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सूडान में एक प्रदर्शन सूडान में एक प्रदर्शन  (AFP or licensors)

ख्रीस्तीय महिला का नाम माध्यमिक शासक परिषद में

सूडान के जेनरलों और विपक्षी नेताओं ने एक ख्रीस्तीय महिला आइशा मूसा साएद को 11-सदस्दीय माध्यमिक शासक परिषद के लिए सहमति व्यक्त की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

सूडान, बृहस्पतिवार, 22 अगस्त 2019 (रेई)˸ आइशा मूसा साएद को मंगलवार को सूडान की संप्रभु परिषद का 11वां सदस्य घोषित किया गया।

सूडान के जेनरलों और विपक्षी दोनों नेताओं ने एक कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स महिला को सत्ताधारी दल के सदस्य होने की सहमति जतायी है। सत्ताधारी दल में 6 नागरिक और 5 सैनिक हैं। समिति जिसने बुधवार को शपथ ग्रहण की, वह अगले चुनाव तक सूडान पर तीन सालों के लिए शासन करेगी।

मूसा एक न्यायाधीश हैं और उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के लीड्स विश्वविद्यालय में एक अनुवादक के रूप में अध्ययन किया है।

विस्थापित मध्यकालीन सैन्य परिषद (टीएमसी) के प्रवक्ता ने मंगलवार देर रात एक संवाददाता सम्मेलन में नामों की घोषणा की।

जेनेरल अबदेल फत्ताह अल बुरहान जो टीएमसी के प्रमुख थे, अप्रैल में राष्ट्रपति उमर अल बशीर के पद से हटने के बाद, 21 महीनों के लिए संप्रभु परिषद का नेतृत्व करेंगे उसके बाद, विपक्षी नेताओं द्वारा नियुक्त एक नागरिक नेता शेष 18 महीनों के लिए पदभार संभालेगा।

प्रदर्शनों में ख्रीस्तियों की भूमिका

समिति में एक कॉप्टिक महिला को जोड़ने के फैसले को, विरोध आंदोलन में ईसाइयों की भूमिका के लिए एक सहमति के रूप में देखा जा सकता है।

10 अप्रैल 2019 को मिलीटरी ने जब बशीर को गिरफ्तार किया, सूडानी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन ने ख्रीस्तियों से विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा था कि उन्हें "वर्षों से सांप्रदायिक और मनोवैज्ञानिक प्रतिबंध" झेलना पड़ा है।

उसके कुछ दिनों बाद, कई प्रोटेस्टेंट चर्च के नेताओं ने सैन्य मुख्यालय के बाहर बैठकर प्रदर्शन करना शुरू किया, जिसमें ख्रीस्तियों और मुसलमानों दोनों से भजन गाने का आग्रह किया गया था।

ख्रीस्तियों पर अत्याचार

बशीर के 30 सालों के शाषण में ख्रीस्तियों को बहुत अधिक अत्याचार एवं कड़ा व्यवहार सहना पड़ा। यूएस की एक गैर-सरकारी संगठन ऑपेन डोर ने 2018 में उन देशों की सूची में सूडान को 6वें स्थान पर रखा है जहाँ ख्रीस्तीय होना अत्याधिक कठिन है।  

जब 2011 में दक्षिणी सूडान ने स्वतंत्रता हासिल की, सूडान के अधिकांश ख्रीस्तियों के साथ राष्ट्रपति बशीर ने देश में बचे लोगों के साथ कड़ी कार्रवाई की।

कई ख्रीस्तीय गिरजाघरों को जला दिया गया तथा दर्जनों गिरजाघरों को बिना लाइसेंस के भवन के रूप में सरकार द्वारा ढाह दिये गये। 2013 के बाद नये गिरजाघरों के लिए लाईसेंस की आवश्यकता नहीं है।  

विश्व ख्रीस्तीय आँकड़ों के आधार पर सूडान में 43 मिलियन आबादी के बीच ख्रीस्तियों की संख्या 4.6 प्रतिशत है।

22 August 2019, 16:28