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फादर रेनातो किएरा द्वारा स्थापित "कासा दो मिनोर"  फादर रेनातो किएरा द्वारा स्थापित "कासा दो मिनोर"   कहानी

अनचाहे बच्चों के पिता

फादर रेनातो किएरा सन् 1978 से ब्राजील की झुग्गियों में काम करते हैं। वे एक इताली मिशनरी हैं। वे अपने आपको एक सड़कों वाला पुरोहित कहते हैं और उन लोगों के साथ रहते हैं जिन्हें दुनिया में कोई प्यार नहीं करता। सन् 1986 में उन्होंने नाबालिगों के लिए एक आश्रय की स्थापना की है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रेनातो किएरा एक साधारण किसान के बेटे हैं। उनका जन्म 77 साल पहले एक गरीब परिवार में हुआ था। वे आठ भाई-बहनों में से एक हैं। उनका घर इटली के पिएदमोंते शहर के एक छोटे से गाँव रोराक्को में है। जब वे आठ साल के थे तभी उनके मन में संत जॉन बॉस्को के समान बनने की इच्छा उत्पन्न हुई। 12 साल की उम्र में पुरोहित बनने की इच्छा से उन्होंने सेमिनरी में प्रवेश किया। वे अपना जीवन दूसरों के लिए अर्पित करना चाहते थे। प्रशिक्षण के बाद जब उनका पुरोहिताभिषेक हुआ तब उन्होंने महसूस किया कि उसका हृदय बेचैन था और उसे लगा कि वह बाहर की दुनिया में जाए। उन्हें द्वितीय वाटिकन महासभा के समय, उसके पूर्व और उसके बाद भी मिशनरी बनकर बाहर जाने का अवसर मिला। मोनदोवी के धर्माध्यक्ष ने उन्हें ब्राजील के नोवाइग्वाकू धर्मप्रांत में जाने की सलाह दी जो रियो का एक विशाल एवं बहुधा हिंसा के चपेट में आनेवाला क्षेत्र है।  अतः 1978 में फादर रेनातो ने ब्राजील प्रस्थान किया और तभी से वहाँ समाज से बहिष्कृत लोगों की देखभाल कर रहे हैं।  

फादर रेनातो ने दर्शनशास्त्र विभाग को इस्तीफा दिया जहाँ वे प्राध्यापक का काम करते थे और एक भौगोलिक क्षेत्र में प्रवेश किया। वे कहते हैं, "मैं येसु से आकर्षित था जो दुःख उठाते और परित्यक्त, बहिष्कृत, निराश और प्रेम रहित लोगों में रोते हैं।"

कासा दो मिनोर के युवकों के साथ फादर रेनातो
कासा दो मिनोर के युवकों के साथ फादर रेनातो

जीवन बदल देने वाली घटनाएँ

फादर ने कहा, "मैंने उन बच्चों की कहानी एवं दुःखद दास्ताँ सुनी जो प्रेम नहीं किये जाते, जो घायल हैं और जो हिंसा, नशीली पदार्थों की लत एवं जल्द मृत्यु के शिकार हैं।" ऐसी ही एक घटना जो किशोर पिरादे की है जिसने उन्हें बहुत अधिक प्रभावित किया। फादर रेनातो ने उसे शरण दिया जब पुलिस ने उसे खदेड़ दी थी। बाद में पुलिस ने उसे फादर रेनातो के घर की दीवार पर गोली चलाकर मार डाली। फादर कहते हैं "मैं ब्राजील में कब्र खोदने नहीं बल्कि जीवन को बचाने आया था।" उन्हीं दिनों एक युवक ने उन्हें बतलाया कि किस तरह उस पल्ली में, एक ही माह के अंदर 36 बच्चों की हत्या कर दी गयी और मौत की उस पंक्ति में वह भी खड़ा था, जिसकी बारी कुछ समय बाद आने वाली थी। किसी की मदद नहीं पाने के कारण लाचार लड़के में फादर ने येसु के चेहरे को देखा और उन्हें लगा कि उसके लिए कुछ करना होगा। उन्हें उन बच्चों के पिता, माता और परिवार बनना होगा जिसको उन बच्चों ने कभी नहीं पाया है। ऐसे लोगों में ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करना। इसी बात ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया।    

परित्यक्त बच्चे

ये बच्चे बहुधा अपने परिवारों, स्कूलों और समाज द्वारा त्याग दिये जाते हैं और कई बार कलीसियाओं के द्वारा भी अलग कर दिये जाते हैं। वे सड़कों पर घूमते, उनकी नजरों में शून्य दिखाई पड़ता है मानो कि वे जीवित लाश हों। वे अपने ही देश में उखाड़ दिये गये हैं और उन्हें अपना कहने वाला कोई नहीं है। न कोई मार्गदर्शन देने वाला है, न उम्मीदें हैं और न ही भविष्य। उनके लिए सड़क ही सब कुछ है। वे क्रूर और बहिष्कार करने वाले समाज के शिकार हैं जो प्रेम करना नहीं जानता और अपनी मानवता की भावना को दरकिनार करता है। एक ऐसा समाज जो उन्हें नष्ट करना चाहता और उनकी पीड़ित आवाज में दोष पाता है।   

अनाथ बच्चों के साथ फादर रेनातो किएरा
अनाथ बच्चों के साथ फादर रेनातो किएरा

उनसे सबकुछ छीन लिया गया है। न तो उनके पास बच्चे कहलाने का अधिकार है न पलंग है, न भोजन, न खेलने एवं स्वप्न देखने की छूट और न ही भविष्य की कोई उम्मीद। वे एक ऐसे समाज के दर्पण हैं जिसमें रिश्तों को गंभीर रूप से तोड़-मरोड़ दिया गया है। वे दुःखद और डरावनी रूदन हैं। उनकी तस्वीर समाज के एक घने अंधेरे को दर्शाता है। पर वे अब पहले की तरह सड़कों पर जीवन व्यतीत नहीं करते। वे सुरक्षा और अपनेपन की खोज करते हैं। वे अपने जीवन को अर्पित करने, मार डालने और मर जाने के लिए तैयार हैं क्योंकि इस परिवेश का कानून यही मांग करता है।  

जब फादर रेनातो ने इस दुखद छवि को देखा तभी वे समझ गये कि उन्हें क्या करना है। उन्होंने उनके लिए एक समुदाय बनायी जहाँ उन्हें परिवार, प्रेम, शिक्षा, पेशा, भविष्य और सबसे बढ़कर मावन प्रतिष्ठा दे सकें। इस तरह "नाबालिगों के आश्रय" (कासा दो मेनोर) की स्थापना हुई।

पछतावा बिल्कुल नहीं

फादर रेनातो ने दर्शनशास्त्र विभाग और अपने देश का त्याग किया, जहाँ वे एक प्रोफेसर थे पर उसके लिए अब उन्हें कोई पछतावा नहीं है। अपनी चुनी हुई यात्रा में वे दूसरी कुर्सी पर बैठते और एक अलग तरह का दर्शनशास्त्र सीखते हैं। वे अपने आपको एक सड़क के पुरोहित के रूप में पाते हैं और क्राकोलांदिये (ड्रग का शहर) उनका नया महागिरजाघर है। यही वह स्थान है जहाँ वे ईश्वर से मुलाकात करते हैं जहाँ वे येसु के जीवित शरीर का आलिंगन करते हैं। जिन्होंने परित्यक्त लोगों के लिए आवाज दी और प्रेम तथा भविष्य की आशा प्रदान करते हैं। कई बार वे एक चुम्बन और एक चॉकलेट से संतुष्ट हो जाते हैं। वे क्राकोलान्दीये में समाज में विभाजन के परिणामों को अच्छी तरह जानते हैं।

नाबालिगों का घर

नाबालिगों का घर अब ब्राजील में चार राज्यों में स्थापित है। ये ऐसे समुदाय हैं जो अपने बच्चों को नहीं त्यागते बल्कि याद दिलाते हैं कि वे भी ईश्वर के प्रिय संतान हैं। अपनी 33 साल की उपस्थिति में उन्होंने करीब 1,00,000 बच्चों का स्वागत किया है उनमें से 70,000 लोगों के लिए नौकरी की तलाश भी की और उन्हें भविष्य की ओर देखने का रास्ता दिखलाया। फादर रेनातो अक्सर कहा करते हैं कि वे उन बच्चों में से एक को भी बचाने के लिए अपनी जान दे सकते हैं। नाबालिगों के घर ने एक समर्पित जीवन को प्रेरित किया है जिसका नाम है, "फमिलिया भीता" (पारिवारिक जीवन)। यह उन लोगों के लिए परिवार है जिनके कोई नहीं हैं। इस समर्पित जीवन के कई सदस्य कभी परित्यक्त सड़कों पर पड़े थे। यह समुदाय भविष्य की गारांटी देता है किन्तु इसे केवल एक गैर-सरकारी संगठन के रूप में नहीं देखा जा सकता। संत पापा फ्राँसिस ने अपने कई भाषणों में कलीसिया की भूमिका और मिशन पर प्रकाश डाला है।  

संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करते फादर रेनातो किएरा
संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करते फादर रेनातो किएरा

प्रेम का एक कार्य

बच्चों और युवाओं के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता होती है प्रेम। जिन्हें इसका नसीब नहीं होता वे दूसरों को भी प्यार नहीं दे पाते हैं। वे सब कुछ नष्ट करने के लिए तैयार हो जाते और अंततः अपने आप को भी नष्ट कर लेते हैं। यही कारण है कि वे न तो माता पिता बन सके और न ही अपने लिए भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

नाबालिगों का घर इस आवश्यकता का प्रत्युत्तर देता है और बच्चों एवं युवाओं को एक घर, एक परिवार, नौकरी एवं समाज में फिट होने और काम के जगत में जगह बनाने का अवसर प्रदान करता है। कई लोग ईश्वर के साथ अपने संबंध को नवीकृत करते हैं। वे अपने जीवन में उनकी विश्वस्त उपस्थिति को देख पाते हैं और जानते हैं कि वे कभी नहीं त्यागते।

फादर रेनातो याद करते हैं कि एक युवक किस तरह "नाबालिगों का घर" आया था। उसका सिर घायल था क्योंकि उसके पिता ने उसे गंदी नली में बंदकर, मार डालने की कोशिश की थी। माता दिवस को उसने फादर से अपनी मां से मुलाकात करने की अनुमति मांगी। लड़के ने घमंड से कहा, "मैंने उसके लिए एक कमीज खरीदी है और बतलाना चाहता हूँ कि मैं उन्हें प्यार करता हूँ।" जब वह घर लौटा तब देखकर आवाक रह गया, उसकी माँ मर चुकी थी। कुछ देर सोच में पड़ने के बाद लड़का वापस फादर रेनातो के पास लौटा और कमीज फादर को थमा दिया। उसने कहा, "अब आप ही मेरी माँ हैं।"  

जब आप फादर रेनातो से "नाबालिगों के घर" में रहने वाले बच्चों के बारे पूछेंगे तो उनके पास कहानियों की ढ़ेर है। रियो की सड़कों पर जिन युवकों की उन्होंने मदद की हैं उनके बारे वे घंटों बात कर सकते हैं।

एक कहानी इस प्रकार है, एक युवक नशीली पदार्थों की तस्करी में शामिल था। फादर रेनातो उससे छः वर्षों तक बीच-बीच में मिलते रहे। एक दिन अचानक वह नाबालिकों का घर आया और कहा, "फादर मैं आ गया हूँ। मैं आपकी मदद करना चाहता हूँ और एक नये जीवन की शुरूआत करना चाहता हूँ।" आज वह भी "फमिलिया भीता" का सदस्य है। उसे मोरादोरेस दे रूवा समुदाय का इंचार्ज बनाया गया है। यह घर नशीली पदार्थों की लत में पड़े बेघर लोगों के लिए खोला गया समुदाय है।

02 October 2019, 13:39