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काबूल की सरकार के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के सदस्यों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं एवं तालीबान नेताओं की एक सभा काबूल की सरकार के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के सदस्यों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं एवं तालीबान नेताओं की एक सभा   (AFP or licensors)

अफगानिस्तान में वार्ता ˸ शांति हेतु रोड़ मैप

दोहा में, काबूल की सरकार के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के सदस्यों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं एवं तालिबान नेताओं की एक सभा सम्पन्न हुई। सभा का उद्देश्य था सार्वजनिक संस्थानों की रक्षा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

दोहा, मंगलवार, 9 जुलाई 2019 (रेई)˸ शांति के रास्ते के लिए एक मानचित्र जो अफगानिस्तान में 18 सालों से हो रहे युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए रास्ता तैयार कर रहा है। यह कबूल सरकार एवं तालिबान नेताओं के बीच एक प्रारम्भिक ऐतिहासिक समझौता है जो कतार के दोहा में सम्पन्न हुई। माना जा रहा है कि यह परिणाम वर्षों की कोशिश के बाद मिला है।

सभा जर्मनी और कतार के तत्वधान में 

सभा जर्मनी और कतार के तत्वधान में 7-8 जुलाई को दोहा में आयोजित की गयी थी। पहले भी कई बार वार्ता का आयोजन किया गया था जिसमें अमरीका ने भी भाग लिया था किन्तु इस बार वह अनुपस्थित रहा। पूर्व आयोजित वार्ता को सफलता नहीं मिली, इसका कारण यह था, अफगान क्षेत्र पर विदेशी सैन्य उपस्थिति के प्रति तालिबान का विरोध और राष्ट्रपति अशरफ गनी के प्रशासन की आलोचना जिसे वाशिंगटन द्वारा नियोजित एक "कठपुतली" सरकार मानी जाती है।  

अफगान महिला जगत के समर्थन में, 50 वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नागरिक समाज के सदस्य, महिला कार्यकर्त्ता और इस्लामी आतंकवादियों के 17 नेता कतार की राजधानी में एकत्रित हुए थे। सभा एक संयुक्त बयान के साथ समाप्त हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने "लोगों की गरिमा का सम्मान और रक्षा करने, लोगों एवं उनकी संपत्ति को बचाने और नागरिक को बिल्कुल हानि नहीं पहुँचाने का वादा किया गया।

शांति समझौते की निगरानी और निरीक्षण

दोनों पक्षों ने "शांति समझौते की निगरानी और निरीक्षण" करने की इच्छा पर एक महत्वपूर्ण समझौता किया, जिसमें "प्रवासियों का प्रत्यावर्तन और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों की वापसी शामिल है।"

उपस्थित सदस्यों में से कुछ ने इस बात पर जोर देना चाहा कि संयुक्त घोषणा शांति समझौता नहीं है बल्कि शांति प्राप्त करने की अनुशंसा को प्रस्तुत करता है तथा देश के भविष्य पर गंभीरता से विचार करने का आधार है, जहाँ 18 वर्षों से नागरिक युद्ध जारी है। यहाँ हमले के कारण दैनिक जीवन खतरों से भरा है, बच्चे स्कूल जाने में असमर्थ हैं तथा कलात्मक विरासत बेईमान कला तस्करों द्वारा लूटा जा रहा है।  

शिक्षा के बारे में बात करते हुए, इंट्रा-अफगान वार्ता ने "स्कूलों, मदरसों [कुरान स्कूलों], अस्पतालों, बाजारों, बांधों और कार्यस्थलों सहित" सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

महिलाओं का अधिकार एक महत्वपूर्ण मुद्दा 

महिलाओं का अधिकार एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जबकि तालिबान सरकार (1996-2001) के दौरान उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्हें  अध्ययन के अधिकार से वंचित किया गया। हाथ मिलाने एवं सम्मानजनक जीवन जीने की मांग करने और अपने आप को प्रकट करने पर, उनकी कलाई तक कटी जा सकती थी। दोहा की सभा ने यह सुनिश्चित करने का प्रण किया है कि राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में महिलाओं के अधिकारों की गारंटी इस्लामिक मूल्यों के दायरे में है।

09 July 2019, 16:37