Cerca

Vatican News
डी दिवस की 75वीं वर्षगांठ डी दिवस की 75वीं वर्षगांठ  (ANSA)

डी दिवस की 75वीं वर्षगांठ, शांति को बढ़ावा देने का आह्वान

कार्डिनल क्वेलेत ने डी दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर फ्रांस के शहर नोर्मंडी के कोलेविले-सुर-मेर में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया, जहां 1944 में मित्र देशों की सेना उतरी थी। उन्होंने संत पापा फ्राँसिस के संदेश को भी पढ़कर सुनाया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 जून 19 (रेई)˸ 6 जून 1944 को, मित्र देशों की 150,000 से अधिक सेनाओं ने उत्तरी फ्रांसीसी तट पर हमला किया, जिसके कारण नाज़ी कब्ज़ेदारों से फ्रांस की मुक्ति की शुरुआत हुई।

डी दिवस को द्वितीय विश्व युद्ध के एक निर्णायक क्षण के रूप में याद किया जाता है, और इस वर्ष इसकी 75वीं वर्षगांठ है।

यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के नेतृत्व में जिन 16 देशों ने द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया था एक संयुक्त घोषणापत्र पर यह प्रतिज्ञा करते हुए हस्ताक्षर किया था कि द्वितीय विश्व युद्ध के अकल्पनीय आतंक को फिर कभी दोहराया नहीं जाएगा।

6 जून के इस समारोह में भाग लेने के लिए फ्राँस एवं अमरीका के राष्ट्रपति के साथ सैकड़ों दिग्गज, उत्तरी फ्राँस गये हैं।

बुधवार को समारोह का उद्घाटन करते हुए धर्माध्यक्षों के धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल मार्क क्वेलेत ने वहाँ के महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने वाटिकन रेडियो से कहा कि वे वहाँ जाकर "काथलिक कलीसिया के शांति के संदेश का साक्ष्य देकर खुश हैं।"

उन्होंने स्मरण दिलाया कि संत पापा फ्राँसिस इस बात को बार-बार दुहराते हैं कि आज दुनिया में तृतीया विश्व युद्ध खंडों में लड़ा जा रहा है जिसके मद्देनजर हमारी अत्यावश्यक जिम्मेदारी है कि हम शांति, मुलाकात एवं वार्ता की संस्कृति को बढ़ावा दें।

कार्डिनल ने कहा कि यह उनके लिए युद्ध के शिकार लोगों एवं कनाडा के कई सैनिकों जिन्होंने इसमें भाग लिया और अपनी जानें दी उन्हें श्रद्धांलि अर्पित करने का सुन्दर अवसर था।

उन्होंने कहा, "मैं प्रभु को उनकी कृपाओं के लिए धन्यवाद देता हूँ तथा साथ ही साथ  विश्व में शांति एवं वार्ता की संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु समर्पित महसूस कर रहा हूँ।"

 

06 June 2019, 17:38