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ग्वाटेमाला के प्रवासी ग्वाटेमाला के प्रवासी  (AFP or licensors)

सुव्यवस्थित प्रवासन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने ‘अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस’ के अवसर पर कहा कि तथ्यों के बजाय भय से प्रेरित नीतियों के कारण प्रवासियों ने ऐसी पीड़ाओं का सहन किया है जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपील की है कि प्रवासन के मुद्दे पर वैश्विक समझौते के लक्ष्यों को वास्तविकता में बदलने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

न्यूयार्क, बुधवार 18 दिसम्बर 2019 (यूएन न्यूज) : अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस हर वर्ष 18 दिसंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार विश्व में 27 करोड़ से ज़्यादा प्रवासी हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का संदेश

 ‘अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस’ के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि प्रवासी लोग समाज का अटूट हिस्सा हैं। वे आपसी समझ बढ़ाने और अपने रहने के स्थानों व मूल स्थानों दोनों ही जगह के टिकाऊ विकास में योगदान करते हैं। सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन सभी के हित में है। प्रवासन मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकतायें अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिये सर्वश्रेष्ठ तरीके से हासिल होती है। सभी प्रवासियों को अपने सभी मानवाधिकारों की हिफाजत करने का बराबर अधिकार है। ये सिद्धांत सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए तैयार किये गये ग्लोबल कॉमपैक्ट में वर्णित है। फिर भी हमें प्रवासियों के बारे एसी बातें सुनने को मिलती है जो हानिकारक व झूठी होती हैं। हम अकसर देखते हैं कि तथ्यों पर आधारित होने के बजाय, डर पर बनाई गई नीतियों के कारण प्रवासियों को असीम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

इस अवसर पर उन्होंने दुनिया भर के सभी नेताओं और आम लोगों से आग्रह किया कि प्रवासियों के बारे में तैयार किये गये ग्लोबल कॉम्पैक्ट को लागू करें ताकि प्रवासन सभी के लिए कारगर साबित हो सके।

प्रवासी अक्सर ‘बलि का बकरा’

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एजेंसी (आइओएम) के कार्यकारी निदेशक एंतोनियो वितोरिनो ने अपने एक लेख में कहा है, “वही समुदाय फलते-फूलते हैं जो बदलाव को अपनाते हैं और उसके अनुसार परिवर्तन लाते हैं. प्रवासी उस बदलाव का अटूट और स्वागत योग्य अंग हैं।”

उनके मुताबिक़ प्रवासी सुदृढ़ता के पैरोकार भी बन सकते हैं और पर्यावरणीय बदलावों, बेरोज़गारी, राजनैतिक अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं के समय योगदान दे सकते हैं। लेकिन चुनौतीपूर्ण राजनैतिक माहौल में प्रवासियों को अक्सर ‘बलि का बकरा’ बनाया जाता है और समाज में हर तरह की मुश्किलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है।

18 December 2019, 16:14