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नाईजिरिया में बाँझपन से संघर्षरत एक संस्था महिलाओं के साथ, तस्वीरः2018 नाईजिरिया में बाँझपन से संघर्षरत एक संस्था महिलाओं के साथ, तस्वीरः2018   (AFP or licensors)

सरोगेसी नैतिक रूप से अस्वीकार्य, भारतीय काथलिक वैज्ञानिक

भारतीय काथलिक वैज्ञानिक डॉ. पास्कल कार्वाल्हो के अनुसार, भारतीय संसद के निचले सदन में सोमवार को पारित सरोगेसी विधेयक 2019 नैतिक रूप से अस्वीकार्य है, हालांकि यह महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का दावा करता है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शुक्रवार, 9 अगस्त 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): भारतीय काथलिक वैज्ञानिक डॉ. पास्कल कार्वाल्हो के अनुसार,  भारतीय संसद के निचले सदन में सोमवार को पारित सरोगेसी विधेयक 2019 नैतिक रूप से अस्वीकार्य है, हालांकि यह महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का दावा करता है।

लोकसभा में 5 अगस्त को सरोगेसी अर्थात् किराए की कोख से जुड़ा एक बिल पास किया गया जिसके मुताबिक किराये से कोख लेने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है।

महिलाओं, बच्चों की सुरक्षा?

विधेयक को तैयार करनेवाले स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का दावा है कि नया कानून न केवल महिलाओं को दुर्व्यवहार से बचाएगा बल्कि सरोगेसी से उत्पन्न बच्चों के कानूनी अधिकारों को भी सुनिश्चित करेगा।

सरोगेसी नैतिक रूप से अस्वीकार्य 

सरकार के इन सब दावों के बावजूद काथलिक वैज्ञानिक डॉ. पास्कल कार्वाल्हो का कहना है कि किसी भी प्रकार की सरोगेसी नैतिक रूप से अस्वीकार्य है। टिशू कल्चर में वैज्ञानिक अनुसंधान करनेवाले काथलिक माइक्रोबायोलॉजिस्ट और इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. पास्कल कार्वाल्हो वाटिकन की जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी के साथ-साथ मुम्बई महाधर्मप्रान्त की मानव जीवन सम्बन्धी समिति के सदस्य भी हैं।

भारतीय सरोगेसी विधेयक पर काथलिक धर्मशिक्षा को समझाते हुए डॉ. कार्वाल्हो ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की सरोगेसी एक "नैतिक अपराध" है, इसलिये कि इसमें भ्रूण को उर्वरक बनाने के लिये वीट्रो फर्टेलाईज़ेशन तकनीक का उपयोग किया जाता है जो कि सरासर एक अनैतिक तकनीक है। उन्होंने कहा, "गर्भधारण के अप्राकृतिक साधनों" के माध्यम से एक बच्चे का जन्म काथलिक कलीसिया के लिए "नैतिक रूप से अस्वीकार्य" है।  

महिलाओं की प्रतिष्ठा

डॉ कार्वाल्हो ने कहा, जो लोग यह सोचते हैं के सरोगेट मदर्स परिवार का भला कर रहीं हैं वे भ्रम में पड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में जहाँ संयुक्त और विस्तृत परिवारों का प्रचलन है इन महिलाओं पर महान ख़तरा बना रहता है क्योंकि ऐसी स्थिति में, बाँझ महिला के पक्ष में, परिवार की अन्य महिला पर गर्भवती बनने के लिये दबाव डाला जा सकता है।  

इसके अलावा, इस प्रक्रिया में महिलाओं की गरिमा दांव पर रहती है क्योंकि सरोगेसी महिलाओं को "वस्तुओं" और उपकरणों के रूप में मानती है, जैसे बच्चों को जनने के लिये "मशीन किराए पर लेना"। अस्तु, उन्होंने कहा, "हर मामले में, सरोगेसी अस्वीकार्य है और "पूरी तरह से एक नैतिक अपराध" न केवल महिलाओं के खिलाफ बल्कि मानवता के खिलाफ भी।"

09 August 2019, 12:05