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बर्लिन की दीवार के गिरने के 30 वीं वर्षगांठ बर्लिन की दीवार के गिरने के 30 वीं वर्षगांठ  (ANSA)

दीवार का गिरना : "रिपोर्ट करने के लिए कुछ खास नहीं"

वाटिकन रेडियो अभिलेखागार ने एक कार्यक्रम में 9 नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार के गिरने को रेखांकित किया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 9 नवम्बर 2019 (वाटिकन न्यूज) : 9 नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार के गिरने के 30 साल पूरे होने के दिन, कोई भी व्यक्ति यूरोप में स्वतंत्रता के एकीकरण में संत पापा जॉन पॉल द्वितीय द्वारा निभाई गई भूमिका को भूल नहीं सकता।  

सेना ने 1961 से 1989 तक बर्लिन में शारीरिक और वैचारिक रूप से ठोस अवरोधक की रक्षा की। अलग और बहुत लंबे समय तक जर्मन सीमा के साथ, जिसने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के बीच सीमा का सीमांकन किया, शीत युद्ध के दौरान बर्लिन की दीवार शारीरिक रूप से पश्चिमी यूरोप और पूर्वी ब्लॉक का "आयरन कर्टन" का प्रतीक बन गई।

पोलेंड वासी संत पापा जॉन पॉल द्वितीय की अपने मूल देश में जून 1979 में प्रेरितिक यात्रा विभाजित महादेशों पर बहुत प्रभाव डाला, क्योंकि यह एक संत पापा की साम्यवादी देश में पहली यात्रा थी।

संत पापा के वे मूल्य, जो इतने स्पष्ट रूप से उनके कार्यकाल में देखने को मिले, व्यापक रूप से जर्मन पुनर्मिलन के लिए मार्ग को प्रशस्त करने वाली दीवार को नीचे लाने वाली क्रांति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए और अंततः यूरोप में कुलीनतावादी शासन के निधन के रूप में स्वीकार किए जाते थे।

वेरोनिका स्कारिसब्रिक

वाटिकन रेडियो के अभिलेखागार ने ऐतिहासिक कार्यक्रम को चिह्नित करने के लिए वेरोनिका स्कारिसब्रिक द्वारा लिखित और निर्मित एक कार्यक्रम को प्रस्तुत किया हैं: बर्लिन, बीसवीं सदी के भू-राजनीति के केंद्र में एक शहर, नाजी जर्मनी और बाद में शीत युद्ध का मंच था। बर्लिन की दीवार पश्चिमी बर्लिन और जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच एक अवरोध और शीत युद्ध का प्रमुख प्रतीक थी। थी जिसने 28 साल तक बर्लिन शहर को पूर्वी और पश्चिमी टुकड़ों में विभाजित करके रखा। इसका निर्माण 13 अगस्त 1961 को शुरु हुआ और 9 नवम्बर, 1989 के बाद के सप्ताहों में 162 किलोमीटर की इस दीवार को तोड़ दिया गया।

याद करने की तारीख 9 नवंबर 1989 है। बीस साल बाद, उसी तारीख को चिह्नित करने के लिए, विक्टोरिया स्ट्रचविट्ज नामक एक जर्मन लेखिका ने उस दीवार के दोनों ओर से बीस लोगों का साक्षात्कार किया।

विक्टोरिया स्ट्रचविट्ज़ ने इस घटना के कुध महत्वपूर्ण लोगों का साक्षात्कार किया जैसे, उस समय वेस्ट बर्लिन के मेयर, वाल्टर मोम्पर, पश्चिम बर्लिन में ब्रिटिश सेक्टर के आखिरी कमांडर, सर रॉबर्ट कॉर्बेट और गुंटर शॉबोव्स्की, जिन्होंने एक प्रेस सम्मेलन के दौरान लोकप्रिय अपेक्षाओं के साथ सीमाओं को खोलने की बात कही।

कुछ विशेष नहीं हुआ

विक्टोरिया स्ट्रचविट्ज़ ने अपनी पुस्तक को "कुछ विशेष नहीं हुआ" शीर्षक देने के लिए चुना, क्योंकि ये शब्द उस समय पूर्वी बर्लिन में कुछ अधिकारियों द्वारा इस घटना के ऐतिहासिक महत्व को कम करने के इरादे से सुनाए गए थे।

विक्टोरिया स्ट्रैचविट्ज़ ने अपने शोध के दौरान पाया कि उच्च जोखिम कारक सीमाओं के खोलने में शामिल था। इस तथ्य पर उसने पहले ध्यान में नहीं दिया था, कि इस अवसर पर एक व्यक्ति की मृत्यु घटना के शांतिपूर्ण परिणाम को खून खराबे में बदल सकता था।

बर्लिन की दीवार

विदित हो कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जब जर्मनी का विभाजन हो गया, तो सैंकड़ों कारीगर और व्यवसायी प्रतिदिन पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे। बहुत से लोग राजनैतिक कारणों से भी समाजवादी पूर्वी जर्मनी को छोड़कर पूँजीवादी पश्चिमी जर्मनी जाने लगे इससे पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनैतिक रूप से बहुत हानि होने लगी। बर्लिन दीवार का उद्देश्य इसी प्रवासन को रोकना था। इस दीवार के विचार की कल्पना वाल्टर उल्ब्रिख़्त के प्रशासन ने की और सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने इसे मंजूरी दी।

बर्लिन की दीवार बनने से यह प्रवास बहुत कम हो गया - 1949 और 1962 के बीच में जहाँ 25 लाख लोगों ने प्रवास किया वहीं 1962 और 1989 के बीच केवल 5,000 लोगों ने। लेकिन इस दीवार का बनना समाजवादी गुट के प्रचार तंत्र के लिए बहुत बुरा साबित हुआ। पश्चिम के लोगों के लिए यह समाजवादी अत्याचार का प्रतीक बन गई, खास तौर पर जब बहुत से लोगों को सीमा पार करते हुए गोली मार दी गई।

1980 के दशक में सोवियत आधिपत्य के पतन होने से पूर्वी जर्मनी में राजनैतिक उदारीकरण शुरू हुआ और सीमा नियमों को ढीला किया गया। इससे पूर्वी जर्मनी में बहुत से प्रदर्शन हुए और अंततः सरकार का पतन हुआ। 9 नवम्बर 1989 को घोषणा की गई कि सीमा पर आवागमन पर से रोक हटा दी गई है। पूर्वी और पश्चिमा बर्लिन दोनों ओर से लोगों के बड़े बड़े समूह बर्लिन की दीवार को पारकर एक-दूसरे से मिले। अगले कुछ सप्ताहों में उल्लास का माहौल रहा और लोग धीरे-धीरे दीवार के टुकड़े तोड़कर यादगार के लिए ले गए। बाद में बड़े उपकरणों का प्रयोग करके इसे ढहा दिया गया।

बर्लिन दीवार के गिरने से पूरे जर्मनी में राष्ट्रवाद का उदय हुआ और 3 अक्टूबर 1990 को जर्मनी फिर से एक हो गया।

09 November 2019, 15:40