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अफगानिस्तान की राजधानी काबूल के निकट एक स्कूल की कक्षा अफगानिस्तान की राजधानी काबूल के निकट एक स्कूल की कक्षा  (AFP or licensors)

"शांति के स्कूल" में अफगानी बच्चे

अफगानिस्तान की राजधानी काबूल के निकट इताली बेर्नाबाईट मिशनरी फादर जुसेप्पे मोरेत्ती ने "तांजी कैली - शांति के स्कूल" की स्थापना की है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिनक सिटी

अफगानिस्तान की काथलिक कलीसिया की सहायता से एक सरकारी स्कूल की स्थापना की गयी है जिसमें करीब 3,000 बजे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्हें शांति, आपसी स्वीकृति एवं स्वागत करने जैसे मूल्यों की शिक्षा दी जा रही है।

"तांजी कैली - शांति का स्कूल" अफगानिस्तान की राजधानी काबूल के निकट है जिसकी स्थापना इताली बेर्नाबाईट मिशनरी फादर जुसेप्पे मोरेत्ती ने 2005 में की थी। स्कूल में 10 कक्षाएँ हैं।   

मिशनरी फादर जुसेप्पे मोरेत्ती ने वाटिकन न्यूज एजेंसी फिदेस को बतलाया कि उन्होंने एक निधि बढ़ाने वाले अभियान के द्वारा 250 डेस्क के लिए, स्कूल के प्रधानाध्यापक के आग्रह को पूरा कर दिया।

80 वर्षीय फादर मोरेत्ती, स्वतंत्र मिशन (मिसियो स्वी इयूरिस) की 2002 में स्थापना से 2014 तक सुपीरियर रहे। उसके बाद वे सेवानिवृत हो चुके हैं।

तांजी कैली – शांति का स्कूल एक सरकारी स्कूल है जिसमें विषय एवं शिक्षक अफगान सरकार द्वारा चुने जाते हैं। फिर भी यह केवल निजी अनुदान पर चलाया जा रहा है। स्टेशनरी और विज्ञान प्रयोगशाला के उपकरण सरकार की ओर से प्रदान किये जाते हैं।  

फादर स्कालेस ने फिदेस को बतलाया कि चार साल के बाद, फादर मोरेत्ती फादर स्कालेस के ग्रीष्म अवकाश के दौरान उनके स्थान पर इटली से अफगानिस्तान जा रहे हैं।

उन्होंने बतलाया कि जिन लोगों को उनके आने की खबर मिली है वे उन्हें पुनः देख पाने के लिए उत्साहित हैं।

अफगानिस्तान की शिक्षा प्रणाली तीन दशक से अधिक समय से जारी संघर्ष द्वारा तबाह हो गई है। नामांकन बढ़ाने में हालिया प्रगति के बावजूद, देश के कई बच्चों के लिए, प्राथमिक शिक्षा पूरा करना एक दूर का सपना है - विशेष रूप से, ग्रामीण क्षेत्रों में और लड़कियों के लिए।

संयुक्त राष्ट्र के बाल निधि विभाग, यूनिसेफ ने अनुमान लगाया है कि अफगानिस्तान में करीब 3.7 मिलियन बच्चे स्कूल से बाहर हैं जिनमें से 60 प्रतिशत संख्या लड़कियों की है।

फादर मोरेत्ती ने वाटिकन न्यूज एजेंसी को बतलाया कि "यदि हम अफगानिस्तान जैसे देश में शांति स्थापित करना चाहें तब हमें इसकी शुरूआत स्कूलों से करनी होगी, नई पीढ़ी को शिक्षित करना होगा। यह एक लम्बी यात्रा है किन्तु यह संभव है।"   

अफगानिस्तान में इस्लाम को राष्ट्रीय धर्म के रूप में मान्यता प्राप्त है तथा दूसरे धर्मों को अपनाना धर्मत्याग का अपराध माना जाता है। अतः जरूरतमंदों की सेवा एवं मानवीय गतिविधियाँ ही अफगान मिशनरियों के लिए एकमात्र विकल्प है।

अफगानिस्तान में काथलिकों का अस्तित्व 20वीं सदी के आरम्भ से है जिन्हें काबूल में इताली राजदूत द्वारा सामान्य आध्यात्मिक सहायता प्रदान की जाती है। इसको 2002 में संत पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा मिसियो स्वी इयूरिस के स्तर तक पहुँचाया गया। यह मिशन आज भी जारी है और इताली राजदूत एवं फादर स्कालेस के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है।    

यहाँ मिशनरीस ऑफ चैरिटी (मदर तेरेसा) की धर्मबहनें भी अपनी सेवाएँ दे रही हैं, उनके साथ अंतर-धर्मसंघी गैर-सरकारी संगठन भी अपनी सेवा दे रहा है जिसे "काबूल के बच्चों का विकास" नाम दिया गया है।

09 July 2019, 16:55