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स्कॉटलैंड में   प्रदर्शन स्कॉटलैंड में प्रदर्शन  (ANSA)

यूरोपीय संघ से अलग हुआ ब्रिटेन

ब्रिटेन औपचारिक रूप से दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक के सदस्य के रूप में 47 साल बाद शुक्रवार को यूरोपीय संघ (ईयू) छोड़ दिया। आधिकारिक प्रस्थान के समय से एक घंटे पहले प्रसारित एक वीडियो संदेश में, देश के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा, “ब्रेक्सिट एक अंत नहीं है, बल्कि एक शुरुआत है।”

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 1 फरवरी 2020 (वाटिकन न्यूज) : साढ़े तीन साल के लम्बे बहस और खींचातानी के बाद आखिरकार ब्रिटेन आधिकारिक तौर पर शुक्रवार, 31 जनवरी 2020 की आधी रात को यूरोपीय संघ से अलग हो गया। इसके साथ ही दोनों के बीच के लगभग आधी सदी पुराने रिश्ते का अंत हो गया है।

इस ऐतिहासिक मौक़े पर लंदन में जहाँ ब्रेग्ज़िट के समर्थकों ने बड़ी संख्या में संसद के पास जमा होकर इसका स्वागत किया। वहीं स्कॉटलैंड में इसके विरोध में कैंडल-मार्च निकाला गया। स्कॉटलैंड के मतदाताओं ने यूरोपीय संघ में बने रहने के लिए मतदान किया था मगर पूरे देश की राय इससे अलग आई।

23 जून 2016 को जनमत संग्रह में 52 प्रतिशत मतदाताओं ने ब्रेग्ज़िट का समर्थन और 48 प्रतिशत ने इसका विरोध किया था। ब्रेग्ज़िट पर हुए जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने की प्रक्रिया शुरु हुई मगर इसमें काफ़ी अड़चनें आईं और तब से ब्रिटेन में दो बार प्रधानमंत्री भी बदले।

ब्रेग्ज़िट पर आए फ़ैसले के फ़ौरन बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने प्रधानमंत्री का पद छोड़ दिया था। इसके बाद टेरेजा मे देश की प्रधानमंत्री बनीं जिनका मुख्य दायित्व ब्रेग्ज़िट को लागू करवाना था।

मगर ब्रेग्ज़िट की शर्तों पर संसद का समर्थन हासिल न हो पाने के बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा और फिर ये ज़िम्मेदारी वर्तमान प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के पास आई।

प्रधानमंत्री जॉनसन के पास यूरोपीय संघ के साथ एक नए व्यापार और भविष्य के रिश्ते पर बातचीत करने के लिए वर्ष के अंत तक का समय है। द ब्लॉक ने चेतावनी दी है कि इतने कम समय सीमा के साथ यह आसान नहीं होगा लेकिन जॉनसन ने संक्रमण की अवधि बढ़ाने की संभावना से इनकार किया है। इस बीच, अधिकांश यूरोपीय संघ के कानून लागू रहेंगे, जिसमें लोगों की मुफ्त आवाजाही भी शामिल है।

01 February 2020, 16:34