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आश्रयहीन लोगों की सेवा में कलीसिया

कई लोग शहर की ओर जाते हैं क्योंकि वे अपना घर और जमीन, हाईवे के निर्माण अथवा किसी उद्योग के कारण खो देते हैं। गरीबी और बेरोजगारी शहर की ओर जाने के अन्य प्रमुख कारण हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

मनिला, शनिवार, 9 अगस्त 19 (मैटर्स इंडिया)˸ जब 3.1 मिलियन लोगों के आश्रय के लिए जगह नहीं है मनिला विश्व के आश्रयहीन लोगों की सबसे बड़ी संख्या का घर है। बेघर लोगों में बच्चों की संख्या 70,000 है। 

इन आश्रयहीन लोगों को मनिला के मेट्रो पड़ावों, झुग्गियां, सेतुओं, सड़क किनारे, फुटपाथ, बाईपास, परित्यक्त इमारतों, वाहनों और गिरजाघरों के आसपास, और यहां तक कि कब्रिस्तानों में भी देखा जा सकता है।  

वे मेहतर का काम करते हैं, प्लास्टिक उठाते, निर्माण कार्यों को करते, फूल बेचते, कार पार्कों में सहायता पहुँचाते अथवा रिक्शा चलाने का काम करते हैं। दिन के समय कुछ लोग पैसा मांगते अथवा एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे, गिरजाघरों अथवा चैरिटी केंद्रों में भोजन की मांग करते हुए घूमते हैं।   

उनके लिए रहने, खाने-पीने एवं बिजली आदि की कोई सुविधा नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 106 मिलियन की आबादी में फिलीपींस में लगभग 4.5 मिलियन बेघर हैं। वहीं, अधिकार समूह कदममय के अनुसार, देशभर में सार्वजनिक आवास की लगभग 115,000 इकाइयाँ खाली हैं।

गरीबी इसका मुख्य कारण है। फिलीपींस के लगभग 25 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीते हैं। वे शहर में रहने का विकल्प चुनते हैं क्योंकि यह जगह उन्हें दैनिक आधार पर जीवित रहने का साधन प्रदान करती है।

ई. सी. लूना कंस्ट्रक्शन फर्म के अध्यक्ष एडुआर्ड डी लूना, मैला ढोने वालों और बेघर लोगों को खाना प्रदान करते हैं। यह केंद्र सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को निराश्रितों को अपने केंद्र में शाम 6 से 8 बजे तक भोजन देता है।

पवित्र हृदय पल्ली जो डिवाईन वॉर्ड पुरोहितों द्वारा संचालित है, वहाँ शुक्रवार को बेघर लोगों के लिए भोजन परोसा जाता है। रोजरी की कुँवारी मरियम की दोमिनिकन धर्मबहनें सोमवार को मुफ्त में भोजन देती हैं। 

बालक येसु के काले नाजरेथ दल द्वारा दया और सहानुभूति के रूप में शुक्रवार को कुछ लोगों के लिए भोजन दिया जाता है।   

डिवाईन वॉड पुरोहितों द्वारा संत अर्नोर्ड जानसेन कालिंगा केंद्र में गरीबों को उनकी प्रतिष्ठा प्राप्त करने में मदद दी जाती है। वहाँ सोमवार से शुक्रवार तक भोजन दिया जाता है। वे आश्रयहीन बच्चों को शिक्षा भी प्रदान करते हैं।

पवित्र क्रूस गिरजाघर, निष्कलंक गर्भागमन गिरजाघर, संत दोमिनिक गिरजाघर और अन्य गिरजाघर बेघर लोगों के लिए भोजन प्रदान करते हैं। 

वे केंद्र अपने- अपने क्षेत्र के गरीबों को भोजन प्रदान करते हैं किन्तु बहुत सारे लोगों को ये सुविधाएँ प्राप्त नहीं हो पातीं।

भोजन के अलावा लोगों की कई अन्य अवश्यकताएँ होती हैं। कई लोग बीमार हैं। अनेक लोग संक्रमक रोगों जैसा हीपाटैटिस, ट्यूबर क्यूलोसिस, एचआईवी या एड्स और क्षय रोग आदि से ग्रसित हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं।

सामाजिक कल्याण एवं विकास विभाग के सचिव इमानुएल लैको ने कहा, "समस्या का सामना करने के लिए, हमें बेघर लोगों को जानना होगा और उन कारणों को समझना होगा कि वे सड़कों पर क्यों हैं। उन्हें केवल आलसी के रूप में देखना और मानना कि यही इसका प्राथमिक कारण है कि वे सड़कों पर हैं, अन्यायपूर्ण है। उनमें से कई परिस्थितियों के शिकार हैं।"

कई लोग शहर की ओर जाते हैं क्योंकि वे अपना घर और जमीन, हाईवे के निर्माण अथवा किसी उद्योग के कारण खो देते हैं। गरीबी और बेरोजगारी शहर की ओर जाने के अन्य प्रमुख कारण हैं।

सरकार ने इन मुद्दों पर बहुत कम ध्यान देती है। सरकार की एकमात्र गरीबी-विरोधी योजना, 4 पी ने शायद ही गरीबों और बेघर लोगों को लाभ पहुंचाया है। सामाजिक कल्याण एवं विकास विभाग के अनुसार, 4 पी के मात्र 4,071 लाभार्थी हैं।

लैको ने कहा कि जब तक सरकार खाद्य और आय, चिकित्सा सहायता, सामाजिक सुरक्षा, विकलांगता बीमा जैसी मुख्यधारा के कार्यक्रमों की शुरुआत नहीं करती है, तब तक गरीब और बेघर लोगों की संख्या में वृद्धि जारी रहेगी, जो गरीबी और आश्रयहीनता का मुकाबला करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देगी।

10 August 2019, 17:39