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अमेरिका लास वेगास में आश्रय, कोरोना -19 अमेरिका लास वेगास में आश्रय, कोरोना -19  (ANSA) कहानी

कोविद -19 के दौरान बेघर महिला की दास्तान

यह कोविद -19 के दौरान बोस्टन में रहने वाली एक बेघर महिला डेबी की कहानी है। वह अनेकों में से एक है।

माग्रेट सुनीता मिंज- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार 7 अप्रैल 2020 (वाटिकन न्यूज) : डेबी पेशे से एक नर्स है जो बोस्टन के एक अस्पताल में रात में ड्यूटी किया करती थी। उसने शादी नहीं की, अतः खुद के लिए काफी रुपये कमा लेती थी। छुट्टियों में उन्होंने पवित्र भूमि येरुसलेम, रोम और कैरिबियन क्रूज की तीर्थयात्रा की थी। उसे ओबेरमर्गगाऊ का लोकप्रिय खेल देखने का भी अवसर मिला था।

कड़वा अतीत

डेबी मिड-वेस्ट से बोस्टन जाने के कुछ समय बाद, शराब पीने लगी। बाद में उसने पीने में ड्रग्स मिलाना शुरु किया। जब वह अपने को संभाल न पा रही थी और उसे लगा कि उसका जीवन समाप्त होने को था। उसने एए का दरवाजा खटखटाया। तब से लेकर आज तक इससे जुड़ी है और वह शांत है। बोस्टन के एक पुरोहित ने डेबी को काथलिक विश्वास को मजबूत करने में मदद किया।  वह अपनी पल्ली में एक यूखरीस्तीय कार्यकर्ता बन गई और कर्सिलो आंदोलन में वह सक्रिय भाग लेती थी। हालात ठीक चल रहे थे।

नौकरी चली गई

तभी डेबी के जीवन में अकल्पनीय घटना घटी। लगभग दस साल पहले, अपने माता-पिता में से एक की मृत्यु के तुरंत बाद, डेबी अपनी नौकरी खो दी। वाटिकन न्यूज की सिस्टर बेर्नादेत के साथ हुए साक्षात्कार में उसने अपने जीवन की आपबीती घटनाओं को साझा किया।

डेबी ने कहा, “नौकरी खोने के बाद मैंने कुछ समय लिया। लगभग एक साल के बाद, मैंने नौकरी ढूढ़ना शुरू कर दिया और मुझे कोई नौकरी नहीं मिली। मैं हताश होने लगी और अवसाद में जाने लगी। मैं घर पर ही बैठी रहती थी जब तक मेरे पास रुपये थे तब तक मैं किसी तरह अपना गुजारा की। जब सब रुपये खतम हो गये तो मुझे किराये का घर छोड़ना पड़ा। मैंने तीन साल तक अपनी कार को ही अपना घर बना लिया था और अब करीब दस महीने से एक पुनर्वास केंद्र में हूँ।”

पुनर्वास केंद्र में कोरोना-19  

अमेरिका में पुनर्वास केंद्र ने कोविद -19 को अपने आश्रितों के बीच फैलने से रोकने के लिए एहतियाती उपाय अपनाए।  डेबी ने बताया कि उन्हें बाहर जाने से दूरी रखने की हिदायत दी जाती थी। केंद्र में भी दूरी रखने के लिए और बारंबार साबुन से हाथ धोने को कहा गया। सोने के कमरे में भी बिस्तरों के बीच स्क्रीन डाले गये। लेकिन शाम को खाने के कमरे में टेबल के चारों ओर वे सभी इकट्ठे बैठकर खाना खाते थे। कोरोना वायरस हमारे पुनर्वास केंद्र में भी प्रवेश किया। हमें पता था कि आज नहीं तो कल आश्रय में कोरोना वायरस जरुर आएगा।  

डेबी को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब उसे पता चला कि वह कोरोना वायरस के संपर्क में थी और उसे एक अज्ञात एकांतवास में ले जाया जा रहा है।

उसने बताया कि पुनर्वास केंद्र में अफवाह फैल रही थी कि वहाँ कोरोना वायरस के संपर्क में आये कुछ लोग रह रहे हैं। एक शाम को केंद्र के निदेशक ने सबको बुलाया और कहा कि एक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। उसे इलाज के लिए भेजा जाएगा। डेबी उस व्यक्ति के बगल में बैठी थी। उसे भी वायरस पोसिटिव होने का संदेह होने लगा। उसने ऑफिस में जाकर पूछ-ताछ करना शुरु किया। उसे नर्स के पास जाँच के लिए भेजा गया। जाँच के बाद उससे कहा गया कि उसे भी संगरोध में भेजा जाएगा। उसे अपने कमरे वापस जाकर अपने सामान लाने की भी छुट्टी नहीं मिली। पुनर्वास केंद्र में काम करने वाली एक महिला उसके लॉकर से कुछ जरुरी सामान ले आयी। एक वाहन आई और उसे एक संगरोध केंद्र में ले गई।

संगरोध (क्वारंटाइन) सुविधा

 बोस्टन में एक पुनर्वास केंद्र हुआ करता था जो काफी समय से बंद हो गया था, इसे फिर से खोल दिया गया, ताकि मरीजों को रखने के लिए जगह मिल सके। पुनर्वास केंद्र में हम सभी संगरोध में हैं। डेबी ने बताया कि वहाँ के कर्मचारी "बहुत अच्छे" और देखभाल करने वाले हैं। वहाँ उन्हें सब कुछ दिया जाता है जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है। लोग ज्यादातर अपने-अपने कमरों में ही बंद रहते हैं और यदि वे दालान में बाहर आते हैं, तो उन्हें मुखौटा और दस्ताना पहनना पड़ता है। सुबह एक नर्स आती है, कोरोना से संबंधित महत्वपूर्ण संकेतों की जांच करती है वे हर किसी से पूरी सूची के माध्यम से सवाल पूछती है :  क्या आपको खांसी आ रही है? क्या आपको खुजली हो रही हैं? ‘क्या आप को सांस लेने में कोई दिक्कत आ रही है? वह हमारे अतीत के बारे में भी पूछती है। हम वास्तव में ईमानदारी से जवाब देने के लिए बाध्य हैं। परिसर में एक डॉक्टर है।

डेबी ने बताया कि वहाँ के स्टाफ बहुत अच्छे हैं। वे भोजन देते हैं। समय-समय पर हमारी जाँच करते हैं और हमारे जरुरत की चीजें देते हैं। वे हमें किताबें, और खेलने के लिए कार्ड देते हैं। वे अच्छी तरह से सभी की देखभाल करते हैं। मैं उनके साथ सहज महसूस करती हूँ।”

आगे क्या होगा?

एक बेघर व्यक्ति के दिमाग में हमेशा से एक प्रश्न मौजूद रहता है, "कल क्या होगा? " मैंने डेबी से पूछा कि जब वह संगरोध से बाहर होगी तो कहाँ जाएगी।

डेबी ने जवाब दिया,“मैं अपने पुराने पुनर्वास केंद्र में ही लौटूँगी। वहां मेरी चीजें हैं। मुझे उमीद है कि वे मुझे स्वीकार करेंगे। आश्रय से कुछ लोगों को बाहर निकाला जा रहा है और उन्हें बंद पड़े विश्वविद्यालयों में रखा जा रहा है। जिससे कि पुनर्वास केंद्र में भीड़ को कम किया जा सके।

प्रार्थना पर भरोसा

हमारे साक्षात्कार की शुरुआत से ठीक पहले, डेबी ने मुझे बताया था कि वह लोगों की प्राथर्नाओं के प्रति आभारी है। जैसे ही साक्षात्कार समाप्त हुआ, उसने मुझे बताया कि वह इंटरनेट पर कुछ प्रार्थना सूची में अपना नाम जोड़ने जा रही है। साक्षात्कार पर उनके अंतिम शब्द भी प्रार्थना के बारे में ही थे: "मुझे बहुत खुशी है कि इतने सारे लोग मेरे लिए प्रार्थना कर रहे हैं और मैं उम्मीद करती हूँ कि मैं स्वस्थ रहूँगी।"

मुझे यकीन है कि डेबी यह जानकर प्रसन्न होगी कि आप भी, उसके लिए और उसके जैसे अन्य बेघर लोगों के लिए प्रार्थना करेंगे।

07 April 2020, 16:19