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बुजुर्ग महिला व्यायाम करते हुए बुजुर्ग महिला व्यायाम करते हुए 

डिमेंशिया का उपचार बेहतर जीवनशैली

स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर जैसे नियमित व्यायाम करने, कम मात्रा में शराब और सिगरेट पीने से डिमेंशिया (मनोभ्रम) के जोखिम को कम किया जा सकता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

न्यूयॉर्क, बुधवार,14 मई 2019 (यूएन न्यूज) :  डिमेंशिया एक सिंड्रोम है जिससे मरीज़ की याददाश्त बिगड़ने के साथ उसके व्यवहार में बदलाव देखने को मिलते हैं और दिनचर्या के काम करने में मुश्किलें पेश आती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर, जैसे नियमित व्यायाम करने, कम मात्रा में शराब और सिगरेट पीने से डिमेंशिया (मनोभ्रम) के जोखिम को कम किया जा सकता है।

दुनिया भर में पांच करोड़ से अधिक लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं और हर साल इस दिमागी बीमारी के एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से कई देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ भी बढ़ रहा है।

कुछ अनुमानों के अनुसार अगले 30 सालों में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ सकती है जो एक चिंता का विषय है।

नये दिशा निर्देश

डिमेंशिया से बचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नये दिशा निर्देश जारी की है ताकि सरकारों और स्वास्थ्य कर्मियों को राष्ट्रीय नीतियां तैयार करने में मदद मिल सके। जारी नए दिशा निर्देशों के अनुसार डिमेंशिया होने के जोखिम को कम करने के लिए जीवन शैली में जो बदलाव लाए जा सकते हैं उनमें वज़न पर नियंत्रण करना, सेहतमंद खाना, उचित रक्तचाप बनाए रखना और कोलेस्ट्रोल और खून में शुगर की मात्रा को सही रखना है।

अन्य उपायों में रोग की पहचान की प्रक्रिया को मज़ूबत करना, उसका सही उपचार करना और मरीज़ की देखभाल करना है। डिमेंशिया से पीड़ित लोगों की देखभाल करने वाले लोगों के लिए ऑनलाइल सेवा उपलब्ध कराने पर ख़ास ज़ोर दिया गया है।

ऑनलाइल प्रशिक्षण

मानसिक स्वास्थ्य विभाग में निदेशक डॉ. डेवोरो केस्टेल ने बताया कि “डिमेंशिया मरीज़ों की देखभाल करने वाले आमतौर पर परिजन होते हैं जिन्हें अपने प्रियजनों की देखभाल के लिए कामकाजी जीवन और पारिवारिक जीवन में बड़े बदलाव करने पड़ते हैं। इसीलिए संगठन ने इ सपोर्ट (iSupport) शुरू किया है। यह एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसके ज़रिए डिमेंशिया मरीज़ों की देखभाल कर रहे लोगों को ज़रूरी सलाह प्रदान की जाती है और बताया जाता है कि मरीज़ों के व्यवहार में बदलावों के अलावा अपनी सेहत का भी कैसे ख़्याल रखा जाए।”

15 May 2019, 16:55