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फ़िलिस्तीनी शरणार्थी फ़िलिस्तीनी शरणार्थी   (AFP or licensors)

फ़िलिस्तीनी शरणार्थी 70 वर्षों से शांति की प्रतीक्षा में,यूएन

मध्य पूर्व में फिलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता और रोजगार के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी(यूएनआरडब्लयूए) को 1949 में शुरु किया गया था। आज तक, 5 मिलियन से अधिक शरणार्थियों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। परमधर्मपीठ अभी भी युद्धरत दलों के बीच एक न्यायसंगत और स्थायी समाधान की उम्मीद करती है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

न्यूयॉर्क, बुधवार 13 नवम्बर 2019 (वाटिकन न्यूज) : फिलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता और रोजगार के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (यूएनआरडब्लयूए) को शुरु किये 70 साल बीत चुके हैं। फिलिस्तीनी शरणार्थियों को राहत, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सामाजिक सेवाओं और आपातकालीन सहायता की पेशकश करने के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने 1948 के अरब-इजरायल संघर्ष के बाद स्थापित किया था,  वे जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में रहते हैं और आज पांच मिलियन से अधिक हैं, जिनमें से एक मध्य पूर्व क्षेत्र में 58 शरणार्थी शिविरों में रखा गया है। एक सालगिरह जो "फिलिस्तीनी शरणार्थियों की स्थिति बहुत लंबे समय तक चली है" पर प्रकाश डालती है,  परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक,महाधर्माध्यक्ष बेर्नार्दितो औज़ा ने सोमवार को  न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की 74वीं महासभा की कार्यवाही के दौरान कड़ी निंदा की।  

यूएनआरडब्लयूए को वित्तीय कटौती का खतरा

इस अवसर पर, महाधर्माध्यक्ष औजा ने यूएनआरडब्लयूए की लगातार अनिश्चित वित्तीय स्थिति, दाता देशों में कटौती के खतरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "हमें मानवीय सहायता के राजनीतिकरण बचना चाहिए जो लंबे समय से युद्ध पीड़ितों की मदद करने वाली इस एजेंसी की प्रतिबद्धता को तोड़ सकता है। उन्होंने कहा कि "चालू वित्त वर्ष में कटौती ने सबसे अधिक प्रभावित किया है। सीरिया में 2014 के युद्ध के बेघर परिवारों, विकलांग लोगों को खाद्य सहायता की आवश्यकता है। जिन छात्रों ने इस वर्ष अपनी पढ़ाई शुरू करने की उम्मीद की थी और अन्य जिनकी पढ़ाई हाल की लड़ाई के कारण बाधित हुई थी। महाधर्माध्यक्ष औजा ने यूएनआरडब्लयूए के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा अब तक किए गए कार्यों की प्रशंसा की।

नागरिकता  मानव अधिकार 

चूंकि नागरिकता मानवाधिकारों की रक्षा की पहली श्रेणी में आती है, अतः कोई भी व्यक्ति राज्यविहीन नहीं हो सकता। महाधर्माध्यक्ष औज़ा ने कहा कि "एक स्थायी शांति समझौते के अभाव में, जो फिलिस्तीनी शरणार्थियों के अधिकारों की गारंटी और बचाव करता है, यूएनआरडब्लयूए सदस्य राज्यों के पूर्ण समर्थन के हकदार हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि फिलिस्तीनी शरणार्थी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की स्थिर एकजुटता पर भरोसा कर सकते हैं।

एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की आशा

महाधर्माध्यक्ष औज़ा की उम्मीद है कि जल्द ही या बाद में, फिलिस्तीनी शरणार्थियों की स्थिति के लिए एक उचित और स्थायी समाधान तक पहुँचा जा सकता है। इच्छुक पार्टियों के बीच वार्ता के माध्यम से, इजरायल और फिलिस्तीन दो अलग देश के रुप में समाधान तक पहुंचे। दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ रहें।

13 November 2019, 16:04