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जापान के प्रधान मंत्री शिंजो आबे कुष्ठ रोगियों के परिवार के सदस्यों  से माफी मांगते हुए जापान के प्रधान मंत्री शिंजो आबे कुष्ठ रोगियों के परिवार के सदस्यों से माफी मांगते हुए   (ANSA)

जापानी धर्माध्यक्षों ने कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों से मांगी माफ

जापान के काथलिक धर्माध्यक्षों ने कुष्ठ रोग या हैनसेन रोग से प्रभावित लोगों से माफी मांगी है। जापानी प्रधानमंत्री द्वारा इस रोग से प्रभावित लोगों से माफी मांगने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

जापान, शनिवार, 20 जुलाई 2019 (वाटिकन न्यूज) : जापान के काथलिक धर्माध्यक्षों ने एक बयान में कहा, "हम जापान के काथलिक कलीसिया के धर्माध्यक्ष, हैनसेन बीमारी से पीड़ित लोगों से, उनके परिवारों से और उनके परिवार वालों से माफी मांगते हैं, जिनकी मृत्यु हो गई है।"

हैनसेन रोग

कुष्ठ रोग, जिसे हैनसेन रोग के रूप में भी जाना जाता है, अब इलाज योग्य है, लेकिन 1907 और 1996 के बीच सरकार की अलगाव नीति के तहत कई रोगियों को स्वास्थ्यालय में अलग कर दिया गया था और उनके परिवार के सदस्य कुष्ठ रोगियों के रिश्तेदार होने के कलंक से पीड़ित थे।

धर्माध्यक्ष स्वीकार करते हैं कि उन्होंने "मरीजों के अलगाव और विनाश का विरोध नहीं किया, मुआवजे और बहाली के लिए मरीजों के अधिकारों का समर्थन नहीं दिया। वे उन मरीजों और उनके परिवारों के साथ उनके दुःख में अपनी सहभागिता नहीं दिखाई जिनके अधिकारों की सुरक्षा की जरूरत थी।

अपने बयान में उन्होंने कहा कि, “1996 में, जब कुष्ठ निवारण अधिनियम को समाप्त कर दिया गया था, तब कुमामोटो जिला न्यायालय के एक फैसले ने नुकसान के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया था और 2001 में पूर्व रोगियों को मुआवजा दिया गया था। 2005 की फाइनल रिपोर्ट में जब हैनसेन की बीमारी पर अध्ययन परिषद ने वास्तविक स्थितियों और नुकसान के कारणों और उनके पुनरावृत्ति को रोकने के उपायों को संक्षेप में बताया, तब भी धर्माध्यक्षों ने उन लोगों उनके परिवारों के प्रति अपनी उदासीनता के लिए माफी नहीं मांगी।”

उन्होंने कहा, “आज, हम हमारे सभी गलतियों के लिए अपने पश्चाताप को व्यक्त करते हैं और सभी से मांफी मांगते हैं।”

अलगाव और कलंक

जापानी धर्माध्यक्षों ने कहा कि 1943 में, हेमन्स रोग को आसानी से ठीक कर देने वाली दवा ‘प्रोमिन’ विकसित की गई थी। 1956 में, रोगी संरक्षण और पुनर्वास अधिनियम पर परमधर्मपीठ ने कुष्ठ निवारण जैसे भेदभावपूर्ण कानूनों को समाप्त करने का आह्वान किया। फिर भी, 2001 तक जापान की राष्ट्रीय नीति में बदलाव नहीं हुआ और मरीजों को जीवन भर अलग-थलग रखा गया।

धर्माध्यक्षों ने कहा, “उन रोगियों और उनके परिवारों की पीड़ा को जोड़ने के लिए हमें जो गहरा पछतावा है, उसे व्यक्त करने के लिए, "शब्द पर्याप्त नहीं हैं," अब उन रोगियों और उनके परिवार के सदस्यों में से कई को नर्सिंग देखभाल, के लिए  भर्ती कराया गया है।”  

धर्माध्यक्षों ने यह कहते हुए अपने माफीनामे को समाप्त किया कि येसु मसीह के अनुयायी के रूप में वे उस पाप को नहीं दोहराने का वादा करते हैं और फिर कभी मानवाधिकारों का सम्मान करने में विफल नहीं होंगे।  

सरकार द्वारा माफी

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने शुक्रवार को कुष्ठ रोगियों के परिवार के सदस्यों को उनके कष्ट के लिए माफी की पेशकश की। जापानियों ने हैनसेन के पूर्व पीड़ित मरीजों के परिवारों को नुकसान का भुगतान करने के लिए अदालत के फैसले की अपील नहीं की। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने "समाज में अत्यंत गंभीर पूर्वाग्रह और भेदभाव को समाप्त किया है।"

20 July 2019, 15:12