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मौत शिविर ऑशविट्ज़-बिरकेनौ की मुक्ति की 75 वीं वर्षगांठ मौत शिविर ऑशविट्ज़-बिरकेनौ की मुक्ति की 75 वीं वर्षगांठ   (AFP or licensors)

रूस-पोलैंड तनावों के कारण होलोकॉस्ट स्मारक प्रभावित

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, दुनिया के नेता, जर्मन नाजी के सबसे बड़े मौत शिविर ऑशविट्ज़-बिरकेनौ की मुक्ति की 75 वीं वर्षगांठ मनाने हेतु दो बार जमा होंगे। दो समारोहों का आयोजन किया गया है, पहला, बृहस्पतिवार को येरूसालेम में और दूसरा, अगले सोमवार को पोलैंड के ऑशविट्ज़-बिरकेनौ स्थल पर। यह तनाव रूस और पोलैंड के बीच द्वितीय विश्व युद्ध पर, अतीत की व्याख्या करने के तरीके से उत्पन्न हुई है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पोलैंड, बृहस्पतिवार, 23 जनवरी 20 (वीएन)˸ शीतकालीन सत्र में, यू.एस. हाउस की अध्यक्षा नैन्सी पेलोसी ने पोलैंड में ऑशविट्ज़ स्मारक स्थल के दौरे में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उनकी यात्रा, उस दिन की 75 वीं वर्षगांठ से पहले हुई है जिस दिन सोवियत सैनिकों ने द्वितीय विश्व युद्ध के सबसे बुरे मौत शिविरों में से एक को आज़ाद कर दिया था।

सन् 1940 से 45 के बीच यहाँ करीब 1.1 मिलियन लोगों की मौत हुई थी। जिनमें से अधिकांश यूरोप के यहूदी थे किन्तु युद्ध के कुछ पोलिश, रोमी और रूसी कैदी भी थे जिनकी मौत हुई थी।

ऑशविट्ज़ बिरकेनौ में उन सभी लोगों को या तो गोली मारकर, या गैस चैम्बर में या भूखा रखकर अथवा प्रताड़ित कर मार डाला गया था।

लाल सेना ने 27 जनवरी, 1945 को शिविर को मुक्त कराया था। उस समय से यह एक यादगार अवसर बन गया है और हर साल अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट (बलिदान) दिवस के रूप में मनाया जाता है। होलोकॉस्ट में कुल 6 मिलियन लोगों को मार डाला गया था।

कटु विवाद

फिर भी, पोलैंड के बीच कटु विवाद के कारण स्मरणोत्सव खतरे में है जहां नाजी जर्मन व्यवसायियों ने ऑशविट्ज़ और अन्य नजरबंद शिविरों में और सोवियत संघ प्रशासनिक राज्य, रूस पर शासन किया था।

पोलैंड ने याद किया कि 1939 में युद्ध शुरू होने से कुछ समय पहले सोवियत संघ ने नाजियों के साथ हमला नहीं करने के एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया था, जिसे मोलोतोव-रिबेंट्रॉप संधि के रूप में जाना जाता था।

उसके दो साल बाद, जर्मनी ने क्रेमलिन नेता जोसेफ स्टालिन की ओर रुख किया और सोवियत संघ पर आक्रमण किया। इसने सोवियत को मित्र राष्ट्र की तरफ युद्ध में प्रवेश दिलाया। एडॉल्फ हिटलर के जर्मनी की अंतिम हार में लाखों लाल सेना के सैनिकों ने अपनी जान गंवा दी थी, किन्तु रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध के लिए पोलैंड को दोष देने की मांग की है।

उन्हें इस बात की नराजगी है कि पश्चिम ने ऐतिहासिक स्मृति में युद्ध को गति देने में सोवियत की भूमिका पर अधिक ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है और जर्मनी को हराने में उसकी भूमिका पर कम ध्यान दिया है। लेकिन इससे पोलैंड की सरकार नाराज हो गई है, जिसका मानना है कि पुतिन का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ में पोलैंड के प्रभाव को कमजोर करना है।

यूरोपीय संघ गुस्से में

यूरोपीय संघ की यूरोपीय आयोग पोलैंड के साथ सहमत है। यूरोपीय संघ के न्याय आयोग की वेरा जोरोवा ने रूसी तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा है कि "यदि एक सदस्य राज्य ऐतिहासिक भूमिका को विकृत करने के प्रयासों में एकतरफा हो जाता है, तो यूरोपीय आयोग हमेशा विघटन और नकली सूचनाओं का विरोध और प्रतिकार करेगा।"

उन्होंने कहा, "मुझे आशा व्यक्त करने की अनुमति दें जब हम मानवता के इतिहास में उस सबसे खराब युद्ध के अंत की 75 वीं वर्षगांठ पर पहुंच रहे हैं, तब हम घटना के इतिहास को विकृत करने और पीड़ितों को अपराधियों के रूप में मुखौटा पहनाने के प्रयासों को न देखें।"

23 January 2020, 16:39