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जिम्बाब्वे में संकट जिम्बाब्वे में संकट  (ANSA)

जिम्बाब्वे में मानवीय संकट के लिए कलीसिया का जवाब

जिम्बाब्वे की कलीसिया ने भूख से जूझ रहे लोगों की आवाज को सुने जाने की मांग की है। अमरीका की काथलिक एजेंसी काफोर्ड लोगों की मदद कर रही है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

जिम्बाब्वे, बृहस्पतिवार, 8 अगस्त 19 (वीएन)˸ काथलिक सहायता एजेंसी काफोर्ड के लिए जिम्बाब्वे के प्रतिनिधि वेरिटी जॉनसन ने कहा, "जिम्बाब्वे में यह एक खतरनाक वर्ष है, यह सूखे के साथ एक बड़े तूफान का सामना कर रही है जिसके कारण फसल नष्ट हो चुके हैं। चक्रवात के प्रभाव और आर्थिक संकट ने जिम्बाब्वे में भयंकर स्थिति उत्पन्न कर दी है।" 

कलीसिया का प्रत्युत्तर

हारारे से बात करते हुए उन्होंने गौर किया कि जिम्बाब्वे की कलीसिया कई स्तरों पर सक्रिय है। वह कई अन्य कलीसियाओं के धर्मगुरूओं के साथ, सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जिम्बाब्वे में भूख के संकट का जवाब देने की मांग करने हेतु कार्य कर रही है। वह राष्ट्रीय स्तर पर वार्ता की मांग कर रही है ताकि सभी नेता एक साथ आकर वर्तमान संकट के समाधान पर विचार कर सकें और आगे बढ़ने के रास्ते पर भी विचार कर सकें।

उन्होंने कहा कि कलीसिया इस स्थिति पर बहुत चिंतित है तथा हाल ही में उसने एक वक्तव्य जारी करते हुए लोगों से आग्रह किया था कि वे जिम्बाब्वे के परिवारों की पुकार सुनें और उसका उत्तर देने के लिए एक साथ आयें।

काफोर्ड का कार्य

वेरिटी ने कहा कि काफोर्ड कलीसिया के साथ सामुदायिक स्तर पर अत्यन्त व्यवहारिक रूप से कार्य कर रही है अतः हम इस कारितास संगठन के साथ धर्मप्रांतों और पल्लियों से जुड़े हैं। हम उनके साथ हालिया संकट का सामना अल्पकाल और दीर्घकाल दोनों के लिए करने हेतु कार्य कर रहे हैं।"

उन्होंने बतलाया कि अल्पकाल में विशेषकर, चक्रवातों की चपेट में आये लोगों को अन्य आवश्यक चीजों के साथ भोजन प्रदान किया जा रहा है। साथ ही साथ, वे लोगों को अपने पैरों पर खड़े होने में भी मदद कर रहे हैं। उन्हें पानी की आपूर्ति की बहाली और आगामी कृषि काल के लिए पौधे लगाने हेतु बीज उपलब्ध करा रहे हैं।    

काफोर्ड जिम्बाब्वे में करीब 50 सालों से कार्य करते आ रही है और वेरिटी ने कहा कि उन्होंने खुद देखा है कि जिन क्षेत्रों में एजेंसी काम कर पा रही है और जहाँ संसाधन नहीं पहुँचाये गये हैं उन दोनों के बीच एक बड़ा फर्क है। कुछ क्षेत्रों में बांधों का निर्माण किया गया है जबकि कुछ समुदाय ऐसे हैं जिन्हें पानी प्राप्त करने की सुविधा नहीं है खेत सूख गये हैं जिसके कारण खाने-पीने के अभाव में लोग काफी परेशान हैं।

जलवायु परिवर्तन  

देश में जो कुछ हो रहा है जैसे सूखा और चक्रवात के लिए, जलवायु परिवर्तन को दोष दिया जा रहा है। वेरिटी का कहना है कि जिम्बाब्वे निश्चय ही जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से प्रभावित है। तापमान बहुत अधिक बढ़ गया है, वर्षा कम हो गयी है जहाँ 70 प्रतिशत लोग खाने के लिए खुद ही फसल उगाते हैं।  

08 August 2019, 16:57