाज ने कहा, "सच में, मैंने कभी भी इसके बारे में या ऐसी किसी भी चीज के बारे में कभी भी नहीं सोचा था। मैं अपने समुदाय परिवार में बहुत खुश था। एक पल्ली में पल्ली वासियों के मिलकर काम करना मुझे अच्छा लगता है। अब मुझे संत पापा फ्राँसिस द्वारा यह नियुक्ति मिली है, मैंने प्रभु में, माता मरियम में विश्वास करते हुए और कलीसिया के प्रति आज्ञाकारिता में इस उत्तरदायित्व को स्वीकार किया है।"

संत पापा फ्राँसिस द्वारा दौरा किया गया पहला यूरोपीय देश अल्बानिया था। यह देश हमेशा विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच सफल सह-अस्तित्व का प्रतीक रहा है। मुस्लिम और अन्य ख्रीस्तीय समुदाय भी संत पापा के चुनाव से खुश हैं। फादर डोडाज ने देश में विभिन्न धर्म के लोगों के "सह-अस्तित्व" को स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारे लिए यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि सह-अस्तित्व मात्र धार्मिक सहिष्णुता नहीं है, बल्कि यह सद्भाव, अपनापन, महान सहयोग और आपसी समर्थन की भावना है।"

07 May 2020, 16:48