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बच्ची मरिया अंजेला बच्ची मरिया अंजेला  कहानी

जीवन के घेरे में मरिया अंजेला

गरिमा और प्रेम की एक कहानी, जो संत पापा फ्राँसिस के शब्दों को दर्शाती है, "आइए, हम एक ऐसी सभ्यता का निर्माण न करें जो ऐसे लोगों को त्याग देती है जिनके जीवन को हम अब जीने के योग्य नहीं मानते हैं, हमेशा से हर जीवन मूल्यवान है।"

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

मरिया अंजेला क्रेआ की कहानी हमारे सामने एक सवाल प्रस्तुत करती है: हम कौन हैं जो एक मानव प्राणी को भूख और प्यास से मरने का फैसला करते हैंप्रश्न जिस पर किसी ने हाल ही में एक उत्तर दिया है: मृत्यु। दूसरों ने हमेशा जीवन की रक्षा की है। इंसान की गरिमा। एक पच्चीस वर्षीय इतालवी महिला मरिया अंजेला, जिनके लिए संत पापा फ्राँसिस द्वारा पिछले जुलाई में बोले गए शब्द गूंजते हैं: "हम एक ऐसी सभ्यता का निर्माण नहीं करते हैं, जो ऐसे लोगों को खत्म करती है जिनके जीवन को हम मानते हैं कि वे अब जीने लायक नहीं हैं: हमेशा से, हर जीवन मूल्यवान है।" मरिया अंजेला के माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और वे बीस से अधिक वर्षों से संत पापा के इन शब्दों का दैनिक जीवन में अभ्यास कर रहे हैं।

तीन साल की बच्ची की खूबसूरती

मरिया अंजेला ने पिछली सदी के अंत की सबसे प्रसिद्ध अनिमेटेड फिल्मों में से एक सिम्बाके नायक से प्यार किया। फिल्म का नाम था, "जीवन का चक्र।" छोटी लड़की स्क्रीन पर उस छोटे शेर को देखकर घंटों बिताया करती थी, शायद उससे मिलने का सपना देखती थी। एक बच्ची के रूप में, वह गाँव में सभी के द्वारा जानी जाती थी। परिवार में चार बच्चों में सबसे छोटी। सुनहरे बाल, हरी आँखें, एक प्यारी सी मुस्कान। उसे भरपूर प्यार मिला। कम उम्र में ही दृढ़ चरित्र वाली, खुद को समझना शुरु कर दिया था।

तीन साल की मरिया एंजेला
तीन साल की मरिया एंजेला

बीमारी

मरिया अंजेला की बीमारी की शुरुआत जनवरी 1998 में हुई थी। मार्च महीने में रेज्जो कलाब्रिया अस्पताल में पहली बार उसे भर्ती किया गया। उसे देखने वाले डॉक्टर ने कहा, "यह बच्ची मुझे उस तपेदिक मैनिंजाइटिस मरीज की याद दिलाती है जिसे एक बार देखा था।" अगले पांच महीनों में मरिया अंजेला को रेज्जो में दो बार और त्रिइस्ते में तीन बार बार्टोनेला संक्रमण के निदान के लिए लिया गया। मारिया अंजेला के घर लौटने के कुछ दिन बाद उसकी स्थिति और बिगड़ गई। जून में वह कोमा में चली गई थी पर पहले दिन में ही कोमा से बाहर आ गई। उसे त्रिइस्ते से ब्रुसेल्स ले जाया गया। 1998 की गर्मियों में बार्टोनेला संक्रमण को समाप्त करने के लिए उसके मस्तिस्क का ऑपरेशन किया गया। अक्टूबर की शुरुआत में मरिया अंजेला फिर से एक बार कोमा में चली गई। जब वह कोमा से बाहर आई तो बात-चीत करने और चलने-फिरने के काबिल न रही। बच्ची ब्रुसेल्स में अपनी मां के साथ सात महीने तक थी फिर मई 1999 में वह अपने घर लौट गई। उस समय वह 5 साल की थी।

एक नया जीवन

मरिया अंजेला का जीवन पूरी तरह से बदल गया। मरिया अंजेला की माँ, डॉ. मरिया ग्राजिया कैनिजेरो ने अपने परिवार की देखभाल के लिए, विशेषकर अपनी सबसे छोटी बेटी की देखभाल के लिए अपना पेशा छोड़ दिया। वो अपने डॉक्टर पति की तरह ही दूसरों की सेवा में अपना योगदान देना चाहती थी। सपने को साकार करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में दस साल से अधिक समय तक अध्ययन के बाद व्यवसाय या कहें उस मिशन को छोड़ देना उसे कठिन लगा। कभी कभी जिंदगी आपको घेर लेती है और आप पर हावी हो जाती है। मरिया अंजेला के तीन भाई इस नाजुक स्थिति को जानने लगे थे और उन्होंने एक बड़ी चुनौती, एक बड़े दर्द का सामना करना शुरु किया। उस समय वे प्राथमिक स्कूल में पढ़ते थे। मरिया अंजेला का जीवन अब बिस्तर तक ही सीमित हो गया। क्रेआ परिवार और रिशतेदारों को अब मरिया अंजेला को इसी स्थिति में स्वीकार करना पड़ा। खासकर दादी जो बीमारी से पहले और बाद में भी अपनी पोती के बहुत करीब है। "महान, अपार, असीम" तीन विशेषण दादी ने अपनी पोती के नाम में प्यार से जोड़ दिया है। हर दिन वह मरिया अंजेला के बगल में बैठती है। हमेशा पोती के हाथों को पकड़े प्रार्थना करती रहती है। आज मारिया अंजेला पच्चीस वर्ष की है।

एक पिता का प्यार

माता-पिता होने का मतलब है, दुनिया में एक नये जीवन को लाना, उसकी देखभाल करना और उसे स्वतंत्र रुप से जाने देना। एक स्वतंत्रता, जिसका अर्थ है साहस, जिम्मेदारी, परिपक्वता। बीमार बेटी के पिता को उसकी रक्षा करने की आवश्यकता है क्योंकि वह जीवन के पहले वर्षों की तरह नाजुक है। यह एक अलग तरह की नाजुकता है जिसे मरिया अंजेला के पिता, डॉक्टर किसी भी कीमत पर बचाना चाहते हैं। "अब वह अपनी दुनिया में है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि वह एक व्यक्ति नहीं हैं। मरिया अंजेला के पिता ने कहा, "अगर मैं उसे भोजन या पेय नहीं देता, तो मेरी बेटी की मृत्यु हो जाती। इस स्थिति में लोगों को भूख और प्यास से मरने देने का मतलब है मानव जाति का अपमान करना। यह कहते हुए उनकी आवाज भर्रा गई थी। मेरी बेटी का जो हाल हुआ है उससे उसके जीवन की गरिमा कम नहीं हुई है। वह जैसी है हमारा परिवार उसे उसी रुप में स्वीकार करता है और हमेशा स्वीकार करेगा।” 

मरिया अंजेला अपनी माँ मरिया ग्राजिया के साथ
मरिया अंजेला अपनी माँ मरिया ग्राजिया के साथ

विला में, "सामान्य जीवन" जीने का दिखावा

रेज्जो कलाब्रिया स्थित पाल्मी शहर के सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक विला माजिनी है, वहीं मरिया अंजेला रहती है। वहीं से सिसली द्वीप स्पस्ट रुप से दिखाई देता है, जैसे कि आइओलियन द्वीप है। उस विला में, विशेष रूप से गर्मियों में, माता-पिता सुबह में देर से मारिया अंजेला को बाहर लाते हैं, सूरज पहले से ही गर्म होता है, लेकिन हवा ताजी रहती है। एक तरफ समुद्र के नीले जल और दूसरी तरफ पेड़ पौधों की हरियाली विला को स्वर्ग बनाती है। "वहाँ सूरज की गर्मी और ताजी हवा है, क्या यह सच है मारिया अंजेला?" पिता ने बेटी को पुचकारते हुए कहा। उसके चेहरे पर बेटी के लिए छिपा दर्द झलकता है। दर्द प्रकट करने के बाद वो कहते हैं: "चलो दिखावा करते हैं कि जीवन सामान्य है।" मारिया अंजेला को शुभकामनाएँ!  साहसी परिवार को शुभकामनाएँ, जो बीस से अधिक वर्षों से हर दिन दुनिया को दिखा रहा है कि मानव व्यक्ति को केंद्र में रखने का क्या मतलब है। प्रत्येक जीवन और सभी की गरिमा।

मरिया अंजेला अपने पापा जुसेप्पे के साथ
मरिया अंजेला अपने पापा जुसेप्पे के साथ

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12 "से 39" तक: मरिया अंजेला क्रेआ के पिता डॉ. जुसेप्पे क्रेआ

"मरिया अंजेला एक बहुत ही स्वस्थ लड़की थी। 1998 में उसे दुर्भाग्य से मेनिन्जाइटिस हो गया जो बाद में एक इंसेफेलाइटिस बन गया। सितंबर 1998 से वह अपनी दुनिया में है, लेकिन उसने उसके लिए एक व्यक्ति होना बंद नहीं किया है।"

48 '' से 1'16 '': मरिया अंजेला क्रेआज्जो, मरिया अंजेला क्रेआ की दादी

"मारिया अंजेना को मेरा नाम मिला, क्योंकि उनके माता-पिता यही चाहते थे। वे मुझे बहुत प्यार करते हैं। वह बोलती नहीं है, लेकिन उसका जीवन जीने लायक है। मेरी पोती के करीब होना एक खुशी है, यह कुछ ऐसा है जिसे वर्णित नहीं किया जा सकता है। क्योंकि महान, असीम, अनंत होना पोती के लिए अच्छा है।

1'21 '' से 2'31 '': डॉ. जुसेप्पे क्रेआ मरिया अंजेला के पिता

"हमें नहीं पता कि वह अनुभव करती है, तो हमें यह भी पता नहीं कि क्या वह हमारी बात सुनती है। इसे नाक द्वारा ट्यूब से पोषित किया जाता है क्योंकि वो खुद से खाने और पीने में सक्षम नहीं है। लेकिन इस कारण से वह एक व्यक्ति होने की गरिमा को नहीं खो सकती। अगर मैं उसे खाना या पेय नहीं देता, तो मेरी बेटी मर जाती। इस स्थिति में लोगों को भूख और प्यास से मरने देने का मतलब है मानव जाति का अपमान करना, क्योंकि दुनिया में जो कुछ भी हुआ, उससे मेरी बेटी को अपनी गरिमा को खोना पड़ा। अगर मैं उसे खाना या पेय नहीं देता, तो वह मर जाती है। अगर मैं कुत्ते को खाना या पेय नहीं देता, तो मुझे जानवरों के अधिकारों पर हमला होता है क्योंकि मैंने एक जानवर को मार दिया है। किसी इंसान को भूख और प्यास से मरने देकर उसे मारना बहुत ही गंभीर बात है। लेकिन ऐसा हुआ है और एक ही बार नहीं।

2'40 '' से 3'01 '': मरिया अंजेला के पिता डॉ. जुसेप्पे क्रेआ

सौभाग्य से, यह विला है जो स्वर्ग है, वह यहाँ ठीक हैं। छाया में, वह शांत है, उसे बाहर ले जा सकते हैं और यह घर के करीब है, हम कुछ हवा और थोड़ी धूप लेने के लिए आते हैं, जो अच्छा है...क्या यह सच है मरिया अंजेला? और इसतरह हम दिखावा करते हैं कि यही सामान्य जीवन है।

मरिया अंजेला
18 October 2019, 14:38