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श्रीलंका के गिरजाघर में आक्रमण का दृश्य श्रीलंका के गिरजाघर में आक्रमण का दृश्य  (AFP or licensors)

वाटिकन ने धार्मिक चरमपंथ से लड़ने हेतु सहिष्णुता की अपील की

अमरीका के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेर्नादीतो औज़ा ने 24 जून को, सहिष्णुता एवं समावेशी संस्कृति को बढ़ावा देते हुए आतंकवाद एवं धार्मिक विश्वासियों पर विभिन्न प्रकार की हिंसा का सामना करने पर आयोजित सम्मेलन को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन प्रतिनिधि ने हर धर्म के खिलाफ चरमपंथ का मुकाबला, सहिष्णुता एवं समावेश को बढ़ावा देते हुए धैर्य, दृढ़ता, विवेक, साहस एवं नेतृत्व के साथ करने की अपील की।  

महाधर्माध्यक्ष औज़ा ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि हम सभी छोटे अथवा लम्बे समाधान के हिस्सा बनेंगे।"   

न केवल निंदा बल्कि कार्रवाई

यहूदियों, मुसलमानों, ख्रीस्तियों और अन्य धर्मों के विश्वासियों पर हमले खासकर, विगत पास्का पर्व के दिन श्रीलंका के ख्रीस्तियों पर हुए हमले की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि केवल हमले की निंदा करना पर्याप्त नहीं हैं बल्कि राज्य की जिम्मेदारी है कि इसके लिए कार्रवाई भी करे ताकि देश के सभी नागरिकों का समान रूप से रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि सहिष्णुता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है सांस्कृतिक कारकों को दृढ़ता से संबोधित किया जाए।   

अंतःकरण, धर्म एवं आस्था की स्वतंत्रता

परमधर्मपीठ के प्रतिनिधि ने चरमपंथ का सामना करने के लिए कई उपाय बतलाये। उन्होंने कहा कि सहिष्णुता और समावेशिता को, अंतःकरण, धर्म एवं आस्था की स्वतंत्रता के अधिकार को, मजबूत प्रोत्साहन देने के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने रिपोर्ट पर गौर किया कि दुर्भाग्य से कई देशों में आधिकारिक राज्य धर्म द्वारा अन्य धर्मों पर रूकावट डाला जाता है।

यहाँ तक कि उन राष्ट्रों में जहां एक धर्म को विशेष संवैधानिक दर्जा दिया जाता है, महाधर्माध्यक्ष ने अपील की कि सभी नागरिकों को न्याय हेतु कानून का समान अधिकार दिया जाए, चाहे वे किसी भी जाति या धर्म के क्यों न हों।  

धर्म और राष्ट्र के बीच सकारात्मक एवं सम्मान पूर्ण अंतर रखने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों को नागरिकों की भलाई के लिए एक साथ आना चाहिए।

राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक नेताओं की जिम्मेदारी

वाटिकन अधिकारी ने घृणा और हिंसा को उकसाने या उत्पीड़न, निर्वासन, हत्या या आतंकवाद के कृत्यों को सही ठहराने के लिए धर्म के उपयोग को सभी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक नेताओं द्वारा निंदा करने पर जोर दिया। साथ ही साथ, उन्होंने कहा कि केवल धर्मों को हिंसा अथवा हत्या के लिए दोष नहीं देना चाहिए बल्कि उन लोगों को दोष दिया जाना चाहिए जो धर्म की गलत व्याख्या करते या बुराई करने के लिए उसमें हेर-फेर करते हैं, उदाहरण के लिए ईश्वर का नाम राजनीतिक या विचारधारा के मकसद से लिया जाना।  

मन एवं हृदय का प्रशिक्षण

महाधर्माध्यक्ष ने अंतर-सांस्कृतिक एवं अंतर-धार्मिक संवाद हेतु सच्चे समर्पण को प्रोत्साहन दिया तथा हृदय एवं मन के प्रभावशाली प्रशिक्षण पर जोर दिया, विशेषकर, युवाओं को, यह सुनिश्चित करते हुए कि स्कूलों, और इंटरनेट में उग्रता अथवा चरमपंथी कट्टरता नहीं है।  

 

25 June 2019, 17:31