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पेड़ लगाते पाकिस्तानी स्कूल के बच्चे पेड़ लगाते पाकिस्तानी स्कूल के बच्चे 

लौदातो सी : एक पेड़ लगाओ, एक आशा जगाओ

कारितास ने स्कूलों, धर्मसमाजी संस्थाओं और संगठनों द्वारा देश के 26 जिलों में 1,06,22,777 पेड़ लगाने की योजना बनायी है। इस पहल की शुरूआत 2016 में की गई थी और इसे 2019 के नवम्बर माह में पूरा किया गया। इस योजना का पहला पेड़ काराची के कारितास पाकिस्तान के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल जोसेफ कूट्टस ने लगाया था।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पाकिस्तान, शनिवार, 23 मई 2020 (रेई)-  "एक पेड़ लगाओं, एक आशा जगाओ।" यह कारितास पाकिस्तान द्वारा देश में वनीकरण के लिए जारी एक परियोजना का नाम है जिसको सृष्टि की देखभाल पर संत पापा फ्राँसिस द्वारा प्रकाशित विश्व पत्र "लौदातो सी" से प्रेरित होकर अपनाया गया है।

प्रेरितिक विश्व पत्र लौदातो सी की प्रकाशना की पांचवीं सालगिराह इसी सप्ताह मनायी गई। कारितास इंटरनेशनल के वेबसाईट में कहा गया है कि पाकिस्तान विश्व में जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित पाँचवाँ देश है। ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार दुनिया की ग्रीनहाउस गैसों में राष्ट्र का योगदान 1 प्रतिशत से भी कम है। यद्यपि इसके 200 मिलियन से अधिक निवासी जलवायु परिवर्तन के परिणामों से सबसे दुर्बल शिकार हैं। वास्तव में, जलवायु परिवर्तन से विनाशकारी मानसून, उच्च तापमान, सूखे और बाढ़, कृषि उत्पादकता में लगातार कमी जैसा आपदाएँ बढ़ रही हैं, जबकि तटीय क्षेत्रों में समुद्र का जलस्तर और चक्रवात का खतरा बढ़ रहा है।

इन सभी कारणों से स्थानीय कारितास ने स्कूलों, धर्मसमाजी संस्थाओं और संगठनों द्वारा देश के 26 जिलों में 1,06,22,777 पेड़ लगाने की योजना बनायी है। इस पहल की शुरूआत 2016 में की गई थी और इसे 2019 के नवम्बर माह में पूरा किया गया। इस योजना का पहला पेड़ काराची के कारितास पाकिस्तान के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल जोसेफ कूट्टस ने लगाया था। उन्होंने लाहौर में चार साल पहले एक जैतून का पेड़ लगाया था। इस तरह भावी पीढ़ी के लिए आशा की नींव डाली गयी।

वेबसाईट में कहा गया है कि पेड़ हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। वे ऑक्सिजन देने हैं, कार्बन को अपने में सोख लेते, मिट्टी और पानी की रक्षा करते एवं मरूस्थल बनने तथा भूस्खलन जैसे प्राकृतिक आपदाओं को रोकते हैं। इसलिए पेड़ लगाना जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

कारितास पाकिस्तान के निदेशक अमजाद गुलज़ार ने कहा, "हमें अपनी जीवनशैली एवं पर्यावरण के प्रति हमारी पहुँच को बदलने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए समुदायों को आवश्यक ज्ञान एवं कुशलता प्रदान करने की जरूरत है।"

परियोजना इतनी सफल हुई कि कारितास ने इसका दूसरा चक्र 2020 से 2023 को पुनः जारी करने का निर्णय लिया है।

गुलजार ने कहा, "इस प्रयास ने एक सकारात्मक प्रभाव डाला है, हम इसे नहीं खो सकते। इसने हमें हरित जीवन शैली अपनाने का अवसर दिया है। इन छोटे प्रयासों का हमारे आमघर पर महान प्रभाव पड़ेगा क्योंकि आज जो रोपा गया है कल हमारे लिए लाभदायक होगा। इतना ही नहीं, इस पर्यावरण कार्यक्रम के द्वारा अंतरधार्मिक वार्ता को भी प्रोत्साहन मिलेगा क्योंकि यह विभिन्न धर्मों के समुदायों को आपसी समझदारी में एक साथ लाता है।"

23 May 2020, 15:08